रायगढ़, 18 अक्टूबर 2022। शहर मे कोई आयोजन जैसे जन्मदिन, विवाह, दशकर्म व ऐसा कार्यक्रम जहा भोजन की व्यवस्था हो और वह बच गया हो तो लोग अब उसे फेकते नही गरीब और जरूरतमदो के बीच बाटकर उनके चेहरो पर खुशी और जरूरत को पूरा कर रहे है। उन्हे इस अन्नदान के पुण्य का भागी बना रहे है रोटी बैक जो शहर के युवाओ का समूह कार्निल चार्जर्स की मुहिम है। रोटी बैक ने बीते दो सालो से बचे हुए खानो को जरूरतमदो तक पहुचाने का बीड़ा उठाया है। सिर्फ बचे हुए खाने नही लोग अब उन्हे अपने परिजनो के जन्मदिन, पुण्यतिथि इत्यादि मे गर्मागर्म भोजन बनवाकर बटवा रहे है।
बीते साल की तरह इस बार भी कार्डिनल चार्जर्स ने दीवाली त्यौहार को गरीब-जरूरतमदो-अनाथ आश्रम-वृद्धा आश्रम मे मनाने की ठानी है। इसके लिए भी सस्था ने लोगो से सहयोग की अपील की है। ताकि वह अधिक से अधिक लोगो के चेहरे पर दीवाली के दिन खुशिया बिखेर सके।
सस्था के अध्यक्ष अरूण उपाध्याय ने बताया “दीवाली के दिन घर किसी घर मे इसकी खुशिया महके। गरीब-वचितो के लिए हम लगातार खाना पहुचाते रहे है तो दीवाली मे उन्हे क्यो छोड़ दे। शहर के कई लोगो ने हमारी मुहिम को सराहा है फिर चाहे वह डॉक्टर, नेता, पत्रकार, आमोखास कोई भी हो। सभी ने वीडियो सदेश बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया है लोगो का अच्छा रिस्पास आ रहा है यह हमारे विश्वास को और बढ़ाता है। रायगढ़ दानवीरो की नगरी है। जिनके पास अतिशेष कपड़ा, मिठाई, पटाखे या फिर जो स्वेच्छा से दान करना चाहते है उनके लिए बस हम एक जरिया है। लोग 21 अक्टूबर तक हमे सामान दे सकते है फिर 22 से हम इसे बाटना शुरू करेगे। “
विदित हो कि लॉकडाउन की दूसरी लहर मे कार्डिनल चार्जर्स ने कोई भूखा न रहे नाम से मुहिम चलाई थी। निःशुल्क 400 लोगो को प्रतिदिन भोजन की व्यवस्था 51 दिन तक कराई थी। इनकी इस मुहिम मे शुरुआत मे सदस्यो ने अपना पैसा लगाया, जैसे ही इसके बारे मे लोगो की पता चला लोग इनकी मदद को आगे आने लगे। फिर अत मे एक बार फिर सदस्यो ने आपस मे चदा कर मुहिम तो तब तक जारी रखा जब तक सक्रमण दर कम न हो गई।
अब यह ग्रुप रोटी बैक के माध्यम से जरूरतमद और गरीबो के बीच आपके शेष भोजन को पहुचा रहा है। कार्डिनल चार्जर्स के निर्मल जाना बताते है कि हमने सोशल मीडिया के माध्यम से हर घर मुस्कान वाली दिवाली का प्रचार किया था अब लोगो का अच्छा रेस्पास आ रहा है। कोई हमारे पास आकर सामान दे रहा है तो किसी के पास टीम जा रही है। लोग पटाखे, मिठाई, नए और पुराने कपड़े अपनी स्वेच्छा से दे रहे है।
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