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शंकरगढ़@20 लाख का चेक डैम छह महीने में ढहा,पहली बारिश में खुली निर्माण की पोल

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सिलफिली में किसानों के लिए बना जल संरक्षण ढांचा ताश के पत्तों की तरह बिखरा, गुणवत्ता और निगरानी पर उठे सवाल


सुदामा राजवाड़े
शंकरगढ़ 23 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। किसानों को सिंचाई सुविधा देने और जल संरक्षण के उद्देश्य से सरकारी राशि से बनाया गया चेक डैम छह महीने भी नहीं टिक सका। जनपद पंचायत शंकरगढ़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत सिलफिली में करीब 20 लाख रुपए की लागत से निर्मित चेक डैम पहली ही बारिश में धराशायी हो गया। निर्माण की स्थिति देखकर ग्रामीणों ने कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि जिस निर्माण से उन्हें खेतों के लिए पानी मिलने और सिंचाई व्यवस्था मजबूत होने की उम्मीद थी, वही निर्माण बारिश आते ही ढह गया। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि लाखों रुपए खर्च करने के बावजूद निर्माण की गुणवत्ता की जांच आखिर किस स्तर पर की गई थी।
छह महीने में ही जवाब देने लगा निर्माण : ग्रामीणों के मुताबिक चेक डैम का निर्माण करीब छह महीने पहले कराया गया था। इतनी कम अवधि में ढांचे का इस तरह क्षतिग्रस्त होकर ढह जाना निर्माण में इस्तेमाल सामग्री, तकनीकी गुणवत्ता और कार्य की निगरानी को लेकर सवाल खड़े करता है। ग्रामीणों का आरोप है कि यदि निर्माण के दौरान निर्धारित मापदंडों का पालन और गुणवत्ता की प्रभावी जांच हुई होती तो इतनी जल्दी चेक डैम की यह स्थिति नहीं बनती।
आरईएस की निगरानी में हुआ था काम, अब जिम्मेदारी पर सवाल : बताया गया कि चेक डैम का निर्माण ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के अनुविभागीय अधिकारी और विभागीय तकनीकी अमले की निगरानी में कराया गया था। ऐसे में निर्माण के कुछ ही महीनों बाद ढांचे के ढह जाने से विभागीय मूल्यांकन और निरीक्षण की प्रक्रिया पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय ग्रामीणों ने सरपंच, सचिव और संबंधित विभागीय अधिकारियों की भूमिका की भी जांच की मांग की है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जिम्मेदारों की निगरानी के बिना इस स्तर का घटिया निर्माण संभव नहीं है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
एसडीओ से संपर्क का प्रयास, मोबाइल रहा आउट ऑफ कवरेज : मामले में विभाग का पक्ष जानने के लिए शंकरगढ़ आरईएस के अनुविभागीय अधिकारी वासिल मिंज से संपर्क करने का प्रयास किया गया। कार्यालय पहुंचने पर वे अपने कक्ष में मौजूद नहीं मिले। मोबाइल फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उनका नंबर ‘आउट ऑफ कवरेज’ बताया गया। विभागीय पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा। अब सवाल यह है कि छह महीने में ढह गए इस चेक डैम की जिम्मेदारी आखिर किसकी है? निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी स्वीकृति, मूल्यांकन और भुगतान की पूरी प्रक्रिया की जांच होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सरकारी राशि से बने इस ढांचे की ऐसी स्थिति कैसे बनी।
सरकारी पैसा पानी में…किसान फिर खाली हाथ
चेक डैम का उद्देश्य किसानों को पानी उपलब्ध कराना और जल संरक्षण को बढ़ावा देना था। लेकिन निर्माण के कुछ ही महीनों बाद इसके ढह जाने से ग्रामीणों की उम्मीदों पर पानी फिर गया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सरकारी राशि से बनाए गए जल संरक्षण ढांचे ही टिकाऊ नहीं होंगे तो किसानों को सिंचाई सुविधा देने की योजनाओं का उद्देश्य कैसे पूरा होगा। इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा किया है कि निर्माण पूरा होने के बाद कार्य की गुणवत्ता का मूल्यांकन किस आधार पर किया गया और क्या संबंधित अधिकारियों ने मौके पर जाकर निर्माण की वास्तविक स्थिति का परीक्षण किया था।
जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीर
ग्रामीणों ने मामले की उच्चस्तरीय एवं निष्पक्ष तकनीकी जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि निर्माण की लागत,स्वीकृत प्राक्कलन,इस्तेमाल की गई सामग्री, तकनीकी मापदंड,भुगतान प्रक्रिया और निर्माण के बाद किए गए मूल्यांकन की जांच होनी चाहिए। साथ ही यदि जांच में अनियमितता या लापरवाही सामने आती है तो संबंधित जिम्मेदारों से राशि की वसूली और नियमानुसार कार्रवाई की जाए।


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