- छत्तीसगढ़ की कांग्रेस पार्टी में क्या सब कुछ शक्ति प्रदर्शन करके ही संभव हो पाता है,क्या शक्ति प्रदर्शन करके ही काबिलियत सिद्ध हो पाती है?
- क्या समर्थकों का परेड कराना ही है पार्टी में कुछ भी मनवाने का सबसे सरल फार्मूला,क्या पार्टी समर्थकों के परेड से ही खुश होती है?
- जब प्रदेश में कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री को लेकर ढाई ढाई साल के फार्मूले पर चल रहा था, तब विधायकों को दिल्ली परेड कराकर मुख्यमंत्री ने साबित की थी अपनी ताकत।
- अब टिकट कटने की आशंका देखकर कुछ विधायक कर रहे हैं समर्थकों के साथ राजधानी कुच,समर्थकों की बड़े नेताओं के सामने करा रहे परेड।
- मनेंद्रगढ़ विधायक भी उन्ही में से एक समर्थकों को लेकर पहुंचे राजधानी,कर रहे टिकट की मांग,साबित कर रहे अपनी ताकत।
- मनेंद्रगढ़ विधायक उन्ही विधायकों में से एक जिन्होंने मुख्यमंत्री के लिए की थी दिल्ली परेड,अब उसी तर्ज पर खुद के लिए कर रहे प्रयास।
- क्या उन्होंने पार्टी से यही सीख मिल सकी की जब खुद पर बन आए परेड समर्थकों की कराओ और ताकत दिखाकर पार्टी को डराओ।
- क्या वह पार्टी को डरा पाएंगे,क्या वह भी दिल्ली परेड की तरह मुख्यमंत्री की तरह अपनी ताकत से पार्टी को झुका पाएंगे?

-रवि सिंह-
एमसीबी 15 अक्टूबर 2023 (घटती-घटना)। छत्तीसगढ़ में सत्ताधारी पार्टी कांग्रेस विधानसभा चुनाव को लेकर टिकट तय करने में स्क्रीनिंग कमेटी प्रदेश सहित राष्ट्रीय स्तर के नेताओं का पसीना छूट जा रहा है और वह अत्यधिक समीक्षा की स्थिति में हैं और ऐसे प्रत्याशी वह चयन करना चाहते हैं जो चुनाव जीतकर भी आएं वहीं उनका टिकट मिलने के बाद विरोध भी न हो और उन्हे विधानसभा क्षेत्र में सभी पदाधिकारी सहित कार्यकर्ता पार्टी के स्वीकार करें। सूत्रों के अनुसार प्रदेश में जहां भाजपा ने अपने 85 प्रत्याशी पहले ही तय कर दिए हैं और सभी अपने अपने विधानसभा क्षेत्र में जहां पार्टी ने उन्हें चुनाव लड़ने अधिकृत किया है लगातार सक्रिय हैं और अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहें हैं, वहीं सत्ताधारी दल ने अभी एक भी सीट पर प्रत्याशी घोषित नहीं किया है, जिसकी वजह यह मानी जा रही है की सभी तरह से संतुष्ट होकर ही पार्टी टिकट वितरण करेगी और किसी भी स्थिति में पार्टी न तो विधानसभा क्षेत्र में किसी अन्य कार्यकर्ता या पदाधिकारी का विरोध देखना चाहती है और न ही वह प्रत्याशी की हार ही चाहती है, इसी कारण पार्टी टिकट वितरण को लेकर लगातार समीक्षा कर रही है और जिसका क्रम आज टूटने को है और आज कुछ सीटों पर प्रत्याशी तय कर उनके नाम जाहिर कर दिए जायेंगे ऐसी संभावना है। हो सकता है की आज कांग्रेस प्रत्याशियों की घोषणा कर दे पर घोषणा पुरे सीटो करती या आधे में?
प्रदेश में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जितना सक्रिय जितनी तेज भाजपा नजर आ रही है अन्य कई दल नजर आ रहे हैं उसके मुकाबले सत्ताधारी दल कम सक्रिय नजर आ रही है और खासकर टिकट वितरण मामले में इसकी वजह यह मानी जा रही है की सत्ताधारी दल में टिकट को लेकर ज्यादा संघर्ष जारी है और यह संघर्ष प्रत्याशी बनने के लिए जारी है क्योंकि पार्टी किसी भी हाल में प्रत्येक सीट से जीतने वाले को मौका देना चाहती है वहीं उसका लक्ष्य भी 75 पार का है जिसके लिए वह फूंक फूंककर अपना कदम उठा रही है और हर सीट पर पूरी समीक्षा कर रही है साथ ही सर्व कराकर स्थिति का जायजा ले रही है की वर्तमान विधायक जितने लायक हैं की नहीं यदि नहीं तो उनका टिकट पार्टी काटने से भी गुरेज नहीं करने वाली यह पार्टी की मंशा साफ नजर आ रही है वहीं यदि वर्तमान विधायकों की स्थिति की बात की जाए तो कई के हारने का डर पार्टी को है और पार्टी उनकी जगह कोई नया प्रत्याशी देना चाहती है जिनके जितने की संभावनाओं पर पार्टी सर्वे करा चुकी है लेकिन पार्टी के लिए मुसीबत वर्तमान ऐसे विधायक बन रहे हैं जिनका टिकट कटने की अफवाह फैल गई है और वह अपने समर्थकों के साथ राजधानी का दौरा कर रहे हैं यहां तक की दिल्ली दरबार तक वह संपर्क कर रहे हैं।
समर्थकों की फौज लेकर बड़े नेताओं के पास पहुंच भी रहे हैं
शक्तिप्रदर्शन करके यह बताना चाहते हैं की उनके शिवाय किसी को टिकट दिया गया तो वह उसे स्वीकार नहीं होने देंगे कुल मिलाकर विरोध करेंगे और उसे निपटा देंगे इसके लिए वह अपने समर्थकों की फौज लेकर बड़े नेताओं के पास पहुंच भी रहे हैं, ऐसा ही मनेंद्रगढ़ विधानसभा में भी देखने को मिल रहा है मनेंद्रगढ़ विधायक समर्थक कुछ गिने चुने लोग फिलहाल राजधानी पहुंचे हैं और उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष विधायक के लिए अर्जी लगाई है,यह एक तरह का शक्तिप्रदर्शन है जो कांग्रेस पार्टी की रीति नीति बनती देखी गई है हाल फिलहाल के दौरान छत्तीसगढ़ कांग्रेस पार्टी में और इसका बड़ा उदाहरण मुख्यमंत्री को लेकर हुए विधायकों के दिल्ली परेड को माना जा सकता है जब मुख्यमंत्री के समर्थन में टी एस सिंहदेव के विरोध में प्रदेश के अधिकांश विधायकों का दिल्ली परेड हुआ था और जिसमे विधायकों का परेड सफल हुआ था शक्ति प्रदर्शन का असर भी देखने को मिला था दिल्ली में बड़े नेता दबाव में आए थे और उन्होंने मामले को सिरे से खारिज किया था और टी एस सिंहदेव को खाली हांथ लौटना पड़ा था,शक्ति प्रदर्शन एक बार भी नहीं हुआ था कई बार हुआ था कई बार विधायक दिल्ली दरबार पहुंचे थे और उन्होंने मुख्यमंत्री के लिए अपना समर्थन दिया था और दबाव से ही उन्होंने मुख्यमंत्री को असमय पद से हटने से बचाया था, अब विधायक अपने लिए भी वही फार्मूला अपना रहे हैं अब वह निर्वाचित पार्षदों का सहारा ले रहे हैं और उन्हे दबाव बनाने अपने लिए लेकर प्रदेश की राजधानी पहुंच रहे हैं जिससे उनकी टिकट पक्की हो सके।
क्या पार्टी से सीखा?
कहा जाता है इंसान अनुभव से सीखता है और उसी अनुसार उसका पालन अपने जीवन में सीख का करता है, मनेंद्रगढ़ विधायक ने भी जब देखा कि उनका टिकट कटना तय है उन्होंने जो अब तक पार्टी में रहकर सीखा है उसके अनुसार ही अपना प्लान बनाया और उन्होंने समर्थकों को अपने गिने चुने को आगे कर दिया अब वह उनके लिए टिकट की मांग करने राजधानी पहुंचे हैं जहां वह यह जताने पहुंचे हैं की वर्तमान विधायक को टिकट नहीं मिला तो पार्टी को सीट गवानी भी पड़ सकती है और हार भी सकती है पार्टी,वैसे राजधानी पहुंचे समर्थक विधानसभा में कितने प्रभावशील हैं यह किसी से छिपा नहीं है और उनके कहने से कितना मत प्रभावित होगा यह भी लोग जानते हैं लेकिन जब विधायक को किसी का सहारा नहीं मिला तब जो हैं उन्ही से वह काम चला रहे हैं पार्टी की ही राह पर उसकी सीख अनुसार वह आगे बढ़ रहे हैं और वह बताना चाहते हैं की उनके पास उनके पीछे लोग हैं जो टिकट कटने पर नए प्रत्याशी को हराने का भी दम रखते हैं। कुल मिलाकर मुख्यमंत्री वाली प्रदेश की लड़ाई से जो कुछ मनेंद्रगढ़ विधायक सीख पाए उसमे से उन्होंने यह सीख गांठ बांधकर रख ली की शक्ति प्रदर्शन संख्या बल से पार्टी को झुकाया जा सकता है और वह उसी में लगे हुए हैं। अब देखना है उनकी सीख जो पार्टी से ही उन्हे मिली है उसका उपयोग कर वह कितना सफल हो पाते हैं क्या वह अपने लिए टिकट ला पाते हैं या फिर टिकट गंवाते हैं,वैसे कुछ लोगों का या अधिकांश चिरमिरि खड़गवां निवासियों का कहना है की पार्टी खड़गवां या चिरमिरी से प्रत्याशी नहीं बनाती है तो पार्टी के लिए यह सीट सुरक्षित नहीं है क्योंकि जिला मुख्यालय नहीं मिला,जिला चिकित्सालय नहीं मिला,शासकीय कोई जिला स्तरीय कार्यालय नहीं मिला क्षेत्र को नए जिला बनने के बाद अब विधायक भी यदि क्षेत्र को पार्टी नहीं देगी तो पार्टी को नुकसान उठाना पड़ेगा जो तय है।
मुख्यमंत्री ने जो किया क्या वह अब विधायक कर रहे हैं,कांग्रेस पार्टी में क्या शक्ति प्रदर्शन ही महत्वपूर्ण है
प्रदेश के मुख्यमंत्री ने अपनी कुर्सी बचाने ढाई साल बाद विधायकों की परेड दिल्ली तक कराई,अब वही काम विधायक अपनी टिकट बचाने कर रहे हैं छत्तीसगढ़ में कांग्रेस पार्टी के विधायक,जिनका परफॉर्मेंस खराब है पार्टी उनका टिकट काटना चाहती है लेकिन जो विधायक मुख्यमंत्री की कुर्सी बचाने दिल्ली तक परेड किए थे और जिन्होंने यह समझ पाया था की दबाव में पार्टी झुकती है वह अब अपने समर्थकों की परेड राजधानी में करा रहें हैं,कुल मिलाकर देखा जाए तो जो विधायक पांच सालों में सीख पाए दबाव की राजनीति उसका प्रयोग वह अपनी ही पार्टी को झुकाने में कर रहे हैं। मनेद्रगढ़ विधायक भी जानते हैं की कैसे उनकी परेड से मुख्यमंत्री की कुर्सी बची थी इसलिए वह भी अंतिम दम तक शक्ति प्रदर्शन कर रहे हैं देखना है मुख्यमंत्री की कुर्सी उन्होंने बचाई थी अपनी परेड से अब उनकी टिकट क्या उनके समर्थक परेड कर बचा पाते हैं,वैसे मनेंद्रगढ़ विधायक के समर्थक सभी कुशल व्यापारी हैं और व्यापार ही उनका मूल पेशा रहा है आम लोगों से उनका जुड़ाव नहीं रहा है और इसलिए उनका दबाव नाकाम होगा यह तय माना जा रहा है।
जिसके नेतृत्व में मनेंद्रगढ़ विधायक के समर्थन में पहुंचे हैं पार्षद वह खुद हैं पार्षद,लाभ मामलों के अलावा कभी सक्रिय नजर नहीं दिखे अगुवा विधायक समर्थक पार्षद
चिरमिरी के जिस पार्षद के नेतृत्व में कई पार्षद विधायक मनेंद्रगढ़ का टिकट बचाने निकले हैं वह पार्षद कुशल व्यापारी मात्र हैं उनका राजनीति से केवल मतलब अनुसार लेना देना है यह सभी जानते हैं,वह क्या बचा पाएंगे अपनी परेड से विधायक की टिकट यह बड़ा सवाल है क्योंकि जिस पर लाभ के अलावा कभी जनहित कार्य का लेवल न लगा हो वह कितना असरकारी होगा समझा जा सकता है।
मनेद्रगढ़ विधानसभा में मुख्यमंत्री की पहली पसंद उनके समाज से आने वाला कोई प्रत्याशी,किसी और को टिकट मिला तो वह उसकी किस्मत की बात
मनेंद्रगढ़ विधानसभा में यह तय माना जा रहा है की मुख्यमंत्री की पसंद का प्रत्याशी होगा सत्ताधारी दल से,यह प्रत्याशी उनके समाज से आने वाला कोई होगा यह भी तय माना जा रहा है,माना जा रहा है की सरगुजा संभाग में मुख्यमंत्री एक प्रत्याशी अपने समाज से चाहते हैं,ऐसे में उनके ही समाज से किसी का टिकट तय होगा यह तय है,मनेंद्रगढ़ विधानसभा में जितने वाले से ज्यादा मुख्यमंत्री की पसंद का प्रत्यासी टिकट पा सकेगा यह माना जा रहा है क्योंकि संभाग में वह अपने समाज की उपस्थिति साबित करके अपनी लोकप्रियता साबित करना चाहते हैं।
मुख्यमंत्री के समाज से आने वाले किसी दावेदार को मिला टिकट तो तय हो जायेगा जिन्होंने मुख्यमंत्री का दिया साथ उनसे ऊपर मुख्यमंत्री के लिए उनका समाज
मनेंद्रगढ़ विधायक का यदि टिकट कटता है तो यह तय माना जा रहा है की मुख्यमंत्री के समाज से आने वाले किसी चेहरे को मौका मिल सकेगा,अब यदि ऐसा होता है तो यह माना जायेगा की मुख्यमंत्री के लिए समाज उनका प्रथम है उनका मुसीबत में साथ देने वाले उनके लिए महत्वपूर्ण नहीं हैं,मनेंद्रगढ़ विधायक का टिकट कटता है तो वह भी सोचने पर मजबूर होंगे यदि वह टी एस सिंहदेव का साथ देते आज उनकी स्थिति ऐसी नहीं होती, मुख्यमंत्री की तरह टी एस सिंहदेव समाज जाति वाले फार्मूले पर नही चलते उन्हें टिकट मिल ही जाता।
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