रायपुर, 02 नवम्बर 2022। राज्योत्सव के दूसरे दिन राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव मे पहुचे कलाकारो मे शामिल हुए तेलगाना के कलाकारो ने लबाड़ी नृत्य प्रस्तुत किया। लबाड़ी तेलगाना के नालगोडा जिले मे किया जाता है। लबाड़ी नृत्य नालगोडा के बजारा समुदायो द्वारा किया जाता है। इस नृत्य के माध्यम से बजारा लोग अपनी जीवनशैली का प्रदर्शन करते है।
लबाड़ी नृत्य को करने वाली महिला कलाकार तेलगाना का प्रसिद्ध घाघरा-चोली पहनती है। पारपरिक रूप से ये महिलाए पैरो मे गज्जल यानी कि घुघरू, गले मे कटल (माला) और हाथो मे सफेद रग का चूड़ी पहनती है। ये चूड़ी हाथी दात के बने होते है। इन्हे गाजरू कहा जाता है।
बता दे अपनी बारी का इतजार कर रहे तेलगाना के इन कलाकारो ने छत्तीसगढ़ मे आयोजित आदिवासी नृत्य महोत्सव से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। तेलगाना के नालागोडा जिले से पहुचे इन कलाकारो के टीम लीडर सी एच नागार्जुन ने कहा कि पहली बार आदिवासियो को इतना बड़ा मच देना सम्मान की बात है, मुझे छत्तीसगढ़ आकर खुशी हो रही है। भारत के दूसरे राज्यो को भी ऐसा कुछ करना चाहिए।
“उन्होने कहा कि छत्तीसगढ़ मे आकर उन्हे अच्छा लग रहा है। ऐसा पहला मौका है जब उन्हे दूसरे राज्यो और देश के कलाकारो के कला के बारे मे जानने का अवसर मिल रहा है। आदिवासी कलाकारो को मौका देने का यह एक अच्छा माध्यम है। बहुत कम होता है कि आदिवासियो को मौका मिले। वेस्टर्न कल्चर की वजह से आदिवासी कला सस्कृति सिमट रही थी। जिनके सरक्षण का काम छत्तीसगढ़ सरकार कर रही है।”
छत्तीसगढ़ सरकार का धन्यवाद देते हुए नागार्जुन ने कहा कि हर ग्रामीण, हर आदिवासी को मौका मिलना चाहिए।
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