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रायपुर@अब नहीं चलेगा ‘पार्षद पति’ राज…छत्तीसगढ़ में अब महिलाओं की जगह रिश्तेदार नहीं चला पाएंगे सत्ता

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रायपुर,24 दिसम्बर 2025। छत्तीसगढ़ के नगर निगमों, नगर पालिकाओं और पंचायतों में ‘पार्षद पति’ या ‘प्रतिनिधि’ बनकर रसूख दिखाने वाले रिश्तेदारों के दिन अब लद गए हैं। राज्य सरकार ने एक ऐतिहासिक और सख्त कदम उठाते हुए महिला जनप्रतिनिधियों के कामकाज में उनके पति,भाई या किसी भी पुरुष रिश्तेदार के हस्तक्षेप पर पूरी तरह से रोक लगा दी है। अब अगर किसी महिला पार्षद की कुर्सी पर उनका पति या रिश्तेदार बैठा मिला, तो उस पर सीधे भारतीय न्याय संहिता के तहत एफआईआर दर्ज होगी।
संविधान का हवालाः अब ‘प्रॉक्सी’ राज नहीं चलेगा : नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग द्वारा जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि निर्वाचित महिलाओं की जगह उनके रिश्तेदारों का हस्तक्षेप न केवल प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह संविधान के अनुच्छेद 14, 15(3) और 21 के तहत मिले महिला अधिकारों का हनन है। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के कड़े रुख के बाद शासन ने यह ‘हंटर’ चलाया है।
सीधे जेल की हवा : विभाग ने चेतावनी दी है कि आदेश का उल्लंघन करने पर केवल विभागीय नोटिस नहीं मिलेगा, बल्कि कानूनी कार्रवाई होगी। भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा 207, 223 और 316 के तहत मामला दर्ज किया जा सकता है। वहीं मानवाधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 की धारा 13 के तहत सख्त कदम उठाए जाएंगे।
सांसद-विधायकों को भी ‘नो एंट्री’ के निर्देश : अक्सर देखा जाता है कि सांसद और विधायक अपने कोटे से निकायों में महिला प्रतिनिधियों के पतियों को ही अपना ‘प्रतिनिधि’ नियुक्त कर देते हैं। सरकार ने निकाय आयुक्तों और सीएमओ को साफ निर्देश दिया है कि वे सांसदों और विधायकों को लिखित में सूचित करें कि किसी भी महिला जनप्रतिनिधि के परिवार के सदस्य को ‘प्रतिनिधि’ के रूप में स्वीकार न किया जाए।


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