दो सालों में कई शिकायतों के बावजूद कोई नहीं छीन पाया इनसे इनके थानेदार का प्रभार।
जिले में मौजूद निरीक्षक भी नहीं ले पाए इनसे पुलिस थाने का प्रभार।
2 साल पूरा करने वाले सफल थानेदार के सामने खुले आम घूमता आरोपी पर थानेदार लाचार क्यों?
उप निरीक्षक से निरीक्षक बनने का बाट जोह रहे थाना प्रभारी, क्या निरीक्षक बन कर ही छोड़ेंगे थाना?
-रवि सिंह-
बैकुण्ठपुर 10 जून 2022(घटती-घटना)। मनेंद्रगढ़ थाना कोरिया जिले के उनके थानों में शुमार है जिनकी गिनती सबसे बड़े व कमाऊ थाने में होती है, मनेंद्रगढ़ थाने का यह भी इतिहास रहा है कि इस थाने में जो भी थानेदार आया उसमें से शत-प्रतिशत निरीक्षकों को ही थानेदार बनाया गया और कोई भी थानेदार 1 साल से डेढ़ साल उससे अधिक समय इस थाने में नहीं टिक पाया, वहीं 2 साल पहले मनेंद्रगढ़ थाने को उप निरीक्षक के तौर पर एक नया थानेदार मिला जिसका कार्यकाल इतना शानदार रहा कि तीन पुलिस अधीक्षक बदल गए पर उनका थाना नहीं बदला पिछले माह मई में मनेंद्रगढ़ थाने में पदस्थ होते इन्हें 2 साल पूरे हो गए, तीसरा साल इनके लिए शुरू हो चुका है, यह प्रभारी इतने सफल थानेदार है कि कोई भी पुलिस अधीक्षक इन्हें हटाने की हिम्मत नहीं जुटा पा रहा है चाहे लाख शिकायत क्यों ना हो जाए या खाकी दागदार ही क्यों ना हो जाए।
फिलहाल अब यह लगता की थाना तभी छोड़ेंगे जब यह उपनिरीक्षक से निरीक्षक पद पर पदोन्नत होंगे, बताया जाता है कि इनके ही कार्यकाल में कई गंभीर धाराओं के आरोपी इनके सामने सीना चौड़ा कर घूमते रहते हैं पर इनकी हिम्मत नहीं है कि यह उन्हें गिरफ्तार कर ले भले ही खाकी पर आरोप लगे खाकी बदनाम हो जाए पर यह उन आरोपियों को नहीं पकड़ सकते क्योंकि इन्हें इस बात का अंदाज हो गया है कि इन आरोपियों को पकडऩा मतलब कि इनकी पदोन्नति पर रोक लगना, यही वजह है कि इनके कार्यप्रणाली को लेकर शिकायतें भी खूब है पर इन पर कार्यवाही करने के बजाए इन्हें मलाई वाले थाने से दूर करना भी अधिकारियों के लिए नामुमकिन जैसा हो गया है।
फाइनेंस कंपनी ठगी मामले के आरोपी घूम रहे खुलेआम
मनेंद्रगढ़ के वर्तमान थाना प्रभारी के ही कार्यकाल में एक फाइनेंस कंपनी के साथ छल करने का मामला सामने आया था और उस मामले में थाने से कोई कार्यवाही नहीं हुई वहीं मामले में जब फाइनेंस कंपनी ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया आरोपियों पर अपराध दर्ज करने का न्यायालय ने आदेश दिया। पूरे मामले में न्यायालय के आदेश के बावजूद भी प्रभारी थानेदार ने आरोपियों का खुलकर साथ दिया और उन्हें खुलेआम घूमने की आजादी भी दी जिससे आरोपी अपने बचाव के लिए कुछ कर सकें। मामले में अभी भी कार्यवाही होनी शेष है और आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं।
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