-राजा मुखर्जी-
कोरबा, 04 जुलाई 2022(घटती-घटना)। नगर निगम क्षेत्र में बेजा कब्जा कर मकान बनाए जाने की वजह से दस साल के अंदर दो दर्जन से अधिक श्रमिक बाहुल्य बस्ती बस गए हैं। इन अवैध बस्तियों को अब वार्ड में तब्दील कर दिया गया है और मूलभूत सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जा रही है। अवैध कब्जा का सिलसिला अभी भी थमा नही है। इन दिनों बुधवारी बाइपास पर मुख्य मार्ग, जैन मंदिर के पीछे व रेलवे लाइन के बीच खाली पड़ी जमीन पर अवैध कब्जा धड़ल्ले से किया जा रहा है। निगम द्वारा कार्रवाई नहीं करने पर अतिक्रमणकारी धड़ल्ले से रातों रात बाउंड्रीवाल कर निर्माण कार्य करा रहे हैं। नगर निगम का तोड़ू दस्ता की कार्रवाई भी भेदभावपूर्ण है। शिकायत मिलने पर ही कार्रवाई कर रहा है, जबकि निगम की नाक के नीचे हो रहे बेजा कब्जा को रोजाना देखने के बाद भी अधिकारी कार्रवाई नहीं कर रहे। यही वजह है कि बेशकीमती जमीन पर अतिक्रमण लगातार बढ़ते जा रहा है। शासन के नए नियम के तहत अगर किसी शासकीय जमीन को अपने नाम पर रजिस्ट्री कराना है तो उस जमीन पर कब्जा जरूरी है। यही वजह है कि अतिक्रमण धड़ल्ले से किया जा रहा है। बुधवारी बाईपास मार्ग में करोड़ों की जमीन को हथियाने का खेल इन दिनों चल रहा है। एक तरफ निगम आयुक्त तोड़ू दस्ता दल को नए अतिक्रमण पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दे रहे हैं, लेकिन निगम के निचले स्तर के अधिकारी- कर्मचारी कार्रवाई करने से पीछे हट रहे है। वर्तमान में रेलवे लाइन व बाईपास के बीच सागौन प्लांटेशन में भी अतिक्रमण किया जा रहा है। किसी को भनक न लगे या फिर विरोध न हो इसके लिए राखड़ ईंट का इस्तेमाल किया जा रहा है, ताकि लोगों को यह लगे कि सरकारी निर्माण चल रहा है। बाईपास मार्ग की खाली पड़ी 60 प्रतिशत जमीन पर अब तक हो चुका कब्जा । बाइपास के अलावा शहर में औद्योगिक उपक्रम, रेलवे लाइन, वन विभाग व सिंचाई विभाग के बीच जिन जमीनों को लेकर विवाद बना हुआ है, उस जमीन पर ज्यादा कब्जा हो रहा है। इसकी मुख्य वजह यह है कि रिकॉर्ड नहीं होने की वजह से कई जमीन खाली पड़ी हुई है। इसका फायदा बेजा कब्जा धारी लगातार उठा रहे हैं। आधा दर्जन वार्ड ऐसे हैं ,जहां पट्टे के लिए अतिक्रमण करने की होड़ मची हुई है। सर्वे बहुत जल्द शुरु होने जा रहा है। इसके बाद एक साथ सभी वार्डों में पट्टा बांटा जाएगा। इसलिए जमीन का दायरा बढ़ाने का खेल चल रहा है और कई हिस्से में कब्जा किया जा रहा है। भविष्य में सरकारी उपयोग के लिए जमीन आरक्षित नहीं रखी जा रही है। अतिक्रमण कर ,शुल्क जमा किसी भी जमीन को कब्जा कर लिया जा रहा है। जबकि क्षेत्रवार और शहर के मुख्य मार्गों के आसपास ऐसे इलाकों को कब्जे के दायरे से बाहर रखने की जरूरत है। इन जमीनों पर अतिक्रमण करने का खेल जोरों से चल रहा है। कब्जा दिखाकर बाद में उसे अपने नाम पर दर्ज कराया जा रहा ।
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