अम्बिकापुर,27 सितम्बर 2022 (घटती-घटना)। शिव शक्ति का आध्यात्मिक, अलौकिक रहस्य को दर्शाते हुये शारदीय नवरात्रि के पुनीत पावन अवसर पर गत वर्षों क भांति इस वर्ष भी प्रजापित ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विष्व विद्यालय द्वारा चोपड़ापारा में जीवंत चैतन्य देवियों का भव्य एवं मनोरम झांकी का आयोजन किया गया। झांकी के प्रथम दिवस अध्यक्ष प्रेस क्लब अम्बिकापुर श्री त्रिलोक कपूर कुशवाहा जी, पूर्व पार्षद एवं कॉन्ट्रेक्टर श्री प्रकाष राय जी, रिटायर्ड इंजीनियर श्री सुरेन्द्र दुबे जी, शासकीय हाई स्कूल बोझा प्रिंसिपल श्री संतोष भारती जी, मेडिकल स्पेषलिस्ट डॉ मंजू शर्मा जी, ग्रामीण कृषि विस्तार अधिकारी श्रीमती सोमप्रभा भारती जी एवं सरगुजा संभाग की सेवाकेन्द्र संचालिका बी. के. विद्या दीदी एवं ब्रह्माकुमारी भाई- बहनों ने द्वीप प्रज्जवलित कर शुभारम्भ किया।
ध्वनि एवं प्रकाष से सुसज्जित व मधुर संगीत के साथ चैतन्य देवियों की झाँकी हर किसी को अपनी ओर आकर्षित कर रही है। झांकी में सर्वप्रथम ब्रह्माकुमारी निराली छटा लिये सूर्य से निकलती है। तत्पष्चात् क्रमषः दुर्गा, लक्ष्मी, गायत्री, काली, सरस्वती, वैष्णवी एवं उमा सुरम्य पहाडियों से उदित होती है। अध्यक्ष प्रेस क्लब अम्बिकापुर श्री त्रिलोक कपूर कशवाहा जी ब्रह्माकुमारी संस्था द्वारा लगाये गये चैतन्य देवियों की सराहना करते हुये कहा कि ये झांकी काफी वर्षो से लगाया जाता है जिसे देखने के लिये भारी संख्या में लोग आते है तथा ये जीवंत चैतन्य देवियों की झांकी समाज कल्याण के लिये बहुत ही अच्छा संदेश देती है।
इस पावन अवसर पर सरगुजा संभाग की सेवाकेन्द्र संचालिक ब्रह्माकुमारी विद्या दीदी षहर वासियों को नवरात्रि की शुभकामनायें देते हुये कहा कि नवरात्रि में देवियों की पूजा होती है जिनको शिवशक्ति के रूप में पूजा जाता है। जब पूरे संसार में अज्ञानता की कालिमा छा जाती है और मानव काम, क्रोध, लोभ, मोह और अंहकार रूपी विकारों के वषीभूत हो जाते है तथा जाने- अनजाने में गलत कार्य करते है, तो सारे संसार में तमोप्रधानता की स्थिति आ जाती है। तब परमात्मा षिव धरा पर अवतरित होकर स्वयं माताओं एवं बहनों के सिर पर ज्ञान का कलश रखकर इस नारर्कीय सृष्टि को स्वर्ग बनाते है। यही मातायें- बहनें अपने अंदर की दिव्यता और षक्तियों को जागृत कर तथा देवियों के रूप में हर मनुष्य आत्माओं में सरस्वती बनकर ज्ञान का प्रचार करती है, ज्ञान के द्वारा लोगों के जीवन को आनन्दमय बनाती है, गायत्री बनकर लोगों के मन को हर्षाती है, दुर्गा बनकर लोगों के दुर्गुणों को दूर करती है, वैष्णव बनकर विकारों रूपी विषयों को मिटाती है, लक्ष्मी बनकर ज्ञान धन बरसाती है, उसी का प्रतीक नवरात्रि का पर्व मनाते है।
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