- चामट पहाड़ पर वन विभाग द्वारा बनाई जा रही सड़क को लेकर वन विभाग क्या पेश कर रहा अपनी सफाई ?
- चामट पहाड़ पर बनाई जा रही सड़क में जमकर हो रहा है शासकीय राशि का दुरुपयोग
- गिट्टी सहित मिट्टी पहाड़ की ही डाली जा रही है सड़क पर,जबकि दूर से परिवहन का लगाया जा रहा है बिल
- वन विभाग की करस्तानियों पर आखिर कब जिले के वरिष्ठ अधिकारी लेंगे संज्ञान
- नए रेंजर भी चल रहे पुराने रेंजर के ढर्रे पर नहीं दिख रहा वन विभाग में कोई नय बदलाव
- आखिर क्या है वजह की पुराने रेंजर के ढर्रे पर ही चल रहा है वन विभाग में निर्माण का कार्य ?

-रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 25 फरवरी 2023 (घटती-घटना)। बैकुंठपुर वन मंडल अंतर्गत आने वाले चामट पहाड़ पर वन विभाग द्वारा सड़क बनाई जा रही है और सड़क निर्माण में जमकर शासकीय राशि का बंदरबांट किया जा रहा है जिसको लेकर घटती-घटना ने खबर प्रकाशित किया था जिससे घबराकर वन विभाग ने सड़क को लेकर और शासकीय राशि के बंदरबांट मामले में अलग ही तर्क सामने रखा है और सड़क को धर्म से जोड़कर धर्म आधारित उदाहरण दिया है। वन विभाग के किस अधिकारी ने सड़क में शासकीय राशि के दुरुपयोग साथ ही राशि के बंदरबांट मामले में धर्म आधारित उदाहरण दिया है यह तो स्पष्ट नहीं है लेकिन धर्म आधारित उदाहरण देकर उन्होंने सड़क निर्माण में हो रहे करोड़ों के घोटाले को धर्म की आड़ में छिपाने का जरूर प्रयास किया है यह कहा जा सकता है। सड़क निर्माण में पुराने वन परिक्षेत्राधिकारी की ही तर्ज पर भंवरलाल नाम के व्यक्ति की मशीनें और वाहनों का उपयोग किया जा रहा है साथ ही निर्माण में उन्ही की तर्ज पर काम जारी है जबकि उनकी पदोन्नति हो चुकी है और वह बड़े पद पर आसीन हो चुके हैं।
भंवरलाल का निर्माण में शामिल होना ही यह साबित करने के लिए काफी है की बंदरबांट हो रही है और जैसा पहले से होता आ रहा है वही काम जारी है और अब धर्म की आड़ में बचने का प्रयास विभाग कर रहा है और त्रिलोकी धाम तक मार्ग बनाकर धार्मिक श्रद्धालुओं की मदद कर रहा है विभाग यह साबित कर रहा है। वैसे बताया जा रहा है की निर्माण कार्य पुराने वन परिक्षेत्राधिकारी जो अब एसडीओ हैं के द्वारा ही वर्तमान वन परिक्षेत्राधिकारी के नाम के सहारे किया जा रहा है और भंवरलाल की मशीनें और वाहन इसीलिए उपयोग की जा रही हैं क्योंकि एसडीओ साहब की भंवरलाल के साथ सांठगांठ है या यह कहें केवल नाम भंवरलाल का है और सबकुछ एसडीओ साहब का है।
मेहरबानी क्यों ?
शिकायतकर्ता के शिकायत के अनुसार 29 दिसबंर 2021 को अखिलेश मिश्रा को परिक्षेत्राधिकारी से एसडीओ के रूप में पदोन्नत कर उन्हें बैकुंठपुर में ही पदस्थ किया गया पदोन्नति के बाद अन्यत्र वनमंडल में उन्हें पदस्थ किया जाना चाहिए था लेकिन तत्कालिन पीसीसीएफ वन बल प्रमुख से इनकी सांठ गांठ के कारण इन्हें बैकुंठपुर में ही पदस्थ कर दिया गया। अखिलेश मिश्रा वर्ष 1995 में वनरक्षक के पद से भर्ती होकर इसी वन मंडल के परिक्षेत्र में एसडीओ बनकर यही पदस्थ है। इनके द्वारा एसडीओ पदोन्नत होने के बाद 11 माह तक कोटाडोल और बैकुंठपुर परिक्षेत्र का प्रभार अपने पास रखा गया, जिसके सूचना के अधिकार के तहत सीसीएफ अनुराग श्रीवास्तव से जानकारी मांगी गई परन्तु उन्होनें निरंक जानकारी दी, उनके पूछा गया था कि आपकी जानकारी में श्री मिश्रा एसडीओ रहते दो-दो परिक्षेत्रों का प्रभार संभाल रहे है तो कि बड़ी विाीय अनियमितताएं और घोटाला होना दर्शाता है इस शिकायत के साथ सीसीएफ अंबिकापुर का जवाब संलग्न है।
सड़क निर्माण में कहीं नहीं लगता सूचना बोर्ड
वन विभाग द्वारा बनाई गई सड़को में कहीं भी सूचना बोर्ड जिसमे निर्माण की लागत,एजेंसी साथ ही समयावधि का उल्लेख हो नही लगाया जाता। वन विभाग करोड़ों के निर्माण कार्य बिना सूचना बोर्ड के करता आ रहा है और किसी कार्य में लागत और एजेंसी सहित जरूरी जानकारी का बोर्ड ढूंढने को नहीं मिलता। सूचना बोर्ड नहीं होने से ही स्पष्ट है की किस तरह बंदरबांट जारी है शासकीय राशि की।
सड़क में नहीं चलाई जाती रोलर सिर्फ चलती है मशीन
धर्म का नाम लेकर जो सड़क वन विभाग बना रहा है उसमे किस तरह से शासकीय राशि का बंदरबाट किया जा रहा है इसे इससे ही समझा जा सकता है की सड़क निर्माण में न तो रोड रोलर चलाया जा रहा है और केवल मशीनों से ही पहाड़ को काटकर रास्ता बनाया जा रहा है। सड़क निर्माण में रोड रोलर नहीं चलाए जाने से ही समझा जा सकता है की सड़क कितनी गुणवत्ता का बनाया जा रहा है और कैसे शासकीय राशि का दुरुपयोग अपनी जेब भरने के लिए किया जा रहा है।
सड़क निर्माण के दौरान नहीं होता पानी का छिड़काव
सड़क निर्माण में पानी का भी छिड़काव नहीं किया जा रहा है जो जरूरी है। बिना पानी छिड़काव के ही लंबी सड़क बनाई जा रही है।
मजदूरों से कराना है काम पर सिर्फ चलती है भवर लाल की मशीने
सड़क निर्माण में मजदूरों से काम नहीं लिया जा रहा है केवल मशीन वह भी भंवरलाल की मशीनें ही चलाई जा रही हैं और सड़क बनाई जा रही है जबकि मजदूरों से काम लेना जरूरी है शासकीय नियमों के तहत। भंवरलाल जो एक तरह से वन विभाग बैकुंठपुर का सबसे बड़ा ऐसा नाम है जो वन विभाग में वाहन उपलब्धकराता है केवल उसी की मशीनों से ही सड़क बनाई जा रही है।
गिट्टी,मुरूम,सहित मिट्टी पहाड़ की ही,दूर से परिवहन कर लाने का हो रहा भुगतान
सड़क में जो मुरूम गिट्टी और जो मिट्टी उपयोग की जा रही है वह सभी पहाड़ की ही उपयोग की जा रही है लेकिन उसके दूर से परिवहन कर लाने का भुगतान कागजों में किया जा रहा है जिससे साबित है की आंख मूंदकर वन विभाग के साथ ही जिले के आला अधिकारी बैठे हुए हैं और शासकीय राशि के बंदरबांट की छूट विभाग को दिए हुए हैं।
भंवरलाल के नाम की गाडि़यों में चलते हैं अधिकारी और उनके रिश्तेदार
भंवरलाल का नाम वन विभाग बैकुंठपुर में ऐसा नाम है जिसकी मशीनें जिसकी वाहने वन विभाग बैकुंठपुर में सबसे ज्यादा उपयोग की जाती हैं यहां तक की भंवरलाल की ही वाहनों में विभाग के अधिकारी और उनके रिश्तेदार भी सफर करते हैं उपयोग करते हैं यह देखा गया है। भंवरलाल कौन है यह सामने से कोई नहीं जानता लेकिन वह विभाग में बड़ा नाम है।
जांच होने पर होगा बड़ा खुलासा,होगा करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश
सड़क निर्माण मामले में यदि जांच हुई तो करोड़ों के घोटाले का पर्दाफाश हो सकता है। किस तरह सड़क बनाने और राशि बंदरबांट मामले में धर्म का सहारा लिया जा रहा है और अपनी जेब भरी जा रही है यह जांच उपरांत सामने आ सकेगा। वैसे पूरे मामले में वन विभाग के बड़े अधिकारी भी शामिल हैं इससे इंकार नहीं किया जा सकता साथ ही जिले के वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत भी इसमें नहीं है यह स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता वरना इतनी बड़ी गड़बड़ी और शासकीय राशि का दुरुपयोग खुलेआम इस तरह संभव नहीं होता।
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