
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,27 मार्च 2026 (घटती-घटना)। चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन शुक्रवार को मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान राम का जन्मोत्सव प्राचीन राम मंदिर में धूमधाम से मनाया गया। शहर के ब्रह्म रोड स्थित राम मंदिर में परपंरागत ढंग से दोपहर 12 बजे भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया गया। इस दौरान राजपरिवार के आदित्येश्वर सिंहदेव भी शामिल हुए और पूजा अर्चना की। रामनवमी पर वर्षों से परपंरागत ढंग से भगवान राम के जन्मोत्सव का आयोजन राम मंदिर में होता रहा है। शुक्रवार की सुबह से ही महोत्सव की तैयारियां शुरू हो गईं थी। भजन-कीर्तन के बीच भगवान राम सहित जानकी का विशेष श्रृंगार किया गया। पूजा से पहले परंपरा के अनुसार मंदिर के पट बंद कर दिए गए। दोपहर 12 बजे जैसे ही मंदिर के पट खोले गए। इस दौरान मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की भीड़ दर्शन के लिए उमड़ पड़ी। राम मंदिर के मुख्य पुजारी द्वारा महाआरती की गई। आरती के बाद बधाइयों का दौर शुरू हो गया। मंदिर परिसर में उपस्थित भक्तों ने एक दूसरे को बधाई देकर रामजन्मोत्सव की शुभकामनाएं दी। राम मंदिर में भंडारे का भी आयोजन किया गया था। जन्मोत्सव कार्यक्रम के बाद श्रद्धालुओं ने भंडारे का प्रसाद ग्रहण किया। जन्मोत्सव कार्यक्रम के बाद भक्तों द्वारा टॉफी बांटी गई। महिला मंडली द्वारा राम जन्मोत्सव गीत का भी आयोजन किया गया था। चैत्र नवरात्रि के अंतिम दिन नवमी के अवसर पर शुक्रवार को नगर के दुर्गा मंदिरों, देवी धामों में जगत जननी की पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु उमड़ पड़े। सरगुजा की अराध्य मां महामाया मंदिर अंबिकापुर में मंदिर में पूरे दिन पूजा का दौर चलता रहा। इस दौरान सुबह से ही श्रद्धालुओं ने मंदिर पहुंच कर पूजा अर्चना की। महामाया मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहा। मां की दर्शन के लिए लोगों ने कतार में खड़े होकर घंटों अपनी बारी का इंतजार करते रहे। नौ दिन तक व्रत रखने वाले भक्त नवमी के हवन-पूजन कर पूर्णाहुति हुई। इस दौरान महामाया मंदिर,समलाया मंदिर,मां दुर्गा शक्तिपीठ गांधी चौक, संत हरकेवल मंदिर, काली मंदिर, रघुनाथपुर मंदिर, शीतला मंदिर सहित शहर के सभी देवी मंदिरों में माता की आराधना करने श्रद्धालु पहुंचे।
अखंड का आयोजन
राम मंदिर में परपंरागत ढंग से दोपहर 12 बजे भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया गया। इससे पूर्व मंदिर में पूजा अर्चना सुबह से ही शुरू हो गई थी। जन्मोत्सव कार्यक्रम से पूर्व भक्तों द्वारा मंदिर परिसर में अखंड रामायण का भी आयोजन किया गया था।
नौ दिनों के व्रत का समापन
इधर देवी मंदिरों में नवरात्रि के समापन पर हवन-पूजन का कार्यक्रम दिन भर चलता रहा। इसी के साथ चैत्र नवरात्रि का समापन हुआ। इस मौके पर मंदिरों एवं घरों में कन्या भोज का आयोजन किया गया था।
96 साल पुराने राम मंदिर में परंपरा निभी,राजपरिवार ने की प्रथम पूजा

शहर के 96 वर्ष पुराने प्रभु श्रीराम मंदिर में रामनवमी का पर्व परंपरा अनुसार राजपरिवार की प्रथम पूजा के साथ श्रद्धा और आस्था के बीच मनाया गया। सरगुजा राजपरिवार के मानद युवराज आदित्येश्वर शरण सिंहदेव ने पूजा-अर्चना के बाद दोपहर ठीक 12 बजे गर्भगृह का पट खोलकर प्रकटोत्सव की शुरुआत की और नागरिकों को रामनवमी की शुभकामनाएं दीं। बताया गया कि वर्ष 1930 में पूर्व महाराज स्व. मदनेश्वर शरण सिंहदेव के जन्म पर तत्कालीन महाराज स्व. रामानुज शरण सिंहदेव ने इस मंदिर का निर्माण कराया था। बाद में 90 के दशक में इस मंदिर को कल्याण आश्रम को दान कर दिया गया। युवराज ने कहा कि सरगुजा राजपरिवार की परंपरा सनातन धर्म से जुड़ी रही है, लेकिन परिवार सर्वधर्म सद्भाव में विश्वास करता है और आदिवासी संस्कृति को भी अपनी पूजा पद्धति में शामिल करता है।उन्होंने कहा कि रामनवमी की प्रथम पूजा हो या नवरात्रि की संधि पूजा, राजपरिवार अपनी परंपराओं के निर्वहन के लिए प्रतिबद्ध है। पूजा के बाद मंदिर परिसर में राजपरिवार की ओर से भंडारे का आयोजन किया गया, जहां श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया गया। इस अवसर पर कांग्रेस जिलाध्यक्ष बालकृष्ण पाठक, मधु दीक्षित, विनीत विशाल जायसवाल सहित बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक और श्रद्धालु उपस्थित रहे।
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