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सूरजपुर @ बोर्ड परीक्षा केंद्रों के नए नियम पर संयुक्त शिक्षक संघ का कड़ा ऐतराज,छात्रहित में निर्णय वापस लेने की मांग

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ग्रामीण विद्यार्थियों की परेशानी, सुरक्षा और आर्थिक बोझ को लेकर सूरजपुर जिलाध्यक्ष सचिन त्रिपाठी ने उठाई आवाज़
-संवाददाता-
सूरजपुर,19 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा वर्ष 2027-28 की हाई स्कूल एवं हायर सेकेंडरी बोर्ड परीक्षाओं के लिए जारी नए निर्देशों का छत्तीसगढ़ प्रदेश संयुक्त शिक्षक संघ ने कड़ा विरोध किया है। संघ ने विद्यार्थियों के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए परीक्षा केंद्रों की पूर्व व्यवस्था को यथावत रखने तथा नए निर्णय को तत्काल वापस लेने की मांग की है। संघ का कहना है कि नए नियमों के कारण ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों के विद्यार्थियों को परीक्षा देने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ सकती है। इससे विद्यार्थियों को आवागमन में परेशानी,अतिरिक्त आर्थिक बोझ तथा मानसिक तनाव का सामना करना पड़ेगा। विशेषकर ग्रामीण, गरीब एवं आदिवासी परिवारों के विद्यार्थियों के लिए यह व्यवस्था कठिनाई बढ़ाने वाली साबित हो सकती है।
बोर्ड परीक्षाएं प्रातः 9ः15 बजे से प्रारंभ होती हैं। ऐसे में दूरस्थ गांवों के विद्यार्थियों को समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचने के लिए सुबह जल्दी घर से निकलना पड़ेगा। कई गांवों में नियमित परिवहन सुविधा उपलब्ध नहीं होने के कारण विद्यार्थियों एवं अभिभावकों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है। परीक्षा केंद्रों की दूरी बढ़ने से छात्राओं की सुरक्षा को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े होते हैं। संघ का मानना है कि शिक्षा व्यवस्था ऐसी होनी चाहिए,जो विद्यार्थियों को सुविधा प्रदान करे, न कि उन्हें अनावश्यक परेशानियों में डाले। बोर्ड परीक्षा का उद्देश्य विद्यार्थियों की शैक्षणिक क्षमता का निष्पक्ष मूल्यांकन करना है। परीक्षा केंद्रों की दूरी बढ़ने से विद्यार्थियों की उपस्थिति एवं परीक्षा प्रदर्शन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
सूरजपुर जिलाध्यक्ष सचिन त्रिपाठी ने कहा कि विद्यार्थियों के भविष्य से जुड़े इस महत्वपूर्ण निर्णय को लागू करने से पहले शिक्षक संगठनों, अभिभावकों एवं शिक्षा विशेषज्ञों से व्यापक चर्चा की जानी चाहिए थी। ग्रामीण क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों, परिवहन सुविधाओं एवं छात्रहित को ध्यान में रखते हुए ही परीक्षा केंद्रों का निर्धारण किया जाना चाहिए। उन्होंने राज्य शासन एवं माध्यमिक शिक्षा मंडल से मांग की है कि छात्रहित में नए नियमों पर पुनर्विचार करते हुए पूर्व की परीक्षा केंद्र व्यवस्था को यथावत रखा जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, सुविधा एवं समान अवसर सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की प्राथमिक जिम्मेदारी है।
संयुक्त शिक्षक संघ ने चेतावनी दी है कि यदि छात्रहित को प्रभावित करने वाले इस निर्णय पर सकारात्मक पहल नहीं की गई, तो संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करेगा और विद्यार्थियों के हितों की रक्षा के लिए हर स्तर पर प्रयास करेगा।


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