- अविभाजित कोरिया के पुलिस अधीक्षक नाकाम रहे दो पुलिस थानों के थाना प्रभारी को बदलने में।
- अंतिम तबादला सूची से भी थाना प्रभारी रहे बाहर,अब तो सिर्फ मुख्यमंत्री से उम्मीद।
- सोशल मीडिया में भी मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी की होने लगी किरकिरी, फिर भी सत्ता की मेहरबानी से बने रहेंगे थानेदार।
- कोरिया के कई एसपी बदल गए पर नहीं बदल पाए तो उन थानों के थानेदार जहां पर उनकी चलती है हुकूमत।

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 08 सितम्बर 2022 (घटती-घटना)। अविभाजित कोरिया जिले के कुछ थाना प्रभारियों पर मेहरबानी अंत तक बरसती रही है, आखिर किसकी मेहरबानी पर शिकायतों के बावजूद लोगों को प्रताçड़त करने के बावजूद दो पुलिस थानों में थानेदार पद पर लगातार बने हुए हैं, दो थानेदार, वह भी बतौर उप निरीक्षक निरीक्षकों की उपस्थिति भी उन थानेदारों की थानेदारी को नहीं छीन पाई, दो एक ही बैच के उप निरीक्षक जो निरीक्षक के सूची में शामिल है जो अभी निरीक्षक बने नहीं है और बनने की प्रबल संभावना है क्योंकि अंतिम सूची में इनका नाम शामिल कर लिया गया है, जो कभी भी निरीक्षक बन सकते हैं एक कोरिया जिले में रहेंगे तो दूसरे नवीन जिला एमसीबी में अपनी थानेदारी करेंगे, अब ऐसे में सवाल यह है कि दोनों उप निरीक्षक काफी लंबे समय तक एक ही थाने में थानेदारी कर चुके हैं, इनके एक ही थाने में रहते हुए इनके पुलिस कप्तान कई बदल गए पर नहीं बदले तो इन थानों के थाना प्रभारी और ना बदलने की इनकी संभावना भी प्रबल है क्योंकि कहा जाता है कि इनकी पहुंच सीएम हाउस तक है और तरह तरह के कई अफवाहें इनके द्वारा फैलाई गई जो पूरे जिले में चर्चा का विषय है, इस समय तो इनकी शिकायतों को लेकर भी तमाम अधिकारी इनसे परिचित है, इसके बावजूद इन्हें हटा पाने में वर्तमान कोरिया पुलिस अधीक्षक भी नाकाम रहे, जिसके पीछे क्या प्रभाव है इसका तो पता नहीं पर नव पदस्थ पुलिस अधीक्षक भी अविभाजित कोरिया की एक नहीं 3-4 सूचियां तबादले के निकाल लिए पर उन सूची में भी इनका नाम शामिल ना रहा अंतिम सूची में तो एक नहीं तीन बार फेरबदल होने की बात कही गई और यह फेरबदल एक ही दिन में तीन बार क्यों हुई यह भी एक बड़ा सवाल है?
एक आरक्षक ने तो बहुत बड़ा आरोप भी तबादले सूची को लेकर लगा दिया गया, क्योंकि वह जिस जिला के निवासी हैं उस जिला से उसे स्थानांतरित कर नवीन जिले में भेजा जा रहा है जिसे लेकर उसने सोशल मीडिया में अपनी नाराजगी जताई और कई तरह के आरोप भी लगा दिया है, अब फिर से अधिकारी उससे खफा रहेंगे पर आखिर इनके बातों पर गौर किया जाए तो कहीं न कहीं इनके बातें भी सही हैं आखिर नवीन जिला पर उनका स्थानांतरण करना कहां तक उचित है इसका तो पता नहीं। क्योंकि पुलिस विभाग से जारी आदेश जो जारी हुआ था उसमें नवीन जिले में स्वेक्षा से जाने का जिक्र था और यदि शिकायत करने वाले आरक्षक की बात मानी जाए तो ऐसा न जोकर जबरन नवीन जिले में जाने मजबूर किया जा रहा है।

मनेंद्रगढ़ थाना प्रभारी की कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर भी डाली जा रही पोस्ट
यदि मनेंद्रगढ़ पुलिस थाने के दो सालों से थानेदारी कर रहे उपनिरिक्षक की बात की जाए तो आजकल उनकी दोषपूर्ण कार्यप्रणाली को लेकर सोशल मीडिया पर भी पोस्ट डाले जा रहें हैं,कुछ पोस्ट मनेंद्रगढ़ थाना अंतर्गत अवैध मादक पदार्थों की बिक्री को लेकर डाले जा रहें हैं जिसमें थानेदार पर आरोप लगाए जा रहें हैं,ऐसे में सवाल उठता है की आम लोगों की सोशल मीडिया पोस्ट देखकर ही सही आखिर क्यों पुलिस अधीक्षक ऐसे थाना प्रभारियों पर कार्यवाही नहीं करते हैं और उनका तबादला नहीं करते हैं जबकि उनका कार्यकाल भी दो सालों से ज्यादा का हो चुका है।
पुलिस थाना पटना क्षेत्र में भी अवैध कारोबार पर दो सालों से नहीं लगा सके थानेदार अंकुश
जिले के पटना पुलिस थाना अंतर्गत भी दो सालों से अवैध कारोबारों पर अंकुश लगा पाने में थानेदार सफल नहीं हो सके, क्षेत्र में जबसे वर्तमान थानेदार के रूप में उप निरीक्षक की पोस्टिंग हुई है तबसे क्षेत्र में जारी अवैध कारोबार और अधिक फल फूल रहा है और थानेदार द्वारा आम शिकायत करने वालों के साथ भी मुँहदेखी की जाती है। लगातार समाचारों में भी पुलिस थाना पटना के थानेदार की कार्यप्रणाली को लेकर समाचार छपने के बावजूद उन्हें भी तबादला सूची से बाहर रखा गया जो एक बड़ा प्रश्न है।
संयुक्त कोरिया जिला बंटा दो भागों में फिर भी नहीं बदले जा सके तो पुलिस थानों के थानेदार
संयुक्त कोरिया जिला दो भागों में बंट गया फिर भी संयुक्त जिले के दो पुलिस थानों के थानेदार नहीं बदले जा सके,कई पुलिस अधीक्षक इस बीच जिले में आते रहे जाते रहे लेकिन दो थानेदार अंगद की पैर की तरह डटे हुए हैं, आखिर किसकी इनपर मेहरबानी बनी हुई है यह तो पता नहीं लेकिन माने तो इनकी पकड़ ऊंची है।
एकबार फिर मुख्यमंत्री से हो सकती है इनकी शिकायत
माना जा रहा है कि जिला मुख्यालय के उद्घाटन पर मनेंद्रगढ़ आ रहे मुख्यमंत्री के समक्ष दोनों थानेदारों की शिकायत हो सकती है। दोनों की ही कार्यप्रणाली को लेकर नाराज लोग मुख्यमंत्री से मिलकर इनकी शिकायत कर इन्हें हटाने की मांग कर सकते हैं।
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