-संवाददाता-
अम्बिकापुर, 11 जून 2022(घटती-घटना)।जनजाति सुरक्षा मंच द्वारा की जा रही डी-लिस्टिंग की मांग निरस्त करने ईसाई आदिवासी महासभा ने शहर में पीजी कॉलेज मैदान में सभा के बाद रैली निकाली और राष्ट्रपति के नाम कलेक्टर सरगुजा को ज्ञापन सौंपा। इसमें उल्लेखित किया गया है कि जनजाति सुरक्षा मंच के द्वारा देश के कई स्थानों पर रैली और प्रदर्शन करते हुए सार्वजनिक रूप से यह मांग की जा रही है कि धर्मांतरित व्यक्तियों को अनुसूचित जनजाति सूची से बाहर किया जाए। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 342 में अनुसूचित जनजाति का उल्लेख किया गया है। कहा गया है कि भौगोलिक अलगाव, विशिष्ट जीवन शैली, आदिम अर्थ प्रणाली, रूढ़ी व परंपराएं, विलक्षण रीति-रिवाज, प्रथागत कानून, जनजातीय भाषा का प्रयोग, युवा गृह आदि लक्षणों के आधार पर ये जनजातियां अनुसूचित जनजातियां घोषित की गई हैं। अनुसूचित जनजातियां किसी धर्म विशेष तक सीमित नहीं हैं। 1951 के पूर्व भारत की जनगणना वर्ष 1911 में आदिवासियों का धर्म एनिमिज्म के नाम पर दर्ज किया गया। कार्तिक उरांव व पदमश्री डॉ.रामदयाल मुंडा ने भी आदिवासियों के धर्म को आदि धर्म का नाम दिया है। ऐसे में ईसाई या अन्य धर्म ग्रहण करने वाले व्यक्तियों को ही अनुसूचित जनजाति की सूची से बाहर करने हेतु डी-लिस्टिंग का प्रस्ताव लाया जा रहा है। इस दौरान ईसाई महासभा के अध्यक्ष मुन्ना टोप्पो, उपाध्यक्ष ब्लासियुस तिग्गा, अरविंद कच्छप, ब्लासियुस कुजूर, आनंद प्रकाश कुजूर, सुरेश एक्का, नेवत साय कुजूर, मुक्ति प्रकाश लकड़ा, आईजक एक्का, मानुएल एक्का, विजय बेक, जीतराम कुजूर, फिरमा एक्का, थॉमस एक्का, प्रणय टोप्पो, मेरी किंडो, आनंद कुजूर, सुनील लकड़ा, निर्दोष एक्का सहित काफी संख्या में ईसाई आदिवासी समाज के लोग उपस्थित थे।
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