-उपेश सिन्हा-
कुसमी ,25 सितम्बर 2022 (घटती-घटना)। बलरामपुर जिले के आदिवासी अंचल के एक गांव में माँ समलाया का बहुत ही प्राचीन मंदिर है और यह मंदिर कब का है यह कोई नही जानता ,दरसल यह मंदिर कुसमी ब्लाक मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर की दुरी पर स्थित मदगुरी ग्राम में है,और गांव वाले बड़ी धुमधाम से हर वर्ष माता की पूजा अर्चना नवरात्र के अवसर पर करते है पीढ़ी दर पीढ़ी गांव के लोग पुजा अर्चना करते आ रहे है लेकिन यहाँ के स्थानीय लोगो को यह नही पता है कि मंदिर कबका है और कौन मंदिर की स्थापना किया है ,लोग बस यह आकलन करते है कि यह राजा महाराजा के जमाने का मंदिर है।और स्थानीय लोगो का मानना है कि माता के मंदिर में लोगो की हर मुराद पुरी होती है नवरात्र के दिनों गांव के लोग बड़े उत्साह के साथ माता की पूजा अर्चना करते है और माता के भक्ति में लोग लीन रहते है, गांव के अशोक सोनी का यह कहना है कि माता रानी की इस गांव में इतनी कृपा हुई है कि मदगुरी गांव में आजतक हाथियों का दल नुकसान नही पहुँचाया है गांव के आसपास तक हाथियों का दल पहुँचा लेकिन मदगुरी गांव तक नही पहुँचा जो माता रानी की गांव में कृपादृष्टि की वजह से ऐसा माना जाता है,वही मंदिर के बारे में बताया जाता है कि पहले बहुत छोटे आकार में मंदिर था फिर कुछ साल पहले गांव के लोगों ने मिलकर मंदिर का निर्माण करवाया और इस साल नवरात्र के अवसर माता रानी के विधिवत पुजा अर्चना के साथ भक्तों ने भंडारे का भी आयोजन रखा है,माता रानी के मन्दिर में नवरात्र पर्व को धुमधाम से मनाने की तैयारी कार्य में कृष्ण मुरारी सोनी,अशोक सोनी,दुर्गा प्रसाद कुशवाहा,गांव के सरपंच करमचंद मुंडा गणेश यादव धर्मेन्द्र सोनी,महेश्वर मुंडा, सतपाल सिंह,सदानन्द कुशवाहा सहित अन्य गांव के लोग कार्य मे जुटे हुये है सोमवार से नवरात्र पर्व की शुरूवात हो रही है ।
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