बिलासपुर, 14 जुलाई 2022। हाईकोर्ट ने डीजीपी अशोक जुनेजा को नोटिस जारी कर जवाब मागा है। बता दे कि एएसआई ने छाीसगढ़ के बिलासपुर हाईकोर्ट मे अवमानना याचिका दायर की थी। अदालत से दोषमुक्त करार दिए जाने के बाद भी एक सहायक उप निरीक्षक (एएसआई) को सेवा मे बहाल नही किया गया। इस पर डीजीपी अशोक जुनेजा को नोटिस जारी कर जवाब मागा गया है।
आईजी ने किया था बर्खास्त
दरअसल अधिवक्ता अभिषेक पाडेय ने बताया कि बीजापुर निवासी आनद जाटव सुकमा जिला मे एएसआई के पद पर पदस्थ थे। पदस्थापना के दौरान आनद जाटव के विरूद्ध सुकमा थाना मे अपराध पजीबद्ध होने पर क्रिमिनल ट्रायल के दौरान पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) बस्तर रेज ने उन्हे सेवा से बर्खास्त कर दिया था।
मामले मे चले क्रिमिनल ट्रायल के बाद 13 अप्रैल 2021 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, सुकमा ने एएसआई को पूर्ण रूप से दोषमुक्त कर दिया था। इसके बाद भी डीजीपी ने आनद जाटव को सेवा मे बहाल ना कर उसकी अपील को निरस्त कर दिया था। इस पर आवेदक ने पुन: डीजीपी के समक्ष पुर्नविलोकन अभ्यावेदन पेश किया। मामले मे हाईकोर्ट ने 4 जनवरी को डीजीपी को 60 दिवस के भीतर याचिकाकर्ता के पुर्नविलोकन अभ्यावेदन का निराकरण करने के लिए आदेशित किया था। इसके बाद भी एएसआई को सेवा मे बहाल नही किया गया।
हाईकोर्ट मे अवमानना याचिका दायर किया था
फिर आनद जाटव ने अधिवक्ता अभिषेक पाण्डेय और लक्ष्मीन कश्यप के माध्यम से हाईकोर्ट मे अवमानना याचिका दायर किया था। अधिवक्ता अभिषेक और लक्ष्मीन ने अदालत के समक्ष तर्क दिया कि पुलिस रेगुलेशन 1861 के पैरा-241 मे प्रावधान है कि यदि कोई शासकीय सेवक के विरूद्ध चल रहे आपराधिक ट्रायल/मामले मे वह पूर्ण रूप से दोषमुक्त हो जाता है, तो वह पुन: सेवा मे बहाली का पात्र है।
लेकिन डीजीपी अशोक जुनेजा ने हाईकोर्ट से पारित आदेश का पालन नही करते हुए याचिकाकर्ता को सेवा मे बहाल नही किया है। जस्टिस कोशी ने अवमानना याचिका की सुनवाई के बाद मामले को स्वीकार करते हुए डीजीपी जुनेजा को इस मामले मे तत्काल अपना जवाब पेश करने के लिए नोटिस जारी किया है।
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