- कांग्रेस जिलाध्यक्ष कोरिया ने पत्र लिखकर पूरे मामले में पार्टी की तरफ से किया किनारा
- विपक्ष के साथ बैठकर कांग्रेसी नेताओं ने दिनभर किया जनपद सीइओ का विरोध,तालाबंदी का भी किया प्रयास
- कई दिनों से सोशल मीडिया पर भी विरोध की सूचना भेज रहे थे सत्ताधारी दल के नेता
- कांग्रेसियों के आंदोलन को देर शाम कांग्रेस ने ही नकारा, आगाज किया कांग्रेसियों ने, समय बीतने पर भाजपा ने किया आंदोलन को हाईजैक
- क्या आंदोलन पर भाजपा का रंग चढ़ने के बाद कांग्रेसी सिपहसालार अधिकारी पर कार्यवाही को देंगे समर्थन?
- दिनभर जिला कांग्रेसी प्रवक्ता देते रहे बयान,शाम होते होते जिला कांग्रेस ने आंदोलन से किया खुद को अलग
- कांग्रेस पार्टी आंदोलन में शामिल कांग्रेसियों से ले सकती है जवाब,जारी कर सकती है कारण बताओ पत्र:सूत्र
–रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 12 जनवरी 2023 (घटती-घटना)। कोरिया जिले में सत्ताधारी दल कांग्रेस के ही नेताओं ने बैकुंठपुर जनपद पंचायत के सीइओ को हटाने ऐसा आंदोलन किया लगा जैसे कांग्रेस पार्टी के लोग आज भी खुद को विपक्ष मान रहें हैं और वह सरकार और सरकारी तंत्र से इस कदर परेशान हैं जैसा की विपक्ष परेशान हो और उनकी कहीं कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
बैकुंठपुर जनपद पंचायत के समाने 11 जनवरी को हुआ प्रदर्शन अपने आप में अनोखा प्रदर्शन रहा जहां मुर्दाबाद के नारे भी लगे और सत्ताधारी दल के नेता प्रशासन के सामने इस तरह नजर आए जैसे वह विपक्षी दल हों। दिनभर जारी आंदोलन में भाजपा ने भी अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने की पूरी कोशिश की और वह सफल भी रहे वहीं सत्ताधारी दल के नेताओं सहित भाजपा नेताओं को इस तरह पूरे आंदोलन के दौरान देखा गया जैसे की सभी एक ही दल के हों और उन्हे सरकार और सरकारी तंत्र से काफी परेशानी है और वह अब बर्दास्त करने की स्थिति में नहीं हैं। कांग्रेस नेताओं के आंदोलन को देखकर वह भी विपक्षी दल भाजपा नेताओं के साथ का आंदोलन देखकर सभी ने यही माना की सरकार ने रहकर भी जब सत्ताधारी दल के लोग ही परेशान हैं और उनकी ही सुनवाई नहीं हो रही है तो आम लोगों की हालत समझी जा सकती है और उनकी कठिनाई किस कदर उनके सामने होगी यह भी समझा जा सकता है।
आंदोलन समाप्त होते ही कांग्रेस जिला अध्यक्ष ने जारी किया पत्र,आंदोलन से किया किनारा
जनपद सीइओ बैकुंठपुर को हटाने किए गए आंदोलन में कांग्रेस नेताओं ने जिस तरह से उग्र आंदोलन में भाग लिया या यह कहें आंदोलन को सफल बनाया उसे देखकर सभी ने यही माना की कांग्रेस नेताओं की अपनी ही सरकार में सुनवाई नहीं हो रही है और उन्हे मजबूरन आंदोलन करना पड़ रहा है और विरोध प्रदर्शन में विपक्षी दल के साथ मिलकर शामिल होना पड़ रहा है। कांग्रेसी नेताओं ने आंदोलन में भाग लिया या यह कहें कहीं न कहीं आंदोलन की पूरी रूपरेखा ही उन्ही की थी और उन्होंने आंदोलन सफल बनाया उसके बाद जैसे ही शाम हुई कांग्रेस जिला अध्यक्ष की चिट्ठी आ गई और उन्होंने पूरे आंदोलन से पार्टी को अलग बता दिया और आंदोलन से किनारा कर लिया। जिला अध्यक्ष कांग्रेस कोरिया ने पत्र जारी कर आंदोलन में शामिल कांग्रेसियों का मनोबल जरूर कमजोर करने का प्रयास किया लेकिन मनोबल कमजोर हुआ हो लगता नहीं है, कांग्रेस नेताओं के सोशल मिडिया पर जो कुछ देखने को मिला उसे देखकर पढ़कर यही समझ में आया की कांग्रेस नेताओं को आंदोलन पर गर्व है और पार्टी के आंदोलन से किनारा करने के निर्णय का उनपर कोई प्रभाव नहीं पड़ा है और उन्हे पार्टी के किनारा करने मामले से कुछ लेना देना भी नहीं है
आंदोलन का आगाज कांग्रेसियों ने किया,बाद में आंदोलन को भाजपा के नेताओं ने हाइजेक कर लिया
बैकुंठपुर जनपद सीइओ को हटाए जाने को लेकर जो आंदोलन किया गया उसका आगाज पहले तो कांग्रेसी नेताओं ने किया जमकर इसका प्रचार प्रसार भी किया लेकिन जैसे जैसे आंदोलन में समय बीतता गया आंदोलन भाजपा का होता दिखा और लगभग सभी भाजपा नेताओं की उपस्थिति आंदोलन में देखी गई। पूर्व मंत्री से लेकर भाजपा जिलाध्यक्ष साथ ही पार्टी के अधिकांश कार्यकर्ता आंदोलन में शामिल दिखे जिन्होंने आंदोलन को भाजपा मय बनाया। कांग्रेस नेताओं ने नारेबाजी में खुद को जहां अव्वल रखा और उग्रता का प्रदर्शन किया वहीं भाजपा संख्या में बेहतर दिखी और आंदोलन भाजपा अपनी सफलता में जोड़कर निकल गई।
आंदोलन में भाजपा के शामिल होने के बाद क्या जनपद सीइओ को बदलने में सत्ताधारी दल दिखाएगा रुचि
आंदोलन आपसी टकराव का नतीजा था एक ईमानदार अधिकारी जो गलत नहीं करने अड़ा हुआ है उसे हटाकर गलत का समर्थन करने का था और आंदोलन में सत्ताधारी दल के लोग भी शामिल थे जिन्हे सत्ता में रहकर आंदोलन का मार्ग नहीं चुनना था यह भी कहा जा सकता है वहीं विपक्षी दल भाजपा आंदोलन में पूरी ताकत के साथ खड़ी थी क्योंकि जनपद अध्यक्ष भाजपा समर्थित नेत्री हैं और यहां अपनी नेत्री के सम्मान में भाजपा का खड़ा होना जायज भी था और वह पूरे दमखम के साथ खड़ी भी हुई। आंदोलन सफल रहा क्योंकि संख्या अच्छी रही और पुलिस बल भी कई थानों से बुलाना पड़ा जो देखने को मिला। आंदोलन में प्रशासन की तरफ से सीइओ जनपद को हटाए जाने का आश्वासन मिला और उसी आश्वासन के बाद आंदोलन समाप्त किया गया जैसी की सूचना है। अब देखने वाली बात यह होगी कि क्या प्रशासन जनपद सीइओ बैकुंठपुर को सच में हटाता है या भाजपा के आंदोलन में मुख्य भूमिका में समाने आने के बाद वह जनपद सीइओ बैकुंठपुर मामले में कोई निर्णय नहीं लेता है और उन्हे पद में बने रहने देता है। कांग्रेस नेताओं की तरफ से भी क्या जनपद सीइओ को हटाए जाने का समर्थन किया जाता है या कांग्रेस नेता व जिम्मेदार जनप्रतिनिधि मामले में प्रशासन से सीइओ जनपद पंचायत बैकुंठपुर को फिलहाल नहीं हटाने निर्देश जारी करते हैं और मना करते हैं। वैसे जनपद सीइओ बैकुंठपुर को यदि हटाया जाता है तो पूरा श्रेय भाजपा को जायेगा भले ही कांग्रेस नेताओं की मौजूदगी आंदोलन में थी फिर भी यही माना जायेगा की सीइओ को हटाने में भाजपा का विरोध सफल रहा और मजबूरन प्रशासन को घुटने टेकना पड़ा।
आंदोलन में शामिल कांग्रेस नेताओं से मांगा जा सकता है आंदोलन में शामिल होने की वजह को लेकर जवाब
आंदोलन में शामिल नेताओं से कांग्रेस पार्टी संगठन स्तर पर जवाब मांग सकती है ऐसा भी बताया जा रहा है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष अपने उन नेताओं को नोटिश भेजकर जवाब मांग सकते हैं जो आंदोलन में शामिल थे और उन्होंने सरकार में रहकर ऐसा करने की बात पर जवाब लिया जा सकता है। पार्टी ने मामले को अनुशासन हीनता माना है और पार्टी इसे लेकर गंभीर है और पार्टी की छवि पर प्रतिकूल प्रभाव वाला मानती है ऐसा भी सूत्र बता रहें हैं।
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