जिला विभाजन और सड़क चैड़ीकरण को ले कर दिख रही लोगो में नाराजगी पर नाराजगी कितना डालेगी परिणाम पर फर्क?
क्या इस मुद्दे पर शहर में पीछे हो सकती हैं अंबिका सिंहदेव?
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 11 नवम्बर 2023 (घटती-घटना)। विधानसभा चुनाव हेतु अब प्रत्याशियों सहित राजनैतिक दल के कार्यकर्ताओं ने भी प्रचार अभियान तेज कर दिया है,गांव से लेकर शहर तक मतदाताओं से मिलकर वोट मांगा जा रहा है इसी क्रम में यदि बात बैकुंठपुर शहर की तरफ की जाए तो देखने में स्पष्ट प्रतीत हो रहा है कि इस बार कांग्रेस प्रत्याशी यहां से पीछे हो सकती हैं, बैकुंठपुर शहर में अंबिका सिंहदेव के खिलाफ चल रही हवा इस बात का साफ संकेत है। कोरिया जिले का विभाजन और सड़क चैड़ीकरण लोगो की जुबान पर है, इसे लेकर शहर के नागरिक स्थानीय विधायक अंबिका सिंहदेव को जिम्मेदार मानते हैं।
जिले का असंतुलित विभाजन,मुख्य मुद्दा
कोरिया जिले का गठन 25 मई 1998 को हुआ था और इसके निर्माता के रूप में पूर्व वित्त मंत्री स्व.डॉ. रामचंद्र सिंहदेव कोरिया कुमार की पहचान है। मनेंद्रगढ जिले की मांग भी वर्षो पुरानी थी लेकिन यह सर्वविदित है कि कोरिया कुमार के ना चाहने के कारण ही मनेंद्रगढ को जिला नही बनाया जा रहा था। पिछले चुनाव के पहले कोरिया कुमार का निधन हुआ और सहानुभूति की लहर पैदा कर अंबिका सिंहदेव विधायक निर्वाचित हुईं लेकिन यह उनकी असफलता का स्पष्ट उदाहरण है कि कांग्रेस के द्वारा बनाये गए जिले को कांग्रेस की ही सरकार ने नेस्तनाबुद कर दिया, अविकसित कोरिया जिले का विभाजन वह भी असंतुलित रूप से कर दिया गया लंबी लड़ाई के बाद भी कोई निष्कर्ष नही निकला जिससे कि आज कोरिया का प्रत्येक नागरिक आक्रोशित है और इसके लिए अंबिका सिंहदेव का व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार मानता है। लोगो का कहना है कि जिले के असंतुलित विभाजन होने के बाद भी अंबिका सिंहदेव ने विरोध नही किया यहां तक कि उनके द्वारा विधायक विनय जायसवाल को लडडू खिलाया जा रहा था। विधायक अंबिका सिंहदेव एमसीबी जिले के उद्घाटन समारोह में भी शामिल हुई और मनेंद्रगढ का नाम अपने पिता के नाम पर होने का गर्व महसूस करने की बात भी कहा गया यह सब लोगो के मन में है और इसका असर चुनाव पर पड़ेगा। हलांकि कोरिया को बर्बाद करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष चरणदास महंत को भी जिम्मेदार माना जाता है। स्थानीय जनो का कहना है कि विभाजन किया गया कोई बात नही लेकिन विभाजन असंतुलित नही होना था। कोरिया जिले का असंतुलित विभाजन भी चुनाव में मुख्य मुद्वा है।
चैड़ीकरण में बाधा उत्पन्न कर शहर को किया बर्बाद
कोरिया जिले का मुख्यालय बैकुंठपुर आज सुविधाओं के लिए तरस रहा है,इस शहर में सड़क चैड़ीकरण एक अबूझ पहेली बनकर रह गई है,प्रशासन भी इस मामले में गंभीर नही है,बीच-बीच में इस दिशा में काम भी शुरू किया गया लेकिन स्थिति आज भी जस की तस बनी हुई है। सड़क चैड़ीकरण ना होने के कारण लोग दोपहिया एवं चारपहिया वाहन लेकर गुजरने में परेशानी महसूस करते हैं। आए दिन जाम की स्थिति निर्मित होती है। कई दुकानदारों द्वारा अपना सामान दुकान के बाहर निकालकर रखा जाता है जिससे परेशानी और बढ जाती है। बीच में विधायक अंबिका सिंहदेव ने भी इस मामले पर रूचि लिया था लेकिन तथाकथित व्यापार संघ के अध्यक्ष के बहकावे मे आकर वह भी चुप हो गईं। विधायक समर्थक चंगु मंगू कार्यकर्ता भी आए दिन चैड़ीकरण का ढिंढोरा पीट रहे थे लेकिन चुनाव के वक्त सोशल मीडिया में उठ रहे मामले पर उनकी चुप्पी है। बतलाया जाता है कि व्यापार संघ के अध्यक्ष द्वारा खुद के स्वार्थ में ऐसी भूमिका अधिकारियों एवं विधायक के समक्ष बनाई गई जिससे वे दिग्भ्रमित हो गए और एक बार फिर सड़क चैड़ीकरण का कार्य ठप्प हो गया।
आम नागरिक से लेकर व्यापारी भी हैं आक्रोशित
सड़क चैड़ीकरण स्वार्थ सिद्वी के कारण नही हो सका,इससे अब आम नागरिक एवं अनेक व्यापारी भी नाराज हैं,व्यापारियों की हालत ऐसी हो गई है कि दुकान के सामने जगह ना होने कारण कोई चारपहिया सवार परिवार लेकर उनके दुकान तक नही आना चाहता,मुख्य चैक के आसपास पार्किंग की व्यवस्था भी नही है, नागरिकों के साथ व्यापारियो का एक बहुत बड़ा वर्ग इससे आक्रोशित है। व्यापारी वर्ग विधायक से दूरी बनाकर रखा हुआ है।
वार्डो में अंबिका सिंहदेव को लेकर दिख रही नाराजगी
बैकुंठपुर नगरपालिका में कुल 20 वार्ड हैं उनमें से अधिकांश वार्डो में कांग्रेस समर्थित पार्षद हैं, जो कि अपने बलबूते पार्षद का चुनाव जीते थे। नगरपालिका अध्यक्ष के चुनाव में भी विधायक अंबिका सिंहदेव की काफी किरकिरी हुई थी। वार्डवासियों ने आज तक विधायक अंबिका सिंहदेव से सीधा संवाद नही किया है, शहर विकास में भी उनकी भूमिका नगण्य है। 20 वार्डो में से लगभग 17 वार्डो में उनकी स्थिति एकदम नाजुक है, खुद के गृह वार्ड महलपारा से भी वे पीछे रह सकती हैं।
कई युवा कार्यकर्ता हुए निष्क्रिय,पड़ेगा असर
कांग्रेस में युवा कार्यकर्ताओं की फौज है,पिछले विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओ ने मन लगाकर काम भी किया था जिसका असर परिणाम मे देखने में मिला था, लेकिन इस बार स्थिति एकदम अलग है। गिनती के कार्यकर्ता और समर्थक विधायक अंबिका सिंहदेव के लिए काम कर रहे हैं, एक बड़ा वर्ग निष्क्रिय है और चुनाव से दूरी बनाकर चल रहा है, वरिष्ठ नेताओं के आगमन पर कार्यकर्ता चेहरा दिखाने जरूर पहुंचे जाते है। कार्यकर्ताओ के निष्क्रिय रहने का असर जरूर पड़ेगा।
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