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खड़गवां@पौधारोपण के नाम पर वनपरिक्षेत्र खड़गवां के द्वारा किया जा रहा है करोड़ों रुपयों की बर्बादी हो रहे हैं इस बदहाली पर ध्यान देने वाला कोई नहीं

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-राजेन्द्र कुमार शर्मा-
खड़गवां 09 अगस्त 2022 (घटती-घटना)। कोरिया वनमंडल के वनपरिक्षेत्र खड़गवां में लाखों खर्च कर पौधारोपण किया जा रहा है।एक तरफ क्षेत्र में बारिश नहीं होने के कारण क्षेत्र को जनप्रतिनिधियों एवं सत्तापक्ष विपक्ष विधायक संसदीय सचिव आदि कोरिया जिले को सूखा प्रभावित क्षेत्र घोषित करने की जोरशोर से मांग कर रहे हैं और खड़गवां वनपरिक्षेत्र में वन विभाग क्षेत्र में पौधरोपण का कार्य बड़े ही युद्ध स्तर पर कर रहा है। जब बारिश हो नहीं रही है तो क्या प्लांटेशन में लगाये गये पौधे बिना बारिश के जिवित रह सकेंगे वो सूख जाएंगे अगर यही पौधे नर्सरी में रह जाएंगे तो जीवित रह जाएंगे और अगले वर्ष यही पौधे रोपित किए जा सकेंगे जिससे शासन के करोड़ों रुपए बर्बाद होने से बच जाएगा।
जिस प्रकार खड़गवां वनपरिक्षेत्र के अधिकारी कर्मचारी पौधरोपण का कार्य कर रहे हैं यह सब शासन की राशि को बर्बाद करने का तरीका है। ऐसा करके अधिकारी- कर्मचारी अपनी जेब में मोटी रकम डालने कि व्यवस्था कर रहे हैं।
कोरिया वनमंडल के वनपरिक्षेत्र खड़गवां द्वारा पूर्व में लगाये गये पौधों में से 50 प्रतिशत भी पौधे जीवित रहे होते तो यह वनमंडल हरियाली से ढक गया होता लेकिन यहां तो बमुशक्कित गिनती के पौधे ही जीवित रह पाते है। शेष उचित देखरेख के अभाव में नष्ट हो जाते है। हम दावे के साथ तो ये भी नहीं कह सकते कि इस साल दो पौधा जीवित है।
वनपरिक्षेत्र खड़गवां के द्वारा बीते वर्ष पौधारोपण का कार्य करवाया गया। साथ ही इनका घेराव भी लगवाया गया था जिसमें भी लाखों करोड़ों रुपए खर्च किए गए ताकि उन पौधों को जानवर नुकसान न पहुंचा सके। खड़गवां वन विभाग द्वारा रोपित पौधों को जीवित नहीं रख पाना। फिर ऐसे में शासन का लाखों करोड़ों रुपए खर्च करने का क्या मतलब है।
खड़गवां वनपरिक्षेत्र के अधिकारी- कर्मचारी पौधारोपण करने के समय तो बड़े तामझाम के साथ दिखाई देते हैं, उसके बाद शायद उस जगह जाकर देखे भी नहीं कि क्या हाल है रोपे गए उन पौधों का। अगर वन विभाग द्वारा लगाये गये पौधो की उचित देखरेख किया जाता तो शासन का लाखो रुपए इस कार्य मे बर्बाद नही होता। जो चंद दिनों में ही बदहाल हो । लेकिन कोरिया वनमंडल के लापरवाह अधिकारियों तो बस अपने कर्तव्यों के निर्वहन में खानापूर्ति करना रहता है। बांकी अपने कार्यालय के वातानुकुलीन कक्ष में बैठकर केवल कागजी घोड़ा दौड़या जाता है। वैसे भी पैसा तो जनता का है जिसे वे टेक्स के रूप में शासन को देते है। जिस पैसे का दुरूपयोग मामले में खड़गवां वनपरिक्षेत्र के अधिकारी अव्वल है। इस वनपरिक्षेत्र के अधिकारियों को केवल पौधरोपण में ही नही वरन अन्य निर्माण कार्यों में भी गोलमाल करने में महारथ हासिल है। जहां स्टापडेमों का घटिया निर्माण, तालाब निर्माण, भुगतान राशि, की गलत जानकारी देने जैसे मामलों को लेकर यह वनपरिक्षेत्र अपनी अलग पहचान बना चुका है। जबकि दोषी अधिकारी पर विभागीय कार्यवाही होना चाहिए। ताकि आगे जाकर शासकीय राशि का दुरुपयोग न हो सकें और गुणवत्तापरख कार्य हो। किंतु अफसोस कि विभागीय खामोशी के कारण भ्रष्ट्र अधिकारी के हौसले बुलंद है।
खड़गवां वनपरिक्षेत्र में तो कोरिया वन मंडल में पदस्थ अधिकारी के सगिर्द के द्वारा खड़गवां वनपरिक्षेत्र में हो रहे पौधरोपण एवं परिवहन के कार्य को ठेकेदारी प्रथा के द्वारा कराया जा रहा है जिसके आदेश का खड़गवां वनपरिक्षेत्र का कोई भी अधिकारी एवं कर्मचारी विरोध नहीं कर सकता है?


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