क्या राजनीति को पोषण अवैध कारोबार एवम कारोबारियों से ही मिल रहा है?
–रवि सिंह –
बैकुण्ठपुर 10 नवम्बर 2022 (घटती-घटना)। आज राजनीति को पोषण अवैध कारोबार एवम कारोबारियों से ही मिल रहा है यह सौ टके सही बात है जहां वहीं भ्रस्टाचार को आज शिष्टाचार बना दिया गया है और उसी अनुरूप व्यवस्था संचालित है। किसी की भी सरकार क्यों न बन जाये अवैध कारोबार और भ्रष्टाचार किसी के लिए समाप्त करने वाला काम नहीं होता बशर्ते चुनावी घोषणापत्र व वचन पत्र में एक दूसरे को पछाड़ने यही मुद्दा राजनीतिक दल जनता के सामने रखते हैं और इसका समूल नाश करने की बात करते हैं।
अवैध कारोबार और भ्रष्टाचार को किस तरह राजनीतिक संरक्षण मिल रहा है इसका जीवंत उदाहरण है कि आज कानून से ऊपर है यह दोनों काम और इसे करना कहीं से गुनाह नहीं है और यह व्यवहार में शामिल हो चुका है लोगों के और हर कोई अब सरलता से संपन्न बनने राजनीतिक संरक्षण में जा रहा है और वहीं से या तो अवैध कारोबार के लिए आशीर्वाद ले रहा है या फिर भ्रस्टाचार के लिए। समाचार पत्रों सहित खबरों का भी असर इस पूरे मामले में नहीं पड़ रहा है क्योंकि शायद ही प्रशासनिक कोई तंत्र हो जो इससे अछूता हो, सभी को जल्दबाजी है खुद की संपन्नता के लिए और उसी अनुरूप वह अवैध कारोबार और भ्रष्टाचार में लिप्त होते जा रहें हैं और शासन प्रशासन के साथ मिलकर इसको अंजाम दे रहें हैं। पहले क जमाने मे भ्रस्टाचार और अवैध कारोबार जहां शर्म की बात हुआ करती थी आज वहीं इसको बड़े सम्मान से अपनाया जाता है और इसमें शामिल होने में किसी को झिझक नहीं होती।
पुराने जमाने की फिल्मों के दृश्य के तरह हो रहा अवैध कारोबार व भ्रष्टाचार
कभी पुराने जमाने की फिल्मों में भी दिखाया जाता था कि एक आरोप भ्रष्टाचार का जान देने का सबब बन-जाता तथा लोग अपनी ही नजर में गिर जाया करते थे आज गर्व से अवैध कारोबार और भ्रष्टाचार में लोग लिप्त हैं और समाज मे सम्मान भी ज्यादा ही प्राप्त कर रहें हैं। प्रदेश में भी अमूमन यही हाल है आज पद का महत्व नहीं है भ्रष्टाचार के लिए अवसर महत्वपूर्ण है वहीं अवैध कारोबार का ऐसा चलन जारी है कि इसे रोकने का जिम्मा सम्हाल रहे लोग ही अब इसमें बराबर के भागीदार हैं और रात के अंधेरों के सौदागरों के लिए वह मार्ग प्रसस्त करने वाले सिपाही हैं, जितनी सेवा जितनी सजगता आम व्यक्ति तक सुकून और चैन अमन पहुंचाने की जिम्मेदारों को मिली हुई है उसकी बजाय वह उनके लिये रास्ता साफ कर रहें है जो कहीं न कहीं समाज का ही हक़ लूट रहें हैं। कानून व्यवस्था तो जैसे अवैध कारोबारियों के घर की रखवाली के लिए बनी हो क्योंकि कानून का जिम्मा सम्हालने वालों को कब कहाँ होना है यह वह तय करते हैं जो अवैध कारोबार करते हैं। अतिरिक्त लाभ की लालसा इस कदर हावी हो चुकी है कि चोरों की बोली में कंधे पर सितारे लगाए लोग बिक जा रहें हैं जिन्हें कभी गर्व था कि वह कानून के रखवाले हैं।
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