- सब देखा पर कोरिया के विभाजन जैसा विभाजन कहीं नहीं दिखा।
- असंतुलित विभाजन प्रदेश के मुखिया के लिए भी गले की फांस जैसी साबित हो रही।
- हठधर्मी की तरह विभाजन कभी भी सही नहीं होताःजनता।
- जिला की सीमा तय नहीं पर कार्यालय उद्घाटन की तैयारी पूरी, काफी महत्वपूर्ण आखिर क्यों?
- कोरिया के असंतुलित विभाजन पर चहुंओर उपजा असंतोष फिर भी कोई फर्क नहीं।
- सरकार के प्रति दिख रही नाराजगी, चुनाव पर पड़ड़ेगा असर,बैकुंठपुर समेत चिरमिरी में हुआ जबरदस्त विरोध।
- बचरापोंड़ड़ी क्षेत्र को लेकर असमंजस बरकरार,आनन-फानन में हुआ तहसील का गठन।
- चिरमिरी नगरनिगम के कुछ वार्डो को लेकर भी असमंजस, विकासखंड का बंटवारा छत्तीसगढ सरकार के बस में नहीं।

-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 06 सितम्बर 2022 (घटती-घटना)। हम सभी ने अपने देश के विभाजन को देखा, अपने देश के अंदर कई राज्यों के विभाजन को देखा और राज्यों के अंदर कई जिले के विभाजन को भी देखा पर सभी विभाजनों का आकलन किया जाए तो कभी भी ऐसा विभाजन नहीं हुआ जिससे समस्या उत्पन्न हो जाए, कुछ ऐसा ही कोरिया जिले के विभाजन में देखने को मिल रहा है। देश के विभाजन में जहां एक छोटा टुकड़ा पाकिस्तान और बांग्लादेश को मिला तो वही राज्यों के विभाजन की बात की जाए तो मध्यप्रदेश से विभाजित होकर एक छोटा सा टुकड़ा छत्तीसगढ़ को मिला, बिहार से टूटकर एक छोटा सा टुकड़ा झारखंड बना, उत्तर प्रदेश से टूटकर एक छोटा सा टुकड़ा उत्तराखंड बना पर पुराने राज्यों की बादशाहत जस की तस रही, और पुराने राज्यों में किसी भी प्रकार की गिरावट हुई ऐसा बिल्कुल नहीं देखा गया, ऐसा बिल्कुल नहीं हुआ कि नए वाले को ज्यादा हिस्सा दिया गया हो, कुछ ऐसे ही बात करें तो छत्तीसगढ़ का सरगुजा जिला जिससे टूटकर एक छोटा सा टुकड़ा कोरिया जिले को मिला, फिर टूटा तो सूरजपुर व बलरामपुर बना, इसके बावजूद सरगुजा सबसे बड़ा जिला माना जाता है, पर अब कोरिया से टूटकर मनेन्द्रगढ़ बनने की बारी आई तो कोरिया से ज्यादा मनेंद्रगढ़ को दिया गया, एक छोटा सा उदाहरण और भी देखें तो शहडोल से टूटकर अनूपपुर बना पर शहडोल आज भी अनूपपुर से बड़ा जिला है, पर कोरिया के विभाजन में इन सब पहलुओं पर गौर क्यों नहीं किया गया? आखिर बिना इन सब पहलुओं पर गौर किए बिना ही कोरिया का विभाजन आज गले की फांस बन गया, इसके बावजूद इस फांस को सुलझाने के जगह इस फ़ांस को उलझाने का प्रयास आखिर क्यों?

विभाजन से ख़खुशी कम विरोध ज्यादा
कोरिया जिले से नवीन जिले को ज्यादा क्षेत्रफल ज्यादा विकासखण्ड व ज्यादा नगरीय निकाय दे दिए गए और देखा जाए तो कोरिया जिला जितना बच सका है वह जिले के काबिल भी है नहीं लगता। कोरिया जिले से आखिर ऐसा सुलूक करने की वजह क्या रही यह कोई नहीं समझ पा रहा है जबकि कोरिया जिले के लोगों ने जिला स्तरीय कुछ कार्यालयों के मनेंद्रगढ़ में स्थापित होने का कभी विरोध नहीं किया और उन्हें स्थापित रहने दिया था, मनेंद्रगढ़ नवीन जिला जो नाममात्र के लिए तीन जगहों के नाम से स्थापित हो रहा है जिनमे दो जगहों चिरमिरी नगर निगम व भरतपुर को कोई फायदा जिला गठन से हो रहा है तो वह केवल जिले के नाम मे उनका नाम मात्र शामिल हो रहा है दूसरा उनको कोई विशेष कोई कार्यालय जिला स्तरीय मिल रहा है ऐसा दिखाई नहीं दे रहा है। कुल मिलाकर नवीन एमसीबी जिला गठन से केवल मनेंद्रगढ़ वासियों को ही कुछ मिलने जा रहा है। कोरिया जिले के हिस्से कुछ आया तो राजनीतिक रुसवाई वह भी क्यों आई कोई समझ नहीं पा रहा है। जिस तरह का विभाजन किया गया वह पूरी तरह से कोरिया के अस्तित्व को समाप्त करने वाला साबित हो रहा है और कोरिया की पहचान ही समाप्त होने जा रही है। आदिवासी समुदाय के लोगों ने जिला विभाजन के बाद कईबार यह बताने का प्रयास किया अपनी बात रखने का प्रयास किया कि कोरिया जिले की पहचान कोरियागढ़ नामक पहाड़ से है और वह जिले की अस्मिता से जुड़ा विषय है जिसे जिले से अलग नहीं करना चाहिए लेकिन आदिवासी समुदाय की भावनाओं को भी जिला गठन में महत्व नहीं दिया गया और उन्हें भी केवल आश्वासन से ही मौन होना पड़ा।

सत्ताधारी दल के लोगों का मौन होना कोरिया जिले के भविष्य के लिए घातक
कुल मिलाकर जिला विभाजन केवल कोरिया जिले का अस्तित्व समाप्त करने के लिए किया गया यह कहना गलत नहीं होगा। जिला विभाजन में सत्ताधारी दल के लोगों का मौन भी कोरिया जिले के भविष्य के लिए घातक रहा और जारी जिला बचाओ आंदोलन को आश्वासन पर समाप्त कराकर सत्ताधारी दल ने जिले की अस्मिता बचाने का आखिरी प्रयास भी समाप्त करा दिया जो जिले की अस्मिता के लिए और घातक रहा। जारी आंदोलन के टूट जाने से जिले की अस्मिता के लिए लड़ रहे लोगों का मनोबल भी टूटा और वह जिले के लिए लड़ने का मनोबल खो बैठे। अभी भी जिला बचाओ संघर्ष समिति अपने प्रयास कर रही है लेकिन सत्ताधारी दल मौन है। आज स्थिति यह है कि सत्ताधारी दल के मौन रहने की वजह से नवीन जिले की स्थापना होने जा रही है और कोरिया जिलेवासी निराश होकर केवल देख रहें हैं। वैसे यदि बेहतर राजनीतिक प्रयास किये गए होते तो जरूर जिले की सीमाओं में कुछ फेरबदल हुआ होता और इस तरह का असंतुलित विभाजन नहीं हुआ होता। कोरिया जिला अब दो छोटे छोटे विकासखण्ड के साथ प्रदेश के सबसे छोटे जिलों में शुमार होने जा रहा है जहां अवसरों की भी कमी होगी और संसाधन भी कम होंगे। जिलेवासियों के साथ सत्ताधारी दल की तरफ से किया गया यह कुठाराघात बहोत बड़ा है और कोरिया जिले की जनता मौन होकर केवल देख रही है।
15 अगस्त 2021 क्या कोरिया के लिए काल दिन जैसा
15 अगस्त 2021 को छत्तीसगढ की कांग्रेस नीत भूपेश सरकार ने कोरिया से अलग करते हुए मनेंद्रगढ को जिला बनाने की घोषणा कर दी, 1 वर्ष बीत जाने के बाद अब यह जिला अपना मूर्त रूप लेते नजर आ रहा है। प्रदेष के मुखिया भूपेष बघेल स्वयं सप्ताह भर के भीतर मनेंद्रगढ आकर एक भव्य समरोह के रूप में मनेंद्रगढ वासियों को उनकी बहुप्रतिक्षति मांग को पूरा करेंगे। जाहिर सी बात है यह दिन मनेंद्रगढ शहर वासियों के लिए सबसे खुषियों भरा दिन होगा। इससे उलट सरकार की घोषणा पर जिस प्रकार मातृ जिले कोरिया का बंटवारा करते हुए लगभर 70 प्रतिशत हिस्सा नवीन जिले मनेंद्रगढ में शामिल कर दिया गया है उससे कोरिया वासी काफी हताष और निराश है, लोग खुलकर सरकार के विरोध में बात कर रहे हैं, वे भूपेश सरकार द्वारा खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।
अभी ऐसा होगा एमसीबी जिले का स्वरूप
वर्तमान में चल रही प्रषासनिक तैयारी पर यदि गौर किया जाए तो नवीन एमसीबी जिले में मनेंद्रगढ, खड़गंवा व भरतपुर विकासखंड शामिल होंगे। इन विकासखंड में शामिल गांव को लेकर सबसे असमंजस की स्थिति बचरापोड़ी क्षेत्र को लेकर है जिसमें कि अभी हाल ही में पोड़ी को सरकार ने तहसील का दर्जा दिया है और इसका प्रकाषन राजपत्र में भी हो चुका है। यहां सत्तापक्ष से जुड़े लोगो का कहना है बचरापोड़ी क्षेत्र कोरिया में ही शामिल रहेगा जिसके लिए ही पोड़ी को तहसील बनाया गया है। लेकिन उन्हे यह मालूम होना चाहिए कि भले ही पोड़ी को तहसील बना दिया गया है जिस आधार पर सत्ता दल के लोग इस क्षेत्र को कोरिया जिले में शामिल होने का दावा कर रहे है। लेकिन इस तहसील के गांव खड़गवां विकासखंड मे शामिल है। विकासखंड से पोड़ी तहसील के गांव को अलग करना प्रदेष सरकार के हाथ में नही है।

यह कैसा विभाजन की मातृ जिले को हुआ नुकसान
देश में जब भी किसी प्रदेश का विभाजन हुआ या कि प्रदेश में किसी जिले का, ऐसा कभी देखने सुनने को नही मिला कि इस विभाजन में मातृ प्रदेश या जिले को छोटा कर दिया गया हो। बात यदि छत्तीसगढ की तरफ हो तो आज भी उसका मातृ राज्य मध्यप्रदेश छत्त्तीगढ की तुलना में काफी बड़ा है। इसी प्रकार अन्य प्रदेशो मे भी बंटवारा हुआ लेकिन मातृ राज्य आज भी बड़ा ही है। इसी प्रकार प्रदेष में ही देखा जाए तो राज्य गठन के बाद अनेक जिले का निर्माण हुआ है लेकिन सभी में मातृ जिला आज भी नए जिले की तुलना में बड़ा ही है। राज्य गठन के पूर्व जब 1998 में सरगुजा से अलग करते हुए कोरिया जिले का गठन किया गया तो सरगुजा मातृ जिला भी नवगठित कोरिया की तुलना में लगभग 70 प्रतिशत बड़ा था। यह बात स्थानीय लोगो के समझ नही आ रही है कि आखिर में सरकार ने ऐसा असंतुलित विभाजन कैसे कर दिया जिसमें कि लगभग 70 प्रतिषत हिस्सा नवीन एमसीबी जिले में शामिल कर दिया गया है, और मात्र 30 प्रतिशत हिस्सा कोरिया जिले में रखा गया है।
बचरापोंड़ी क्षेत्र बना चर्चा का विषय
वर्तमान में कोरिया जिले का अभिन्न अंग बचरापोड़ी क्षेत्र को लेकर चर्चा जोरो पर हैं वह इसलिए भी क्योंकि यह क्षेत्र बैकुन्ठपुर विधानसभा में शामिल है। सरकार ने कुछ दिन पूर्व पोड़ी को तहसील बना दिया है जिससे लोगो को और खासकर सत्ताधारी दल के लोगो को लगने लगा है कि बचरापाड़ी क्षेत्र कोरिया में ही शामिल रहेगा। लेकिन इस बारे में शासन की ओर से अभी कुछ भी स्पष्ट नही है। वैसे भी बचरापोड़ी क्षेत्र के अधिकांष गांव के लोग कोरिया जिले में ही रहना चाहते हैं लेकिन सरकार की नीति उनके समझ नही आ रही है।
चिरमिरी वासी कर रहे जिला मुख्यालय की मांग
मनेंद्रगढ को जिला बनाने की घोषणा के साथ ही चिरमिरी वासी लगातार विरोध प्रदर्षन के माध्यम से जिला मुख्यालय चिरमिरी को ही बनाए जाने की मांग कर रहे हैं। क्रमिक धरना प्रदर्शन,आंदोलन के माध्यम से यहां के निवासियों ने शासन तक अपनी बात पहुंचाई है। यही नही चिरमिरी के अनेक युवा पिछले वर्ष जिला मुख्यालय की मांग को लेकर राजधानी रायपुर तक पैदल मार्च भी कर चुके हैं। लेकिन उनकी आवाज को आज तक नही सुना गया है। इस बारे में शासन की ओर से एक भी बयान आज तक नही आया जिससे कि चिरमिरी वासी सरकार के प्रति काफी नाराज हैं।
नगर निगम चिरमिरी के कई वार्ड बैकुंठपुर विकासखंड में
जिस प्रकार बचरापोड़ी क्षेत्र के गांव जो कि खड़गंवा विकासखंड में शामिल हैं उसी प्रकार चिरमिरी नगर निगम के 8 वार्ड बैकुंठपुर विकासखंड में शामिल है उसे लेकर नवीन एमसीबी जिले में पेंच फंसा हुआ है। यह तय है कि नगर निगम चिरमिरी का पूरा क्षेत्र एमसीबी जिले का हिस्सा होगा लेकिन निगम में 8 वार्डो के लोग भ्रम की स्थिति में हैं अभी तक यह तय नही है कि वे वार्ड किस प्रकार बैकुंठपुर विकासखंड से अलग होंगे या वे कोरिया जिले मे ही शामिल रहेंगे। सरकार द्वारा इस पर अभी तक कोई ठोस निर्णय नही लिया गया है जबकि बहुत जल्द ही एमसीबी जिले का शुभारंभ किया जाना है।
सरकार ने नही किया है जिले की सीमा का अंतिम प्रकाशन
प्रदेश सरकार ने वाहवाही बटोरने के लिए भले ही एमसीबी जिले का गठन कर दिया हो लेकिन आज तक इस जिले की सीमा का निर्धारण नही किया गया है। सीमा का निर्धारण किए बगैर जिले का शुभारंभ लोगो की समझ से परे है और लोग इसे सरकार की हठधर्मिता बता रहे है।
क्या टीएस-भूपेश की लडा¸ई का खामियाजा भुगत रहे कोरिया वासी
प्रदेश में यह जगजाहिर है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव दो अलग-अलग धु्रव हैं। दोनो एक दूसरे के राजनैतिक रूप से विरोधी माने जाते हैं समय समय पर स्वास्थ्य मंत्री द्वारा सरकार के विरोध में बयान देना उनके विरोधी होने को और बल देता है। चुंकि बैकुंठपुर विधायक और संसदीय सचिव टीएस समर्थम मानी जाती हैं समय पड़ने पर वे उनके साथ खड़ी भी दिखाई देती हैं, अब ऐसी स्थिति में स्थानीय लोगो का कहना है कि स्थानीय विधायक का टीएस समर्थक होना भी कोरिया वासियों के लिए हानिकारक है। दोनो बडे नेताओं की लड़ाई में ही कोरिया का विभाजन कर दिया गया है। जिसका असर यहां के प्रत्येक नागरिकों पर पड़ा है।
दावा आपत्ति का आज तक नहीं हुआ निराकरण
एमसीबी जिले की घोषणा के बाद शासन की ओर से दावा आपत्ति भी मंगाई गई थी जिसमें कोरिया बचाव मंच और सर्व आदिवासी समाज के द्वारा सरकार के समक्ष असंतुलित विभाजन और खासकर कोरिया गढ पहाड़ को लेकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई गई थी, इस बारे में प्रारंभ में एक याचिका भी उच्च न्यायालय में दायर की गई जिसमें यह हुआ कि शासन नए जिले के गठन के पहले आपत्तियों का निराकरण करे। लेकिन उक्त दोनों संगठन के नेताओं की माने तो अभी तक शासन द्वारा उनके आपत्तियों का निराकरण नही हुआ है और एमसीबी जिले का शुभारंभ किया जा रहा है। उनका कहना है कि आपत्ति एमसीबी जिले के निर्माण को लेकर नही बल्कि कोरिया के असंतुलित बंटवारे को लेकर है।
उच्च न्यायालय ने खारिज की याचिका
एमसीबी जिले के निर्माण में कोरिया के साथ हुए अन्याय और असंतुलित विभाजन के संबंध में कोरिया बचाव मंच के द्वारा पुनः एक याचिक छत्तीसगढ उच्च न्यायालय में लगाई गई थी, उसे उच्च न्यायालय द्वारा खारिज कर दिया गया है,जिसके बाद मंच के पदाधिकारी नए सिरे से अपनी रणनीति बना रहे हैं।
काला दिवस मनाने का निर्णय,कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन
गत दिनों कोरिया बचाव मंच के लोगो ने एक बार कोरिया कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर नवीन जिला निर्माण के पूर्व दावा आपत्ति का निराकरण करने, मांग के अनुरूप क्षेत्रों को मातृ जिले कोरिया में यथावत रखने,एमसीबी जिले के उद्घाटन के पूर्व समस्त जिला कार्यालयों को कोरिया में स्थापित करने व राजपत्र में सीमाओं का स्पष्ट उल्लेख कर अंतिम प्रकाषन करने की मांग की है। मांग पूरी होने के पहले ही यदि एमसीबी जिले का शुभारंभ कर दिया जाता है तो मंच के सदस्यों ने विरोध प्रदर्शन करते हुए काला दिवस मनाने की बात कही है।
कोरिया कुमार का सपना चकनाचूर, क्या जवाब देंगी संसदीय सचिव
छत्तीसगढ के प्रथम वित्त मंत्री और बैकुंठपुर विधानसभा से अपराजेय योद्वा रहे स्व. डॉ.रामचंद्र सिंहदेव जिन्हे की यहां की जनता कोरिया कुमार के नाम से जानती,पहचानती और अपने दिलो में रखती थी, यह जगजाहिर है कि कोरिया जिले के निर्माण और मुख्यालय बैकुंठपुर बनवाने में उनकी प्रमुख भूमिका थी। कोरिया जिला उनके सपनो का जिला था। उनके निधन के बाद प्रदेश में मौका मिलते ही कोरिया जिले का विभाजन कांग्रेस की सरकार ही कर देगी यह किसी ने सोचा नही था। चुनाव पूर्व वर्तमान बैकुंठपुर विधायक अंबिका सिंहदेव ने घूमघूम कर सार्वजनिक मंच से कहा था कि वे काका यानि कि कोरिया कुमार के सपनो को पूरा करने यहां आई है, यहां की जनता ने भी उनकी बात पर भरोसा किया और भैयालाल राजवाड़े जैसे जननेता को किनारे करते हुए उन्हे मौका दिया। अंबिका सिंहदेव के कार्यकाल में कोरिया का विभाजन हो गया, वह भी असंतुलित विभाजन,जिसके लिए यहां की जनता उन्हे भी दोषी मानती है। और आरोप लगाती हुये कहती है कि अंबिका सिंहदेव के कार्यकाल में कोरिया कुमार का सपना चकनाचुर हुआ है वे अब जनता के बीच जाकर क्या मुंह दिखाएंगी। वे जनता को जिले के संबंध में क्या जवाब देंगी। जाहिर सी बात है कि विधानसभा चुनाव 2023 में बैकुंठपुर विधानसभा सीट पर कांग्रेस को बहुत मुश्किल का सामना करना पड़ेगा।
चिरमिरी और भरतपुर को सिर्फ नाम का लॉलीपाप
पिछले साल 2021 में जब मनेंद्रगढ को जिला बनाने की घोषणा हुई तो इसे लेकर भरतपुर और चिरमिरी में विरोध प्रदर्षन प्रारंभ हुआ तब बहुत ही चतुराई से भरतपुर सोनहत विधायक गुलाब कमरो एवं मनेंद्रगढ विधायक विनय जायसवाल ने मुख्यमंत्री से मिलकर मनेंद्रगढ के साथ नाम में चिरमिरी और भरतपुर भी शामिल करा दिया जिसके बाद इस जिले का नाम मनेंद्रगढ नही बल्कि एमसीबी यानि की मनेंद्रगढ,चिरमिरी,भरतपुर रख दिया गया है। मनेंद्रगढ को छोड़ चिरमिरी और भरतपुर की जना यह समझ ही नही पा रही है कि आखिर सिर्फ जिले के नाम में यहां का नाम शामिल कर दिया गया है आखिर इससे चिरमिरी और भरतपुर का फायदा क्या है। एक भी जिला स्तरीय कार्यालय यदि इनमें से एक भी जगह स्थापित नही किए जाते हैं तो जाहिर सी बात है कि चिरमिरी और भरतपुर को नाम का लालीपाप दिया गया है।
विधायक विनय जायसवाल के प्रति जनता में नाराजगी
सरकार ने मनेंद्रगढ को जिला बना दिया इसका सीधा श्रेय स्थानीय विधायक विनय जायसवाल कों मिलना था लेकिन इसका श्रेय उन्हे उतना नही मिल सका जितना मिलना चाहिए था,सरकार द्वारा मनेंद्रगढ को जिला बनाए जाने से यहां की जनता के बीच तो उनका कद ऊंचा हुआ लेकिन चिरमिरी में उठा विरोध अभी तक शांत नही हुआ है। इस विधानसभा में ज्यादा मतदाता चिरमिरी क्षेत्र में निवास करते हैं लेकिन उनकी मांग की ओर आज तक ध्यान नही दिया जा रहा है जाहिर सी बात है कि आगामी चुनाव में विधायक विनय जायसवाल को इसका नुकसान उठाना पड़ेगा।
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