-राजा मुखर्जी-
कोरबा 25 अप्रैल 2022 (घटती-घटना)। विभिन्न योजनाओं एवं मदों से स्वीकृत किए गए कार्यों के प्रारंभ होने से लेकर उसके गुणवत्तापूर्ण ढंग से संपन्न होने के मामले में जिम्मेदार अधिकारियों की बेख्याली से पंचायत प्रतिनिधियों की मनमानी पर अंकुश नहीं लग पा रहा । सांठगांठ न सही लेकिन शासन के रुपयों का बेरहमी से दुरुपयोग हो रहा है और अधिकारी नजरें फेरे बैठे हैं, जबकि उनके पास कार्यों का लेखा-जोखा रहता है। उदासीनता की वजह से जनता को समय पर निर्माण का लाभ नहीं मिलता, वहीं कार्य न होने से, प्रशासन व शासन की छवि भी खराब होती है, खासकर तब जब चुनाव का समय नजदीक आ रहा हो। कुछ इसी तरह की उदासीनता कोरबा अनुविभाग व विकासखंड के अंतर्गत ग्राम पंचायत सेमीपाली में दिखी । यहां 6 वर्षों में भी सीसी रोड नहीं बन सका है। सेमीपाली की पूर्व सरपंच श्रीमती इंदु बाई कंवर के कार्यकाल में उरगा- बिलासपुर मेन रोड से साहू समाज के सामुदायिक भवन तक सीसी रोड का निर्माण जनपद विकास निधि से स्वीकृत हुआ था। पंचायत सूत्रों के मुताबिक सीसी रोड निर्माण के लिए अग्रिम राशि 60 हजार रुपए तात्कालिक सरपंच एवं सचिव द्वारा आहरण तो कर लिया गया , किंतु सड़क का निर्माण करना भूल गए। अब इनका कार्यकाल बदलने के बाद ना तो उस अग्रिम राशि का पता है और ना ही सीसी रोड और निर्माण सामग्री का। इस संबंध में वर्तमान सचिव कविता साहू से पूछने पर जवाब मिला कि उक्त कार्य मेरे कार्यकाल का नहीं है। सचिव का जवाब उनके हिसाब से भले सही हो लेकिन प्रशासनिक कार्यों में दस्तावेज तो नहीं बदलते। कार्य का प्रस्ताव और निर्माण की स्वीकृति के साथ ही आहरित अग्रिम राशि का रिकार्ड तो पंचायत में मौजूद होगा ही, फिर प्रभार बदलने पर पूर्व सचिव के द्वारा संपूर्ण दस्तावेज मौजूदा सचिव को सुपुर्द कर दिया जाता है तब ऐसे में वर्तमान सरपंच-सचिव का दायित्व है कि वे उक्त कार्य को आगे बढ़ाएं। इस तरह का मामला सिर्फ एक सेमीपाली नहीं बल्कि अन्य पंचायतों में भी आता है, जब अधिकारी-पदाधिकारी-जनप्रतिनिधि बदलने के बाद पुराने मामलों से पल्ला झाड़ लिया जाता है। इस तरह की गैर जिम्मेदाराना कार्यशैली पर नियंत्रण के साथ ही पूर्व स्वीकृत कार्यों को पूर्ण कराने की जवाबदारी संबंधित उच्च अधिकारियों की बनती है, लेकिन वे भी निचले और मैदानी कर्मियों के भरोसे सब कुछ छोड़कर जनता को उनके हाल पर छोड़ने में कोई गुरेज नहीं कर रहे। छह साल का समय सीसी रोड के लिए कम नहीं होता और इन छह वर्षों में कच्ची सड़क पर मौसम की मार झेलते ग्रामीणों की पीड़ा को सहज ही समझा जा सकता है।
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