- पुलिस विभाग में वाहन अधिग्रहण में कई अनियमितताएं, एक ही व्यक्ति की वाहन क्यों हो रही लगातार अधिग्रहित?
- अपराधों पर अंकुश लगाने वाले विभाग के टेबल के नीचे ही वाहन अधिग्रहण में चल रहा बड़ा खेल
- क्या पुलिस विभाग में वाहन अधिग्रहण करने के लिए निविदा नियम नहीं?
- क्या निजी उपयोग की वाहन को किया जा सकता है अधिग्रहण या व्यवसायिक रूप से पंजीकृत वाहनों का ही होना चाहिए अधिग्रहण?
–रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 19 दिसम्बर 2022 (घटती-घटना)। पुलिस का मूल कर्तव्य कानून व्यवस्था व लोक शांति व्यवस्था को स्थापित रखना तथा अपराध नियंत्रण व निवारण तथा जनता से प्राप्त शिकायतों का निस्तारण करना है। समाज के समस्त वर्गों में सद्भाव कायम रखने हेतु आवश्यक प्रबंध करना, महत्वपूर्ण व्यक्तियों व संस्थानों की सुरक्षा करना तथा समस्त व्यक्तियों के जान व माल की सुरक्षा करना है पर क्या पुलिस अपने कर्तव्यों का निर्वहन निष्पक्ष तरीके से कर पा रही है? कोरिया जिले में कानून व्यवस्था के लिए काम करने वाली पुलिस विभाग के टेबल के नीचे एक बड़ा फर्जीवाड़ा का खेल चल रहा है वह फर्जीवाड़ा है वाहन अधिग्रहण का, वाहन अधिग्रहण को लेकर कई लोगों ने सूचना के अधिकार के तहत जानकारियां निकाली है किसी को जानकारी मिली है तो किसी को नहीं मिली पर जो सूत्रों का मानना है कि सबसे बड़ा यहां पर अनियमितता हो रही है वाहन अधिग्रहण में तो बिना निविदा के वाहनों का अधिग्रहण करना पुलिस विभाग में सब कुछ सेटिंग से चल रहा है, जिसकी सेटिंग तगड़ी है उसकी वाहन अधिग्रहित हो जाएगी और बिल निकालने में जो पुलिस का सहयोग करेगा और बात बाहर नहीं जाएगी उसकी वाहन अधिग्रहित हो जाएगी पर अधिग्रहण करने के दौरान पुलिस कुछ ऐसी गलती भी कर रही है जो कहीं ना कहीं अपराध की श्रेणी में आता है, वह गलती है वाहन दस्तावेजों की अनदेखी, पुलिस वाहन अधिग्रहण करने से पहले वाहनों का बिना दस्तावेज जांचे उसे किराए पर अधिग्रहित कर रही है, जबकि पुलिस यह भूल गई कि किराए पर वाहन अधिग्रहित करने के लिए व्यवसायिक में पंजीकृत वाहनों का ही अधिग्रहण होना चाहिए पर निजी में पंजीकृत वाहनों का अधिग्रहण कर पुलिस की बाी लगा उसी वाहन में घूम रहे हैं, पुलिस के कई अधिकारी ना जाने उन्हें इस बात की जानकारी है या नहीं पर जानकारों का मानना है इस प्रकार का कृत्य अपराध की श्रेणी में आता है।
सफेद नंबर प्लेट वाली वाहन पुलिस विभाग में दौड़ रही किराए पर
जिले के पुलिस विभाग में सफेद नम्बर प्लेट की वाहने विभागीय अधिकारियों को लेकर सड़कों पर दौड़ रही है, जबकि वाहने पीले नम्बर प्लेट की होनी चाहिए जो अधिग्रहण नियम के अनुसार होना चाहिए, पूरे मामले में कौन इस पूरे मामले में नियमो की अनदेखी कर रहा है यह तो सपष्ट नहीं है लेकिन जानकारों की माने तो यह बड़ी गलती है और यह नियमो के विरुद्ध है। सूत्रों की माने तो कई जिलों में निविदा के तहत वाहने अधिग्रहित की गई हैं, सरगुजा संभाग के कई जिलों में बिना निविदा के ही वाहनों को किराए पर लगाया जा रहा है, उसमें भी सबसे बड़ा सवाल यह है कि वाहन भी जो विभाग को लगानी है उसका पंजीयन व्यवसायिक में होना चाहिए पर बिना व्यवसायिक पंजीयन वाली वाहने भी धड़ल्ले से विभाग में पुलिस की बत्ती लगाकर दौड़ रही है, कुछ ऐसे ही वाहनों की तस्वीर भी सामने आई है जिसमें रजिस्ट्रेशन बता रहे हैं कि वाहने व्यवसायिक पंजीयन कि नहीं नहीं सफेद नंबर प्लेट वाली वाहने हैं, जिसमें पुलिस की बत्ती भी ऊपर लगी हुई है अब यह वाहन किसने लगाया कैसे लगी यह जांच का विषय है।
वाहन मालिक कोई और भुगतान किसी और को
पुलिस विभाग में जो वाहने अधिग्रहित कर चलाई जा रहीं हैं इसमे भी बड़ा खेल है,गाडि़या किसी और कि चल रहीं हैं और भुगतान किसी और के नाम पर हो रहा है। बताया जाता है कि सबुकछ सेटिंग से चल रहा है और विभाग में वाहन केवल कुछ लोगों की ही मर्जी से अधिग्रहित हो रहीं हैं और वही लोग अपने अपने पसंद से जिसके नाम से भुगतान लेना होता है ले रहें हैं,कुलमिलाकर सिंडिकेट की तरह वाहन अधिग्रहण का एक गैंग सक्रिय है जो किसी और को वाहन लगाने देने में अड़ंगा लगाता है।
छत्तीसगढ़ के कई जिलों में वाहन अधिग्रहण के लिए निविदा निकाली गई,प्रथम भाग के लगभग जिलों में बिना निविदा के ही दौड़ रही हैं वाहिनी कैसे
प्रदेश के अन्य जिलों की बात की जाए तो सभी जगह निविदा के माध्यम से सार्वजनिक निविदा के माध्यम से वाहन अधिग्रहण की गईं हैं जबकि प्रदेश के ही कोरिया जिले में जो प्रदेश के प्रथम जिले होने का गौरव भी रखता है में वाहन अधिग्रहण मामले में निविदा निकली ही नहीं जो बहोत बड़े बंदरबांट को साबित करता है।
छत्तीसगढ़ के पुलिस विभाग में भी वाहन अधिग्रहण में यदि ईडी छापामारे तो बहुत बड़ा घोटाला आ सकता है सामने
पुलिस विभाग छत्तीसगढ़ में भी वाहन अधिग्रहण मामले में यदि ईडी की छापेमारी हो तो बड़े घोटाले के सामने आने का अनुमान है। पुलिस विभाग में लगातार वाहन अधिग्रहण किया जाता रहता है वीआईपी मूवमेंट के दौरान भी और सामान्य परिस्थितियों में भी विभाग वाहनों का अधिग्रहण करता रहता है और इसमे जमकर फर्जीवाड़ा होता रहा है, अब यदि उच्च स्तर की जांच हो तो जरूर सच्चाई सामने आएगी और जो बड़े घोटाले के रूप में सामने आएगी।
खेल को जानने के लिए जिम्मेदारों को लगाया गया फोन तो मोबाइल हो गया स्विच ऑफ
वाहन अधिग्रहण के नियम जानने के लिए कोरिया जिले के एमटीओ जनक तिवारी को फोन लगाकर जानने का प्रयास किया गया कि आखिर इसके नियम क्या है और किस प्रकार की वाहने लगाई जाती हैं, जिस पर उन्होंने फोन तो उठाया पर सिर्फ इतना ही बताया कि टूर एंड ट्रेवल्स एजेंसी कि वाहने अधिकृत की जाती है इसके बाद उन्होंने फोन काटा और फोन स्विच ऑफ हो गया, फिर दोबारा उनसे बात नहीं हो पाई, इसके बाद रक्षित केंद्र के आरआई साहब को भी फोन लगाया गया पर उन्होंने भी फोन काट दिया जिस वजह से संबंधित मामले किस संबंध में पूरी बात नहीं हो पाई।
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