-संवाददाता-
सूरजपुर,24 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। जब शिक्षक विद्यालय को समुदाय से जोड़ने की पहल करता है और समाज उस पहल में सहभागी बनता है, तो शिक्षा व्यवस्था में सकारात्मक बदलाव की नई राह बनती है,सूरजपुर के शासकीय प्राथमिक शाला चट्टीडांड़ में इन दिनों ऐसी ही सामाजिक सहभागिता की तस्वीर देखने को मिल रही है। विद्यालय के प्रधानपाठक गौतम शर्मा द्वारा विद्यालय को समाज से जोड़ने और बच्चों की आवश्यकताओं को जनसहयोग से पूरा करने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों से स्थानीय स्तर पर लोगों की भागीदारी लगातार बढ़ रही है, इसी क्रम में सूरजपुर के समाजसेवी एवं साहू बोरवेल के संचालक मुकेश साहू ने विद्यालय में अध्ययनरत सभी बच्चों के लिए स्कूल बैग उपलब्ध कराए और बच्चों के बीच उनका वितरण किया, प्रधानपाठक गौतम शर्मा ने विद्यालय की आवश्यकताओं और बच्चों की जरूरतों को समाज के सामने रखते हुए मेरा स्कूल-मेरी जिम्मेदारी की भावना को आगे बढ़ाने का प्रयास किया, उनका उद्देश्य विद्यालय को केवल शिक्षक और शिक्षा विभाग तक सीमित न रखते हुए स्थानीय समुदाय को भी उसकी विकास यात्रा का सहभागी बनाना है, इसी पहल से प्रेरित होकर मुकेश साहू ने विद्यालय के सभी बच्चों के लिए स्कूल बैग उपलब्ध कराने का निर्णय लिया,स्कूल बैग मिलने पर बच्चों के चेहरों पर खुशी साफ दिखाई दी, बच्चों के लिए यह सिर्फ एक उपयोगी शैक्षणिक सामग्री नहीं, बल्कि समाज की ओर से मिले स्नेह,सहयोग और प्रोत्साहन का संदेश भी रहा।
चट्टीडांड़ विद्यालय में सामने आई यह पहल इस बात का उदाहरण है कि सरकारी स्कूलों के विकास में समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है, स्थानीय नागरिक, समाजसेवी, व्यवसायी और सामाजिक संगठन यदि अपने आसपास के विद्यालयों से जुड़कर बच्चों की जरूरतों में सहयोग करें, तो विद्यालय और समाज के बीच संबंध और मजबूत हो सकते हैं,प्रधानपाठक गौतम शर्मा का कहना है कि विद्यालय केवल शिक्षकों का कार्यस्थल नहीं, बल्कि पूरे समुदाय के बच्चों के भविष्य निर्माण का केंद्र है,इसलिए विद्यालय के विकास में समाज की भागीदारी बढ़ाना जरूरी है,उनका प्रयास है कि बच्चों की जरूरतों को समझते हुए समाज के सहयोग से विद्यालय में सकारात्मक और प्रेरक वातावरण तैयार किया जाए, चट्टीडांड़ विद्यालय में स्कूल बैग वितरण की यह पहल इसी विचार को आगे बढ़ाती है कि मेरा स्कूल – मेरी जिम्मेदारी केवल एक वाक्य न रहकर व्यवहार में दिखाई दे। जब समाज अपने आसपास के सरकारी विद्यालय को अपना विद्यालय मानकर बच्चों के लिए आगे आता है, तो सहयोग की छोटी-सी पहल भी बच्चों के मन में बड़ा विश्वास पैदा करती है।
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