अम्बिकापुर 05 जून 2022 (घटती-घटना)। विश्व पर्यावरण दिवस पर केवल एक पृथ्वी के थीम पर राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (आरआरवीयूएनएल) द्वारा परसा ईस्ट केते बासेन (पीईकेबी) कोयला खदान क्षेत्र और ग्रामों में रविवार को वृहद वृक्षारोपण का कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसी श्रृंखला में आज से मानूसन के अंत तक पीईकेबी खदान के रिक्लेमेशन क्षेत्र सहित आसपास के ग्राम साल्हि, परसा और बासन के सभी स्कूलों और आंगनवाड़ीयों में दस हजार से ज्यादा पौधा रोपण लक्ष्य के अंतर्गत 3000 से ज्यादा पौधों का रोपण किया गया। साथ ही जिला मुख्यालय अंबिकापुर में भी शहर के मुख्य चौक-चौराहों पर वन विभाग के साथ मिलकर दो हजार से ज्यादा फलदार वृक्षों जैसे आम, कटहल, जामुन, निम्बु इत्यादि का वितरण किया गया। पौधा रोपण कार्यक्रम में खदान के क्लस्टर प्रमुख मनोज कुमार शाही, महाप्रबंधक संजय कुमार श्रीवास्तव, उप महाप्रबंधक सिद्धार्थ रक्षित तथा अन्य कर्मचारी उपस्थित थे। इसके अलावा सभी स्कूलों के विद्यार्थियों, शिक्षकों, और ग्रामीणों ने भी इसमें बढ़चढ़ कर हिस्सा लिया। पर्यावरण के प्रति कर्मचारियों और कामगारों में जागरूकता लाने हेतु पी ई के बी खदान क्षेत्र के पर्यावरण विभाग द्वारा जून 1 से 5 तक पांच दिवसीय विश्व पर्यावरण दिवस 2022 महोत्सव का आयोजन किया गया था। जिसमें पर्यावरण और इसके सुधारों से संबंधित स्लोगन, पोस्टर, अभिनव विचारों आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों पर अलग-अलग गतिविधियां व प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। वहीं आज 5 जून को पर्यावरण दिवस के अवसर पर अदाणी विद्या मंदिर, परसा सरकारी स्कूल, साल्ही सरकारी स्कूल के 10 वर्ष से अधिक आयु के बच्चों के लिए “केवल एक पृथ्वी” विषय पर स्लोगन, ड्राइंग और निबंध प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस सम्पूर्ण कार्यक्रम में पचास से अधिक बच्चों के साथ कर्मचारियों, सविंदाकारो, कामगारों और उनके बच्चों ने उत्साह पूर्वक भाग लिया। प्लान्ट और कॉलोनी क्षेत्र के लिए फोटोग्राफी और इनोवेटिव आइडियाज कॉम्पिटिशन भी रखा गया। प्रतियोगिता के सभी विजेताओं को पुरस्कारों का वितरण भी किया गया। उल्लेखनीय है, कि आरआरवीयूएनएल द्वारा पिछले दस वर्षों में पर्यावरण के प्रति सजगता और संतुलन बनाये रखने के लिए आस पास के क्षेत्रों के साथ साथ खदान के सुधार क्षेत्रों में अब तक आठ लाख से ज्यादा पौधों का रोपण किया गया है जो अब तक एक बड़े वृक्षों का रूप लेते हुए घने जंगल में परिवर्तित हो चूका है। जबकि इस क्षेत्र में पिछले दस वर्षो में केवल अस्सी हजार वृक्षों का ही विदोहन किया गया है।
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