- प्रत्याशी भैयालाल राजवाड़े के लिए उनके समर्थको ने लगाई ताकत,फेल हुआ जिला भाजपा संगठन।
- आमसभा के अलावा कहीं नजर नही आए भाजपा के जिलाध्यक्ष कृष्णबिहारी जायसवाल,जनाधार की है भारी कमी।

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 19 नवम्बर 2023 (घटती-घटना)। विधानसभा चुनाव हेतु मतदान पिछले 17 तारीख को समाप्त हुआ,बैकुंठपुर विधानसभा में लगभग 82 प्रतिशत मतदान हुआ है जो कि भाजपा प्रत्याशी भैयालाल राजवाड़े के पक्ष में माना जा रहा है जैसी जनचर्चा भी है। कांग्रेस प्रत्याशी अंबिका सिंहदेव ने अपने कार्यकाल में अपने निज सहायक के दिशा निर्देशन में जिस प्रकार का व्यवहार आमजन के साथ पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ किया था उसका प्रभाव इस चुनाव में देखने को मिला है। आधे से अधिक मतदान केन्द्रो में उनकी स्थिति काफी चिंताजनक होगी ये उम्मीद की जा रही है। तो वहीं इस चुनाव में भाजपा प्रत्याशी भैयालाल राजवाड़े को भी काफी कठिनाईयों का सामना करना पड़ा है,पुत्र विजय राजवाड़े का ना होना भी इस चुनाव में उन्होने महसूस किया है तो पार्टी के जनाधार विहीन नेताओ से लेकर जयचंदो ने उन्हे घेर रखा था ऐसे नेताओं की पार्टी में काफी अधिकता है इसका असर भी देखने को मिला है। खुद भाजपा जिलाध्यक्ष ने वैसी सक्रियता नही दिखलाई जैसी दिखलानी थी,हलांकि उन्होने खुद को काफी व्यस्त बतलाने की कोशिश की। चुनाव में भैयालाल राजवाड़े समर्थक कार्यकर्ता ही जी जान से जुटे थे संगठन की कमी यहां देखने को मिली,संगठन की एकजुटता जिलाध्यक्ष के मैं,मैं,मैं की बयानबाजी के कारण तार – तार हुई है, यह भी देखने को मिला। जिलाध्यक्ष को सिर्फ कहीं कहीं आमसभा में देखा गया बाकी जिम्मेदारी का निर्वहन उन्होने कार्यालय में बैठकर पूरा किया। पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस चुनाव में भाजपा की राजनीति के चाणक्य तीरथ गुप्ता की कमी भी महसूस की,पूर्व जिलाध्यक्ष जवाहर गुप्ता ने भी अपने कार्यकाल के चुनाव में काफी मेहनत किया था,जो कि कार्यकर्ताओं की जुबान पर था। चुनाव संपन्न होने के बाद कई कार्यकर्ता व पदाधिकारी का मानना है कि ऐसे जिलाध्यक्ष को तत्काल हटाया जाना पार्टी के लिए लाभकारी होगा।
संभावित जीत के मद्वेनजर भैयालाल से चिपकने लगे स्वार्थी तत्व
जैसी क्षेत्र में जनचर्चा है और नेताओ के द्वारा कहा जा रहा है कि इस चुनाव में भाजपा उम्मीदवार भैयालाल राजवाड़े का पलड़ा भारी था और अंततःजीत उनकी सुनिश्चित है। यह बात सार्वजनिक होते ही अब देखने में आ रहा है कि पिछले कार्यकाल की तरही ही स्वार्थी तत्व उनसे चिपकने लगे हैं,खुद को सबसे खास बतलाने की कोशिश अभी से किया जा रहा है।
पन्ना प्रभारी से लेकर शक्ति केन्द्र और बूथ प्रभारी भी नही रहा कारगार
भाजपा ने काफी पहले से प्रदेश स्तर पर चुनाव की तैयारी शुरू की थी, संगठन मे बदलाव के साथ साथ बूथ स्तर तक कार्यकर्ताओं को तैयार किया गया था,बड़ी बड़ी सूची बनाई गई थी,पन्ना प्रभारी से लेकर शक्ति केन्द्र प्रभारी और बूथ प्रभारियों का चयन किया गया था लेकिन कुछ जगहो को छोड़कर यह सूची कारगार साबित नही हुई। बतलाया जाता है कि सूची बनाते वक्त सिर्फ कोरम पूरा कर प्रदेश नेतृत्व की आंखो मे धूल झोंका गया था जिसका खामियाजा चुनाव के दौरान भाजपा उम्मीदवार को भुगतना पड़ा है। भाजपा के तमाम मोर्चा,प्रकोष्ट के पदाधिकारी भी सिर्फ कागजो मे नजर आए।
चुनिंदा नेताओं ने भैयालाल को अपने भंवरजाल में फंसाया
पार्टी कार्यालय आने जाने वाले एक भाजपा कार्यकर्ता ने इस चुनाव के बाद अपनी व्यथा घटती घटना को बतलाया है,और कहा कि कार्यालय में कार्यकर्ताओ से भेदभाव किया जाता है। कुछ नेताओं के समथकों को टारगेट किया जाता है,उनके सामने पार्टी की बातो को भी छुपाया जाता है। बड़े नेताओं के आने जाने से लेकर बैठको आदि की सूचना भी नही दी जाती है। कार्यकर्ता ने जिलाध्यक्ष पर ठीकरा फोड़ते हुए कहा कि जिलाध्यक्ष अपने पुत्र के साथ मिलकर पार्टी को प्रायवेट लिमिटेड कंपनी की तरह संचालित कर रहे हैं जिससे कि कार्यकर्ताओ का मनोबल गिर चुका है। कार्यकर्ता का कहना था कि बात सिर्फ भैयालाल राजवाड़े की थी इस वजह से हमने चुनाव में काम किया है वरना इस जिलाध्यक्ष के कार्यकाल में झंडा उठाना सही नही है। कार्यकर्ता की माने तो जिलाध्यक्ष के साथ कुछ चुनिंदा नेताओ ने भैयालाल राजवाड़े को अपने भंवरजाल में फसा लिया था इस वजह से कई कार्यकर्ता रूष्ट थे। जिलाध्यक्ष ने एक भी बूथ की जिम्मेदारी नही ली थी सिर्फ हवा हवाई बात और दावा करने में उन्हे व्यस्त देखा गया।
अकेले मेहनत करते दिखे भैयालाल राजवाड़े,शैलेश शिवहरे ने साथ आकर दी मजबूती,लेकिन शिवहरे का साथ आना संगठन प्रमुख को खटका
इस चुनाव में देखने को मिला कि टिकट मिलने के कई दिनो तक प्रत्याशी भैयालाल राजवाड़े अकेले मेहनत करते रहे,नामांकन के पहले ही उन्होने दावेदार और एक जनाधार वाले नेता के रूप में पहचान रखने वाले शैलेश शिवहरे के साथ सामंजस्य बनाकर दूरियां कम की और अपने पक्ष में काम करने के लिए तैयार किया था। देखने में मिला कि शैलेश शिवहरे ने साथ आकर पूरे ईमानदारी के साथ उनका काम किया,हर क्षेत्र में चुनावी सभा में शामिल हुए,पूरी दमदारी के साथ भैयालाल राजवाड़े का पक्ष रखा तथा कांग्रेेस एवं प्रत्याशी अंबिका सिंहदेव पर जमकर हमला बोला। शैलेश शिवहरे के साथ आने से बैकुंठपुर शहर में भी भैयालाल राजवाड़े मजबूत बतलाये जाते हैं। वहीं सूत्रो का कहना है कि जिलाध्यक्ष खुद नही चाहते थे कि भैयालाल राजवाड़े के लिए शैलेश शिवहरे काम करें,इसलिए दूरी बनाकर रखा गया था,टिकट मिलने के बाद भी जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभाते हुए एकता पर बल नही दिया तो वहीं भैयालाल राजवाड़े और शैलेश शिवहरे का एक होना भी जिलाध्यक्ष कृष्णबिहारी जायसवाल को खटक रहा था जैसा सूत्रो का कहना है।
मैनेजमेंट का दिखा अभाव,भैयालाल जीत रहे इस अतिउत्साह में भी दिखे भाजपाई
इस चुनाव में भाजपा में मैनेजमेंट का काफी अभाव देखा गया,जिसकी मर्जी जहां वहां काम करे इस तर्ज पर कार्यकर्ता काम करते देखे गए,कुछ ऐसे नेता आम सभा मे कुर्सी लगाकर मंच पर बैठे दिखे जो कि एक वोट की हैसियत नही रखते और पिछले कई चुनावो में उन्होने भैयालाल राजवाड़े के खिलाफ काम किया था। मैनेजमेंट यदि अच्छा रहता तो स्थिति और बेहतर होती ऐसा भाजपा कार्यकर्ताओ का ही कहना है शुरू से एक लहर चल रही थी कि भैयालाल राजवाड़े चुनाव जीत जाएंगे इस अति उत्साह में भी भाजपा कार्यकर्ता और पदाधिकारी अंत समय तक नजर आए।
पार्टी कार्यालय के ठीक सामने जबरन बनाया गया चुनाव कार्यालय
विधानसभा चुनाव के कुछ दिन पहले ही भाजपा जिलाध्यक्ष ने कार्यालय के ठीक सामने चुनाव कार्यालय खुलवा दिया था जो कि लोगो की समझ से परे है। इस कार्यालय का लगभग 30 हजार किराया भी दिया गया है,जो कि चर्चा का विषय है कार्यालय में प्रत्याशी भैयालाल राजवाड़े के साथ जिलाध्यक्ष की फोटो आज भी दीवार की शोभा बढा रही है,कार्यालय में एक भी दिन न तो चुनावी गतिविधी हुई और न ही कोई कार्यकर्ता नजर आया। पार्टी कार्यालय के ठीक सामने रोड के एक पार कार्यालय खोला जाना कार्यर्ताओं की समझ से भी दूर था। हां यह अलग बात है कि पार्टी से मिले फंड को चुनाव कार्यालय में चाय पानी नाश्ते में भी खर्च करना बता दिया गया होगा।
हर पोस्टर में खुद की फोटो लगवाने में जिलाध्यक्ष ने दिखलाया रूचि
प्रदेश में कोरिया भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णबिहारी जायसवाल ने कहीं रूचि दिखलाई या नही यह तो कहा नही जा सकता लेकिन प्रत्याशी के पर्चे,पंपलेट में उन्होने अपनी फोटो लगवाकर खुद का प्रचार कराने में काफी रूचि दिखलाई। लोगो का कहना था किसी भी विधानसभा क्षेत्र में सिर्फ प्रत्याशी का फोटो देखा गया लेकिन बैकुंठपुर विधानसभा मे प्रत्याशी के साथ जिलाध्यक्ष ने फोटो लगवाकर एक सवाल खड़ा कर दिया है, कुछ कार्यकर्ताओ ने कहा कि जनाधार विहीन जिलाध्यक्ष अभी से लोकसभा चुनाव का ख्वाब देख रहे हैं।
हर कार्यक्रम में खुद का नेतृत्व बतलाने वाली विज्ञप्ति हुई जारी
भाजपा जिलाध्यक्ष कृष्णबिहारी जायसवाल ने अपनी कार्यकारणी में एक ऐसा काम किया है जो कि शायद ही किसी जिले में हुआ होगा,बतलाया जाता है कि जिलाध्यक्ष ने मीडिया का काम करने हेतु एक पत्रकार को ही कार्यकारणी में रखा है,जो कि दूसरे जिले के निवासी हैं। मीडिया प्रभारी सिर्फ जिलाध्यक्ष के लिए ही काम कर रहे हैं। देखने मे मिला कि जितनी भी प्रेस विज्ञप्ति कार्यक्रम को लेकर जारी की गई उसमें प्रत्याशी का नही बल्कि जिलाध्यक्ष का जबरन नेतृत्व बतलाया गया।
सिर्फ संगठन के भरोसे लंबे हार की ओर जा रहे थे भैयालाल
संगठन ने पिछले कई महीनो से भैयालाल राजवाड़े को घेर रखा था,उन्हे लोगो के संपर्क में आने से भी रोका जा रहा था,टिकट मिलने के बाद संगठन ने ही उनके जीत का सारा भार ले लिया था,जिसे कुछ समय तक देखा भी गया,इस कागजी और हवा हवाई संगठन के भरोसे भैयालाल राजवाड़े एक लंबी हार की ओर अग्रसर भी थे क्योंकि जिलाध्यक्ष का व्यवहार किसी भी कार्यकर्ताओं को रास नही आ रहा था। लेकिन समय रहते ही भैयालाल राजवाड़े ने अपनी नीति बदली और अपने कार्यकर्ताओं के दम पर चुनाव लड़ा जिससे कि उनकी स्थिति काफी सुधरी है। बतलाया जाता है कि भैयालाल राजवाड़े के लिए ऐसे लोगो ने भी काम किया जो कि पार्टी से नाता नही रखते और चुनाव में भी पार्टी कार्यालय की ओर कभी नही देखा लेकिन भैयालाल राजवाड़े के लिए उन्होने काम किया।
संगठन ने भेजा चुनावी खर्च लेकिन हुआ बंदरबांट,भैयालाल राजवाड़े को भी नही दी गई पूरी राशि
भाजपा के अति विश्वस्त सूत्रो की बात माने तो पता चलता है पार्टी ने एक बड़ी राशि चुनाव के लिए भेजी थी उस राशि को बूथ स्तर पर पहुंचाने की जिम्मेदारी संगठन की थी,लेकिन उसे अव्यवस्थित तौर पर बांटकर हजम कर दिया गया है। सारे बूथो में एक समान राशि का वितरण् भी नही किया गया जैसा कि पार्टी सूत्रो का कहना है। सूत्रो ने तो यह भी बतलाया कि स्वयं प्रत्याशी भैयालाल राजवाड़े भी राशि के लिए परेशान रहे,उन्हे पूरी राशि बंटने की अधिकृत जानकारी नही दी गई।
क्या झंडा उठाने वाले होंगे किनारे,क्योंकि चापलूस लगाने सरडी का चक्कर?
भाजपा प्रत्याशी भैयालाल राजवाड़े के जीत के दावे एक्जिट पोल पर प्रतिबंध के कारण घटती घटना अखबार नही करता है,लेकिन जैसी जनचर्चा है कि वे इस चुनाव में कई क्षेत्रो से आगे हैं इस बात की खबर लगते ही कई ऐसे चापलूस और अपना उल्लू सीधा करने वाले जयचंद है जो कि भैयालाल राजवाड़े के निज निवास सरड़ी का चक्कर लगाने लगे हैं,पूरे पांच वर्ष तक जिन्होने सरड़ी की ओर झांककर भी नही देखा और कांग्रेसियों से संबंध बनाकर अपना काम निकाला है,वे लोग भी अब खुद को हितैषी बतलाने लगे हैं। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या भैयालाल राजवाड़े ऐसे लोगो की पहचान कर पाएंगे क्या झंडा उठाने वाले कार्यकर्ताओं की पूछ परख होगी या फिर चापलूस ही जलवा काटेंगे। एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि बैकुंठपुर शहर मंे कई ऐसे जयचंद और चापलूस बैंठै है जो जबरन भैयालाल राजवाड़े तक जाकर लोगो के बारे में कान भरते हैं और अपना उल्लू सीधा करते फिरते हैं,ऐसे लोगो से बचना और ईमानदारी से काम करने वाले लोगो को महत्व देना भी भैयालाल राजवाड़े के लिए एक बड़ी चुनौती है।
टिकट के लिए जिलाध्यक्ष ने लिया था श्रेय,क्या जीत पर भी लेंगे श्रेय,जबकि संगठन कहीं नही आया नजर
भाजपा से भैयालाल राजवाड़े को टिकट मिलने के बाद कई बार देखने को मिला कि इसका सारा श्रेय लेने की कोशिश जिलाध्यक्ष कृष्णबिहारी जायसवाल ने लिया था,जबकि भैयालाल राजवाड़े को टिकट मिलने का एक बहुत बड़ा आधार सामाजिक वोट के साथ एक जिताऊ कंडीटेड था। लेकिन जिस प्रकार जिलाध्यक्ष ने श्रेय लिया उससे ऐसा प्रतीत होता है कि भैयालाल राजवाड़े की जीत के बाद भी उसका सारा श्रेय जिलाध्यक्ष खुद लेना चाहेंगे। जबकि इस चुनाव में संगठन बूरी तरह फेल था,जिलाध्यक्ष कुछ जगह को छोड़कर कहीं नजर नही आए उन्होने लोगो को एक करने पर भी बल नही दिया,सारा ध्यान पार्टी से मिले फंड और खुद को जबरन व्यस्त बताने में लगा दिया गया था। यह कहा जा सकता है यदि भैयालाल राजवाड़े की जीत होती है तो इसमें सिर्फ कार्यर्ताओं का योगदान होगा,भैयालाल राजवाड़े के लिए काम करने वाले समर्थको का होगा,जिलाध्यक्ष यदि श्रेय लेते हैं तो यह काफी हास्यप्रद होगा।
चुनिंदा कार्यकर्ता बने बड़े नेताओं के गले की फांस,जमीनी कार्यकर्ता का गिरता है मनोबल
भाजपा में इन दिनो बड़बोले कार्यकर्ताओं की फौज सी आ गई है जो काम कम करते हैं और गलत बयान बाजी से लेकर सोशल मीडिया में जबरन की सक्रियता दिखलाकर पार्टी की किरकिरी कराते फिरते हैं,ऐसे बड़बोले कार्यकर्ता सार्वजनिक स्थलो मे बड़े नेताओं से लेकर पार्टी के खिलाफ भी बयानबाजी करते हैं जिससे कि पार्टी का तो नुकसान हो ही रहा है उससे ज्यादा ऐसे कार्यकर्ता बड़े नेताओं के मुंह लगकर उनके गले की फांस बने हुए हैं। नेताओं को भी खुद की छवि बनाने के लिए ऐसे समर्थको एवं कार्यकर्ताओं से दूरी बनाकर रखने की जरूरत है।
कांग्रेस के साथ भीतरघात भाजपा को मिलाता दिखा फायदा
चुनाव बाद यदि हालात पर गौर किया जाए तो देखने में मिलता है कि इस बार कांग्रेस प्रत्याशी अंबिका सिंहदेव के व्यक्तिगत व्यवहार के कारण काफी रोष था,उनके खिलाफ जमकर भीतरघात भी हुआ है कई नेता व समर्थको ने तो खुला विरोध किया है। भैयालाल राजवाड़े के कट्टर विरोधियो ने भी इस बार उनका साथ दिया है,यह चर्चा का विषय है। अंबिका सिंहदेव के साथ भीतरघात का फायदा भैयालाल राजवाड़े को मिलता हुआ नजर आ रहा है।
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