पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए उठाए सवाल,मनेंद्रगढ़ खड़गवां,सोनहत और भरतपुर में स्थानीय शिक्षकों की अनदेखी का लगाया आरोप
-रवि सिंह-
मनेन्द्रगढ़/कोरिया,22 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। एमसीबी और कोरिया जिले में शिक्षा विभाग में अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर एक बार फिर सवाल उठने लगे हैं,भरतपुर-सोनहत क्षेत्र के पूर्व विधायक गुलाब कमरो ने सोशल मीडिया के माध्यम से शिक्षा विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों की पदस्थापना को लेकर सवाल खड़े किए हैं,उन्होंने पूछा है कि जब एमसीबी-कोरिया जिले में योग्य शिक्षक उपलब्ध हैं,तो शिक्षा विभाग के महत्वपूर्ण पदों पर सूरजपुर जिले से शिक्षकों और अधिकारियों को जिम्मेदारी क्यों दी जा रही है? पूर्व विधायक द्वारा किए गए फेसबुक पोस्ट में सीधे तौर पर लिखा गया है…‘एमसीबी/कोरिया में योग्य शिक्षक होने के बावजूद सूरजपुर जिले से डीईओ, बीईओ क्यों?’इसके बाद उन्होंने कहा है कि जिले में पात्र शिक्षक मौजूद हैं,इसके बावजूद मनेंद्रगढ़, खड़गवां,सोनहत और भरतपुर विकासखंड में सूरजपुर निवासी शिक्षकों को शिक्षा अधिकारी बनाया गया है, उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर एमसीबी-कोरिया के शिक्षकों की अनदेखी क्यों की जा रही है।
सोशल मीडिया पोस्ट के बाद चर्चा तेज-गुलाब कमरो की इस पोस्ट के सामने आने के बाद शिक्षा विभाग में पदस्थापना को लेकर स्थानीय स्तर पर चर्चा तेज हो गई है,पोस्ट में उन्होंने किसी एक पदस्थापना तक सवाल सीमित नहीं रखा, बल्कि जिले के अलग-अलग विकासखंडों में अधिकारियों की जिम्मेदारी को लेकर व्यापक सवाल उठाया है,उनका कहना है कि एमसीबी और कोरिया क्षेत्र में लंबे समय से कार्यरत तथा पात्र शिक्षक उपलब्ध हैं,ऐसे में स्थानीय स्तर पर उपलब्ध अधिकारियों और शिक्षकों को जिम्मेदारी देने के बजाय दूसरे जिले से शिक्षकों को महत्वपूर्ण प्रशासनिक दायित्व सौंपे जाने का कारण स्पष्ट होना चाहिए, हालांकि,सोशल मीडिया पोस्ट में जिन अधिकारियों की पदस्थापना का उल्लेख किया गया है, उनकी नियुक्ति की प्रक्रिया, पात्रता,प्रतिनियुक्ति अथवा अतिरिक्त प्रभार से संबंधित मूल आदेश सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है,इसलिए पदस्थापना नियमों के अनुरूप है अथवा नहीं,इसका अंतिम निष्कर्ष संबंधित विभागीय आदेश और लागू नियमों के परीक्षण के बाद ही निकाला जा सकता है।
सोनहत में अतिरिक्त प्रभार को लेकर पहले से उठ रहे सवाल-इस पूरे मामले में सोनहत विकासखंड में बीईओ की जिम्मेदारी को लेकर भी सवाल सामने आए हैं,पूर्व विधायक की आपत्ति का एक प्रमुख आधार यह है कि एमसीबी-कोरिया क्षेत्र में उपलब्ध स्थानीय शिक्षकों के रहते दूसरे जिले से जुड़े शिक्षक को शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी दी जा रही है, बीईओ का पद केवल प्रशासनिक जिम्मेदारी तक सीमित नहीं होता, विकासखंड के स्कूलों की शैक्षणिक व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति,विभागीय योजनाओं का क्रियान्वयन,निरीक्षण, विभिन्न शासकीय निर्देशों का पालन और विद्यालयों से संबंधित प्रशासनिक कार्यों की निगरानी भी इसी व्यवस्था का हिस्सा होती है, ऐसे में स्थानीय स्तर पर पदस्थापन को लेकर उठे सवालों का जवाब विभागीय स्तर पर दिया जाना महत्वपूर्ण हो जाता है।
मनेंद्रगढ़ से भरतपुर तक सवाल-
गुलाब कमरो ने अपनी पोस्ट में मनेंद्रगढ़, खड़गवां,सोनहत और भरतपुर विकासखंडों का विशेष रूप से उल्लेख किया है,उनका सवाल केवल यह नहीं है कि दूसरे जिले के शिक्षक यहां क्यों पदस्थ हैं,बल्कि यह भी है कि एमसीबी-कोरिया में उपलब्ध पात्र शिक्षकों को इन जिम्मेदारियों से दूर क्यों रखा जा रहा है,स्थानीय शिक्षकों और अधिकारियों को प्रशासनिक जिम्मेदारी मिलने से क्षेत्रीय परिस्थितियों,विद्यालयों की स्थानीय समस्याओं और विभागीय आवश्यकताओं की बेहतर जानकारी होने की बात आम तौर पर कही जाती है,दूसरी ओर,शासन की पदस्थापना व्यवस्था में प्रशासनिक आवश्यकता, पात्रता, अनुभव, वरिष्ठता और विभागीय आदेश भी महत्वपूर्ण आधार हो सकते हैं,इसलिए इस विवाद में वास्तविक स्थिति जानने के लिए संबंधित पदों के आदेश और पात्रता संबंधी प्रावधानों को सामने रखना जरूरी होगा।
डीईओ और बीईओ की पदस्थापना पर पारदर्शिता की मांग- शिक्षा विभाग में जिला शिक्षा अधिकारी और विकासखंड शिक्षा अधिकारी जैसे पदों की जिम्मेदारी महत्वपूर्ण होती है,ऐसे पदों पर नियुक्ति या अतिरिक्त प्रभार को लेकर यदि स्थानीय स्तर पर सवाल उठते हैं तो विभाग के लिए आदेशों की स्थिति स्पष्ट करना जरूरी हो जाता है,विशेषकर तब, जब किसी जनप्रतिनिधि द्वारा सार्वजनिक रूप से यह सवाल उठाया जाए कि जिले में योग्य शिक्षक उपलब्ध होने के बावजूद दूसरे जिले के शिक्षकों को जिम्मेदारी दी जा रही है, इससे यह जानना भी जरूरी हो जाता है कि संबंधित पदों के लिए शासन ने कौन-से नियम निर्धारित किए हैं और मौजूदा पदस्थापना उन्हीं नियमों के तहत हुई है या किसी विशेष प्रशासनिक व्यवस्था के तहत।
सवाल सिर्फ पदस्थापना का नहीं, प्रक्रिया का भी-गुलाब कमरो की फेसबुक पोस्ट ने एक व्यापक सवाल खड़ा किया है क्या शिक्षा विभाग की पदस्थापनाओं में स्थानीय पात्रता और अनुभव को पर्याप्त महत्व दिया जा रहा है? यदि विभाग के पास इसके स्पष्ट नियम और आदेश हैं, तो उन्हें सार्वजनिक करने से स्थिति स्पष्ट हो सकती है,वहीं यदि किसी अधिकारी को दूसरे जिले से लाकर अतिरिक्त प्रभार दिया गया है, तो उसके पीछे प्रशासनिक कारण क्या हैं,यह भी विभाग द्वारा बताया जाना चाहिए,इससे सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं और आरोप-प्रत्यारोप की स्थिति के बजाय दस्तावेजों के आधार पर वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी,फिलहाल पूर्व विधायक गुलाब कमरो की पोस्ट ने शिक्षा विभाग की पदस्थापना व्यवस्था को लेकर बहस जरूर शुरू कर दी है, उनके द्वारा उठाए गए सवालों पर शिक्षा विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि संबंधित पदस्थापनाएं किन नियमों और प्रशासनिक परिस्थितियों के आधार पर की गई हैं। वहीं,स्थानीय स्तर पर यह मांग भी उठ रही है कि एमसीबी-कोरिया में उपलब्ध पात्र और अनुभवी शिक्षकों को शिक्षा विभाग की महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देने की प्रक्रिया को स्पष्ट और पारदर्शी बनाया जाए।
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