-राजा मुखर्जी-
कोरबा 22 अक्टूबर 2022 (घटती-घटना)। जिले के कटघोरा क्षेत्र में अहिरन नदी का सीना चीर कर रेत की चोरी धड़ल्ले से दिनदहाड़े बदस्तूर जारी है। मौजूदा तस्वीर ग्राम डुड़गा से होकर बहने वाली अहिरन नदी की है, जहां नदी के किनारे और बीच में दर्जन भर ट्रैक्टर लगाकर रेत खोदी जा रही है। बेतरतीब तरीके से खोदी जा रही रेत के कारण बनने वाले गड्ढे छोटे-बड़े हादसे का सबब कब बन जाए कोई नहीं बता सकता। अपने मतलब के लिए नदी को नुकसान पहुंचा रहे लोगों के द्वारा सरकार को राजस्व की हानि तो पहुंचाई जा रही है साथ ही चोरी भी कर रहे हैं जिस पर किसी तरह की पुलिस/प्रशासनिक कार्यवाही नहीं होती माइनिंग अमला वैसे भी इस क्षेत्र में होने वाली खनिज संबंधी अवैधानिक गतिविधियों से या तो जानबूझकर अनजान है या फिर उसे खबर ही नहीं लगती। पर्यावरण विभाग को तो और भी मतलब नहीं जबकि नदी को इस तरह से नुकसान पहुंचाना एनजीटी के निर्देशों का खुला उल्लंघन है। इस नदी से रेत खोदने की वैधानिक अनुमति भी नहीं लेकिन जिस तरीके से यहां से रेत लगातार निकाली जा रही है उससे यह तो स्पष्ट है कि कहीं न कहीं संबंधित लोगों को अच्छा खासा संरक्षण प्राप्त है। बताया जा रहा है कि स्थानीय ग्रामीणों ने रेत चोरी के कार्य में लगे लोगों को कई बार मना भी किया और विरोध भी जताया लेकिन उन्हें ट्रैक्टर के नीचे कुचल देने, दुर्घटना कर देने या अंजाम भुगतने की धमकी देकर भयभीत और चुप करा दिया जाता है अहिरन नदी के इस तरफ डुड़गा और उस तरफ कसनिया गांव है। कई ग्रामीण और मजदूर वर्ग के लोग जो इस पार से उस पार काम करने के लिए जाते हैं, वे अक्सर शॉर्टकट रास्ता होने के कारण नदी को पार करते हैं। नदी काफी गहरी नहीं है इसलिए आसानी से पैदल पार हो जाते हैं, लेकिन अभी जिस तरीके से रेत की खुदाई अंधाधुंध की जा रही है उससे अब नदी पार करने वालों की जान पर खतरा उत्पन्न होने की संभावना बढ़ गई है। सम्बंधित विभागों द्वारा सख्त कार्यवाही का नहीं किया जाना रेत चोरों के मनोबल को बढ़ाने के लिए पर्याप्त है।
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