हाई कोर्ट ने स्वयं संज्ञान लेकर रेलवे से मांगा जवाब
बिलासपुर,22 नवम्बर २०२३(ए)। प्रदेश की न्यायाधानी बिलासपुर शहर में रेलवे द्वारा फुट ओवरब्रिज निर्माण कराया जा रहा है जो बीते चार साल से अधूरा पड़ा है। जिससे नागरिकों एवं स्कूली बच्चों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मुख्य मार्ग होने के कारण इस मार्ग से प्रतिदिन सैकड़ों नागरिक एवं स्कूली बच्चे अपनी जान जोखिम में डालकर स्कूल आते जाते हैं। निर्माणाधीन फुट ओवरब्रिज के अधूरे निर्माण को लेकर नागरिकों एवं बुद्धिजीवियों की ओर से लगातार ध्यानाकर्षण कराए जाने के बावजूद रेलवे द्वारा अब तक इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया ।
बच्चों द्वारा जान जोखिम में डाल कर पटरी पार करते हुए मीडिया में आई फोटो सहित खबरों को देखकर हाईकोर्ट ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए स्वयं संज्ञान में लिया है। कोर्ट ने मीडिया की खबरों को लेकर जनहित याचिका के रूप में स्वीकार करते हुए चीफ जस्टिस की डिवीजन बेंच ने रेलवे को 48 घंटे में जवाब देने कहा है। मामले की अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी।
रेलवे की ओर से केंद्र सरकार के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा उपस्थित हुए. उनसे चीफ जस्टिस ने पूछा कि रेलवे ऑफिसर्स क्या कर रहे हैं? उन्हें यह पता नहीं है कि कौन सा काम अधिक जरूरी है। इस तरह से हजारों बच्चों की जिंदगियों को रेल पटरी के भरोसे पर छोड़ना बेहद शर्मनाक है।
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार और भारतीय रेलवे से साफ कहा कि आप इस एफओबी का क्या करेंगे और कैसे पूरा करेंगे। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार और रेलवे से 48 घंटे के भीतर निर्माणाधीन फुट ओवर ब्रिज के संबंध में जवाब मांगा है। बता दें कि रेलवे स्टेशन के दूसरी ओर ढाई लाख से अधिक लोग रहते हैं लाखों लोगों को स्टेशन के इस तरफ आने-जाने के लिए बनाया गया पुराना फुट ओवर ब्रिज (एफओबी) सालों पहले टूट चुका है. रेलवे ने नया एफओबी बनाने का काम शुरू किया, लेकिन 4 साल बाद भी इसका निर्माण पूरा नहीं हो पाया।
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