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अम्बिकापुर@दो गेट पर गार्ड फिर भी छात्राओं से अभद्रता,होली क्रॉस कॉलेज की सुरक्षा पर सवाल

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एमजी रोड से प्रवेश,बनारस रोड गेट से निकासी…छात्राओं से हुज्जतबाजी की शिकायत,अभिभावकों में सुरक्षा को लेकर चिंता…

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,30 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। शहर के होली क्रॉस महिला महाविद्यालय परिसर से होकर गुजरने वाले मार्ग पर बाहरी लोगों की आवाजाही और छात्राओं के साथ कथित अभद्र व्यवहार को लेकर कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में है। हाल ही में एक बाहरी व्यक्ति द्वारा कुछ छात्राओं के साथ अभद्रता किए जाने की बात सामने आई है। छात्राओं के अनुसार,एमजी रोड स्थित मुख्य गेट से प्रवेश करने वाले कुछ लोग परिसर के रास्ते से होकर बनारस रोड की ओर स्थित गेट से बाहर निकल जाते हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि दोनों गेट पर सुरक्षा गार्ड तैनात होने के बावजूद इस तरह की गतिविधियों पर प्रभावी रोक क्यों नहीं लग पा रही है।
सबसे अहम बात यह है कि कॉलेज प्रबंधन खुद इस मार्ग को आम रास्ता नहीं मानता। कॉलेज की प्राचार्य सिस्टर शांता जोसेफ ने मामले पर कहा कि मामले को कमेटी में रखा जाएगा और उस पर विचार किया जाएगा। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह आम रास्ता नहीं है। यदि कोई व्यक्ति इसे आम रास्ता समझकर इसका उपयोग करता है तो यह अवैधानिक है। प्राचार्य के इस बयान के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल और गंभीर हो जाता है। जब कॉलेज प्रशासन के अनुसार रास्ता आम उपयोग के लिए नहीं है,तो फिर बाहरी लोग वहां प्रवेश कैसे कर रहे हैं? दोनों गेट पर सुरक्षा गार्ड की तैनाती के बावजूद ऐसे लोगों की पहचान और आवाजाही पर निगरानी क्यों नहीं हो पा रही है? यदि कोई व्यक्ति छात्राओं से अभद्रता करता है तो उसे तत्काल रोकने और कॉलेज प्रबंधन को सूचना देने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है,यह भी जांच का विषय है।
गार्ड तैनात,फिर भी निगरानी पर सवाल : कॉलेज के दोनों प्रवेश द्वारों पर आवश्यकता के अनुसार सुरक्षा गार्ड मौजूद रहते हैं। इसके बावजूद यदि बाहरी व्यक्ति परिसर के मार्ग का इस्तेमाल कर रहे हैं और छात्राओं से हुज्जतबाजी या अभद्रता की शिकायत सामने आ रही है तो सुरक्षा व्यवस्था की वास्तविक प्रभावशीलता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। केवल गेट पर गार्ड की मौजूदगी पर्याप्त नहीं,बल्कि उनकी जिम्मेदारी और निगरानी व्यवस्था भी स्पष्ट होनी चाहिए। छात्राओं और अभिभावकों की चिंता इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह महिला महाविद्यालय है। बेटियों को कॉलेज भेजने वाले अभिभावक यह अपेक्षा करते हैं कि कॉलेज परिसर और उसके प्रवेश-निकास क्षेत्र में सुरक्षित वातावरण मिले। ऐसे में किसी बाहरी व्यक्ति की कथित अभद्रता की घटना को सामान्य मानकर छोड़ना छात्राओं के मन में असुरक्षा की भावना पैदा कर सकता है।
अब कमेटी के फैसले पर नजर : प्राचार्य द्वारा मामले को कमेटी में रखने की बात कही गई है। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि कमेटी केवल घटना पर चर्चा करती है या कॉलेज की सुरक्षा व्यवस्था की पूरी समीक्षा भी की जाती है। कॉलेज प्रबंधन को यह स्पष्ट करना होगा कि दोनों गेट से बाहरी लोगों की आवाजाही रोकने के लिए क्या व्यवस्था है, सीसीटीवी कैमरे किस स्थिति में हैं, गार्ड को क्या जिम्मेदारी दी गई है और छात्राओं की शिकायत मिलने पर तत्काल कार्रवाई की प्रक्रिया क्या है।
यदि रास्ता कॉलेज की निजी संपत्ति अथवा परिसर का हिस्सा है और आम रास्ता नहीं है, जैसा कि प्राचार्य ने स्पष्ट किया है, तो वहां अनधिकृत आवाजाही रोकना और भी जरूरी हो जाता है। इसके लिए दोनों गेट पर स्पष्ट सूचना बोर्ड, नियमित निगरानी,सीसीटीवी की प्रभावी व्यवस्था और संदिग्ध लोगों की तत्काल पहचान जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। मामला सिर्फ एक घटना का नहीं है। सवाल यह है कि जब कॉलेज प्रबंधन के अनुसार यह आम रास्ता ही नहीं है, तब बाहरी लोगों की आवाजाही वहां तक पहुंच कैसे रही है और छात्राओं को असहज स्थिति का सामना क्यों करना पड़ रहा है। अब निगाहें कॉलेज की कमेटी की बैठक और उसके बाद होने वाली कार्रवाई पर रहेंगी। अभिभावक भी यह देखना चाहेंगे कि शिकायत के बाद व्यवस्था में वास्तविक बदलाव होता है या मामला केवल बैठक और विचार तक सीमित रह जाता है।


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