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सूरजपुर@ वर्षों से सामूहिक सहभागिता से होने वाले रावण दहन आयोजन को सीमित दायरे में करने की चर्चा से नाराजगी,नगरवासियों ने व्यापक बैठक बुलाने की मांग की

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-संवाददाता-
सूरजपुर,28 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)।
शहर में वर्षों से सामाजिक सहभागिता, आपसी सहयोग और सामूहिक भागीदारी के साथ आयोजित होता आ रहा दशहरा पर्व इस बार आयोजन समिति को लेकर चर्चा में आ गया है, महज चार लोगों की समिति बनाकर दशहरा आयोजन की जिम्मेदारी सौंपे जाने की चर्चा के बाद नगर में सवाल उठने लगे हैं, नागरिकों का कहना है कि दशहरा किसी एक व्यक्ति, समूह या समिति का आयोजन नहीं, बल्कि पूरे नगर का सामूहिक पर्व है, ऐसे में वर्षों से चली आ रही परंपरा में इस बार सीमित भागीदारी क्यों रखी जा रही है, यह स्पष्ट किया जाना चाहिए।
सामूहिक आयोजन को सीमित करने पर सवाल- नगर में प्रत्येक वर्ष दशहरा पर्व के अवसर पर दशहरा आयोजन समिति के माध्यम से रावण दहन सहित विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं, इस आयोजन में शहर के अलग-अलग समाजों के लोग, समाजसेवी, नागरिक और जनप्रतिनिधि अपनी भूमिका निभाते रहे हैं, यही व्यापक सहभागिता इस आयोजन को नगर के सामाजिक मेल-जोल और आपसी भाईचारे का प्रतीक बनाती रही है, लेकिन इस बार चार लोगों की समिति के माध्यम से आयोजन की जिम्मेदारी तय किए जाने की चर्चा सामने आने के बाद कई नागरिकों में नाराजगी बताई जा रही है, लोगों का सवाल है कि जब दशहरा वर्षों से पूरे नगर की सहभागिता से आयोजित होता आया है, तो इस बार आयोजन को सीमित दायरे में रखने की जरूरत क्यों महसूस हुई?
किस आधार पर बनी समिति?- नगर में सबसे बड़ा सवाल समिति के गठन की प्रक्रिया को लेकर उठ रहा है, लोगों के बीच चर्चा है कि समिति बनाने से पहले क्या वर्षों से आयोजन में सक्रिय रहे समाजसेवियों, विभिन्न समाजों और प्रमुख नागरिकों से राय ली गई? यदि व्यापक स्तर पर चर्चा नहीं हुई, तो फिर समिति के गठन का आधार क्या रहा? नागरिकों का कहना है कि आयोजन से जुड़े निर्णयों में पारदर्शिता होनी चाहिए, दशहरा जैसे सार्वजनिक और सामाजिक आयोजन में किसी भी वर्ग को अलग-थलग रखने के बजाय सभी को साथ लेकर चलने की परंपरा कायम रहनी चाहिए।
वर्षों की परंपरा पर असर का डर- दशहरा केवल रावण दहन तक सीमित कार्यक्रम नहीं है, यह नगर की सामाजिक एकजुटता और सामूहिक सहभागिता से जुड़ा आयोजन रहा है, अलग-अलग समाजों और वर्गों के लोग इसमें अपनी भूमिका निभाते हैं, ऐसे में यदि आयोजन की जिम्मेदारी सीमित लोगों तक सिमटती है तो इससे वर्षों से चली आ रही सामूहिक परंपरा प्रभावित होने की आशंका व्यक्त की जा रही है, लोगों का कहना है कि दशहरा पूरे नगर का पर्व है,इसलिए आयोजन भी पूरे नगर की सहभागिता से होना चाहिए।
व्यापक बैठक बुलाने की मांग- नगरवासियों ने मांग की है कि दशहरा आयोजन को लेकर जल्द से जल्द व्यापक बैठक बुलाई जाए, इसमें नगर के सभी प्रमुख समाजों, सामाजिक संगठनों, समाजसेवियों, नागरिकों और आयोजन से लंबे समय से जुड़े लोगों को शामिल किया जाए, लोगों का कहना है कि यदि समिति का गठन व्यापक सहमति से किया जाता है तो आयोजन को लेकर उठ रहे सवाल और नाराजगी दोनों दूर हो सकते हैं, साथ ही वर्षों से चली आ रही दशहरा की सामूहिक परंपरा भी कायम रहेगी।
अब सवाल समिति से ज्यादा प्रक्रिया पर- दशहरा आयोजन को लेकर उठ रहा विवाद केवल चार सदस्यों की संख्या का मुद्दा नहीं है, बल्कि निर्णय लेने की प्रक्रिया और व्यापक सहभागिता से जुड़ा सवाल बन गया है, नगरवासियों की मांग है कि आयोजन को किसी सीमित समूह तक रखने के बजाय सभी वर्गों को साथ लेकर निर्णय लिया जाए, ताकि रावण दहन का पर्व विवाद का विषय न बनकर फिर से पूरे शहर के साझा उत्सव के रूप में सामने आए।


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