एक निर्वाचित जनप्रतिनिधि को कलेक्टर साहब ने दिया बेहतर तवज्जो,दूसरे निर्वाचित जनप्रतिनिधि को नहीं दिया तवज्जो,आखिर क्यों?
क्या ऊंचे निर्वाचित जनप्रतिनिधि को बेहतर तवज्जो,निचले स्तर के निर्वाचित जनप्रतिनिधि को बिल्कुल भी तवज्जो नहीं,क्या यही है लोकतंत्र ?
मुद्दे समान,अधिकारी भी वही,पर अंदाज ए बयां अलग-अलग क्यों?
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 05 अगस्त 2022 (घटती-घटना)। पूरा कोरिया जिला आषाढ़ और सावन बीत जाने के बाद भी अल्प वर्षा और सूखे के कारण उत्पन्न होने वाली आपदा से परेशान है। जिसे लेकर छत्तीसगढ़ की राजनीति के पक्ष और विपक्ष के जनप्रतिनिधि लगातार अपने-अपने स्तर पर कोरिया जिले को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने एवं राहत कार्यों के प्रारंभ किए जाने की मांग को लेकर विगत कुछ दिनों से सक्रिय हैं। इसी मुद्दे को लेकर अविभाजित कोरिया जिले के कांग्रेस के दो कद्दावर नेता जो वर्तमान में निर्वाचित जनप्रतिनिधि भी हैं, उन्होंने कोरिया कलेक्टर कुलदीप शर्मा से मिलकर अविभाजित जिले के विभिन्न क्षेत्रों को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने को लेकर ज्ञापन सौंपा। पहली तस्वीर में अविभाजित कोरिया जिले के मनेंद्रगढ़ चिरमिरी विधानसभा क्षेत्र के विधायक डॉ विनय जायसवाल ने मनेंद्रगढ़, चिरमिरी, खड़गंवा इत्यादि को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने को लेकर जिला कलेक्टर के समक्ष ज्ञापन सौंपा। वहीं दूसरी तस्वीर में जिला पंचायत कोरिया के उपाध्यक्ष वेदांती तिवारी ने बैकुंठपुर तहसील को सूखाग्रस्त घोषित किए जाने के मुद्दे को लेकर जिलाधीश महोदय को मांग पत्र और ज्ञापन सौंपा। दोनों ही व्यक्ति कद्दावर और दिग्गज कांग्रेसी हैं, जो वर्तमान में सत्ता शासन के भागीदार भी हैं और निर्वाचित जनप्रतिनिधि हैं। परंतु तस्वीरों में यह स्पष्ट देखा जा सकता है कि ज्ञापन स्वीकार करते समय जिलाधीश महोदय मनेंद्रगढ़ विधायक जी के साथ आत्मीयता से खड़े होकर मुस्कुराते हुए ज्ञापन सह मांगपत्र को स्वीकार कर रहें हैं, वहीं दूसरी ओर जिला पंचायत उपाध्यक्ष वेदांती तिवारी के ज्ञापन को बैठे-बैठे ही अपने हाथ से उन्होंने ले लिया है,एक ही जिले के सत्ता शासन में सम्मिलित दो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों, और सत्ताधारी पार्टी के दिग्गज नेताओं के साथ जिलाधीश महोदय का यह दोहरा व्यवहार लोगों में चर्चा और कौतूहल का विषय बना रहा। चर्चाओं में यहां तक कहा गया कि सत्ताधारी पार्टी के दो निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के मध्य जब यह दोहरा व्यवहार अपनाया जा सकता है तो आम जनता की तो सुनवाई भी होगी इसमे संशय है।
कलेक्टर साहब को वैसे तो मुख्यमंत्री ने भेंट मुलाकात कार्यक्रम के दौरान अपने जिला प्रवास पर बहोत साबासी दी थी और दें भी क्यों नही एक भी शिकायतकर्ता मुख्यमंत्री के समक्ष नहीं जा सका और शिकायत नहीं कर सका और जिसकी वजह से मुख्यमंत्री ने कलेक्टर को सबसे बçढ़या कलेक्टर कहकर साबसी दी थी और अब लगने भी लगा है कि इसी तरह यह अपने बेहतर होने का लगातार प्रमाण प्रस्तुत करते रहेंगे और आम लोगों से दूरी वहीं बड़े ओहदे वाले जनप्रतिनिधियों से नजदीकी बनाये रखेंगे। कोरिया जिले में मुख्यमंत्री के प्रवास पर जिम्मेदारी सम्हाल रहे कलेक्टर साहब का आम लोगों की शिकायतों को मुख्यमंत्री तक जाने से रोकने का प्रयास सभी ने देखा था और सभी ने यह महसूस किया था कि मुख्यमंत्री का भेंट मुलाकात कार्यक्रम पूरी तरह प्रशासन की निगरानी में और नियंत्रण में अयोजित कार्यक्रम था जिसमें तय था कि शिकायत मुख्यमंत्री तक न पहुंच सके और शासन की योजनाओं का ही बखान हो सके किसी कमजोर पक्ष का नहीं।
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