ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित देशी व विदेशी शराब दुकानों में मिल रही है मदिरा प्रेमियों को अधिक कीमत में शराब
मदिरा प्रेमियों में आक्रोश,विभाग उदासीन
-दुलारे अंसारी-
रायपुर,26 फरवरी 2023 (घटती-घटना)। जिले में आबकारी विभाग और शराब दुकानों में काम करने वाले अस्थाई कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते निर्धारित दर से बिक्री किए जाने वाले विदेशी शराबो को इनके आपसी सांठगांठ के चलते निर्धारित मूल्य से अधिक दर पर बेचे जाने की शिकायत लगातार मिल रही है। वही कम कीमतों में बिक्री होने वाली निम्न स्तर के शराबों के अलावा ब्रांडेड शराबों की कीमतों में भी मदिरा प्रेमियों की गाड़ी खून पसीने की कमाई को लूटा जा रहा है।
यह करिश्मा राजधानी से लगे ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित शराब दुकानों में जोर-शोर चल रहा है।।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिहाड़ी मजदूरी का काम करने वाले मजदूर वर्ग का एक तबका अपनी दिन भर की थकान मिटाने इन शराब दुकानों में पहुंचते हैं। वही से इन कर्मचारियों की मनमानी शुरू हो जाती है। हम यहां पर बता देना चाहते हैं कि स्तरीय शराब में गोवा ,सीजी ,जम्मू ,चॉइस ,गोल्डन गोवा तथा अन्य नामों से शराब बेची जा रही है जिनकी शासन द्वारा निर्धारित मूल्य 120रुपए प्रति 180 मिलीग्राम शराब उपभोक्ताओं को दिए जाना निर्धारित किया गया है। इसमें सबसे अधिक प्रचलित गोवा नामक शराब को मदिरा प्रेमी पीना ज्यादा पसंद करते हैं। जिसके चलते इन कर्मचारियों के द्वारा गोवा नामक शराब अलग से रखकर 120 रुपए में अन्य ब्रांडों के शराब को किया जाता है।वही गोवा ब्रांड कि शराब को मांग करने पर ग्राहकों से शराब दुकान केकर्मचारी 120 रुपए के बजाए 130 रुपए लेकर निर्धारित मूल्य से 10 रुपए अधिक कीमत में बेचे जाने की शिकायत मिली है वही हमारे घटती घटना के संवाददाता द्वारा इस मामले की जानकारी सहायक आबकारी आयुक्त अरविंद पटले को दिए जाने के बाद उनसे इस विषय में चर्चा करनी चाही तो उन्होंने आनाकानी करते हुए किसी मीटिंग के बहाने टालमटोल का रवैया अपनाते नजर आए अब सवाल यह उठता है कि आखिरकार इस पर नकेल कौन कसे ? यही नहीं बेहतरीन ब्रांड की शराब में भी अधिक कीमत वसूली किए जाने की शिकायत सामने आई है शहर से 15 किलोमीटर दूर स्थित माना बस्ती के विदेशी शराब शराब दुकान में शासन द्वारा निर्धारित 880 रुपए मूल्य की ब्रांडेड शराब को 900रुपए में बेचे जाने शिकायत उपभोक्ताओं के द्वारा लगातार की जा रही है जबकि राज्य शासन द्वारा बनाई गई आबकारी नीति में किसी भी उपभोक्ताओं को निर्धारित मूल्य से अधिक कीमत पर शराब दिए जाने का प्रावधान नहीं है वही जिला आबकारी विभाग द्वारा राज्य शासन के अधिनियम की लगातार धज्जियां उड़ाई जा रही है ।अब तो यह कहना लाजिम होगा की आबकारी विभाग व अस्थाई कर्मचारियों द्वारा मिलकर लूट की खुली छूट नामक कहावत को चरितार्थ कर रहे हैं।
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