डीजे और जुलूस से बाधित था मार्ग,समझाइश देने पहुंचे थाना प्रभारी से उलझे युवक…मणिपुर पुलिस ने छह आरोपियों को पकड़ा
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,25 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। गणेश विसर्जन की आस्था और उत्सव के बीच मणिपुर थाना क्षेत्र के जगदीशपुर में उस समय विवाद की स्थिति निर्मित हो गई, जब विसर्जन जुलूस के दौरान सड़क पर डीजे वाहन के साथ रास्ता बाधित होने को लेकर दरिमा थाना प्रभारी और जुलूस में शामिल लोगों के बीच विवाद हो गया। देखते ही देखते मामला कहासुनी से झूमाझटकी और वाहन में तोड़फोड़ तक पहुंच गया। पुलिस ने मामले में छह आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश करने की कार्रवाई की है। पुलिस के अनुसार, दरिमा थाना प्रभारी शासकीय कार्य से अंबिकापुर की ओर आ रहे थे। ग्राम जगदीशपुर मेन रोड पर गणेश विसर्जन का जुलूस निकल रहा था। जुलूस में पिकअप वाहन पर तेज आवाज में डीजे बज रहा था और इससे आम रास्ता बाधित हो गया था। थाना प्रभारी ने रास्ता देने तथा यातायात सुचारू करने के लिए जुलूस में शामिल लोगों को समझाइश देने का प्रयास किया। इसी दौरान कुछ लोग उनसे विवाद करने लगे। पुलिस का आरोप है कि विवाद बढ़ने के बाद आरोपियों ने शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न की और थाना प्रभारी के साथ झूमाझटकी की। इतना ही नहीं, उनके वाहन के कांच तोड़कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया गया। घटना के बाद मामले की रिपोर्ट मणिपुर थाने में दर्ज कराई गई और पुलिस ने प्रकरण की जांच शुरू की।
छह आरोपी गिरफ्तार : मामले की गंभीरता को देखते हुए मणिपुर थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना में शामिल छह आरोपियों को हिरासत में लिया। पूछताछ में आरोपियों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। पुलिस के अनुसार,आरोपियों के विरुद्ध पर्याप्त अपराध-साक्ष्य पाए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों में अनिल राजवाड़े (42),धनेश्वर राजवाड़े उर्फ धन्नू (22), रामदेव राजवाड़े उर्फ चुटुल (19),शिवशंकर राजवाड़े उर्फ शिव (44),नीरज राजवाड़े (20) और मुकेश दास (18) शामिल हैं। सभी जगदीशपुर क्षेत्र के अलग-अलग मोहल्लों के निवासी बताए गए हैं।
उत्सव के नाम पर सड़क रोकना कितना उचित? गणेश विसर्जन धार्मिक आस्था और सामाजिक उत्सव का अवसर है, लेकिन सार्वजनिक सड़क पर जुलूस निकालते समय यातायात और आम नागरिकों की आवाजाही को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखना भी जरूरी है। इस घटना ने इसी बुनियादी सवाल को सामने ला दिया है कि धार्मिक आयोजनों के दौरान डीजे, जुलूस और वाहनों की व्यवस्था के लिए पहले से पर्याप्त इंतजाम क्यों नहीं किए जाते? अगर पुलिस के अनुसार सड़क बाधित थी और थाना प्रभारी केवल रास्ता देने के लिए समझाइश दे रहे थे, तो बात इतनी जल्दी टकराव तक कैसे पहुंची—यह भी जांच का विषय है। दूसरी ओर, यदि किसी अधिकारी द्वारा समझाइश दिए जाने के बाद उसके साथ झूमाझटकी और वाहन में तोड़फोड़ की गई, तो यह भीड़ के कानून अपने हाथ में लेने की गंभीर स्थिति को दर्शाता है। सबसे अहम सवाल यह भी है कि विसर्जन जुलूस जैसे संवेदनशील और भीड़भाड़ वाले आयोजन में पुलिस की पर्याप्त मौजूदगी और यातायात नियंत्रण की व्यवस्था पहले से क्यों नहीं थी। क्योंकि यदि रास्ता पहले से नियंत्रित होता, डीजे और जुलूस के लिए निर्धारित मार्ग स्पष्ट होता तथा पुलिस बल मौके पर मौजूद रहता, तो मामूली विवाद के हिंसक रूप लेने की संभावना कम की जा सकती थी।
पुलिस की कार्रवाई तेज, अब जांच की बारी : घटना के बाद मणिपुर पुलिस ने छह आरोपियों को गिरफ्तार कर कार्रवाई जरूर तेज की है। लेकिन पुलिस के सामने अब यह भी चुनौती है कि पूरे घटनाक्रम की निष्पक्षता से जांच की जाए—जुलूस में कितने लोग मौजूद थे,विवाद की शुरुआत किस बात से हुई, किसने झूमाझटकी की, वाहन में तोड़फोड़ किसने की और घटना में अन्य लोगों की क्या भूमिका थी। पुलिस ने अन्य संभावित संलिप्त लोगों की भूमिका की भी जांच शुरू की है। उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों में भी छह लोगों की गिरफ्तारी के साथ अन्य लोगों की तलाश/भूमिका की जांच का उल्लेख किया गया है।
मीडिया रिपोर्टों में मारपीट का भी उल्लेख
घटना के संबंध में सामने आई स्थानीय जानकारों ने बताया गया है कि दरिमा थाना प्रभारी एवं प्रशिक्षु डीएसपी निशांत कुर्रे रात में अपनी निजी कार से दरिमा से अंबिकापुर लौट रहे थे। कंठी-जगदीशपुर मार्ग पर गणेश विसर्जन जुलूस और डीजे के कारण यातायात प्रभावित था। रास्ता देने को लेकर विवाद बढ़ने के बाद उनके साथ हाथापाई तथा निजी वाहन में तोड़फोड़ किए जाने की बात रिपोर्ट की गई है। अंबिकापुर एसडीओपी राकेश बघेल के हवाले से भी कुछ रिपोर्टों में समझाइश के दौरान हमला होने की जानकारी दी गई है। हालांकि पुलिस की ओर से जारी विस्तृत प्रेस-नोट में मुख्य रूप से शासकीय कार्य में बाधा, झूमाझटकी और वाहन के कांच तोड़े जाने की घटना का उल्लेख किया गया है। इसलिए घटना के प्रत्येक पहलू का अंतिम स्वरूप विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
डीजे और जुलूस की व्यवस्था पर भी उठे सवाल
घटना के बाद केवल आरोपियों की गिरफ्तारी से मामला खत्म नहीं होता। ऐसे आयोजनों में डीजे की आवाज, सड़क पर वाहनों की स्थिति,जुलूस की लंबाई,यातायात प्रबंधन और आपातकालीन आवागमन जैसे मुद्दों पर प्रशासन की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण है। एक तरफ पुलिस धार्मिक आयोजनों में शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार अपील करती है,दूसरी तरफ यदि मुख्य मार्ग पर जुलूस के कारण आवागमन पूरी तरह प्रभावित होता है और किसी वाहन को निकलने के लिए विवाद की स्थिति बनती है,तो यह व्यवस्था की कमी की ओर भी इशारा करता है।
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