तीन साल तक बालिका गृह में रही प्रियांशी का संदीप से हुआ विवाह,नन्हीं बेटी के साथ नए जीवन की शुरुआत…शक्ति सदन में भावुक हुआ माहौल
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,19 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। महिला एवं बाल कल्याण के क्षेत्र में मानवीय सेवा की मिसाल पेश कर रहीं एमएसएसवीपी शक्ति सदन की संचालिका डॉ. मीरा शुक्ला ने एक बार फिर संवेदनशील पहल करते हुए एक युवती का घर बसाने में अहम भूमिका निभाई। शुक्रवार, 16 अक्टूबर को शक्ति सदन परिसर में प्रियांशी राजवाड़े और संदीप चौधरी का विवाह हिंदू रीति-रिवाज से संपन्न हुआ। डॉ. शुक्ला ने अपना 33वां कन्यादान कर नवदंपति को नए जीवन की शुरुआत के लिए आशीर्वाद दिया। इससे पहले वे 32 असहाय युवतियों के विवाह और पुनर्वास में सहयोग कर चुकी हैं। प्रियांशी और संदीप का संबंध करीब तीन साल पहले शुरू हुआ था। उस समय प्रियांशी नाबालिग थीं। इस दौरान उन्होंने एक बच्ची को जन्म दिया। नाबालिग से जुड़े मामले में संदीप के खिलाफ पॉक्सो एक्ट के तहत कार्रवाई हुई और उन्हें करीब चार-पांच महीने जेल में रहना पड़ा। वहीं, नियमानुसार प्रियांशी को बालिका गृह में संरक्षण दिया गया,जहां वे लंबे समय तक रहीं। इस दौरान परिजनों ने भी उनसे दूरी बना ली। प्रियांशी संदीप के साथ जीवन बिताने के फैसले पर अडिग रहीं। न्यायालय में सुनवाई के दौरान उन्होंने अपनी इच्छा स्पष्ट की। इसके बाद संदीप जेल से रिहा हुए। विवाह की कानूनी प्रक्रिया में समय लगने की जानकारी मिलने पर वे एमएसएसवीपी शक्ति सदन पहुंचे। बालिग होने के बाद प्रियांशी भी पिछले कई महीनों से यहीं रह रही थीं।
डॉ. शुक्ला की पहल से
पूरी हुईं औपचारिकताएं…
संदीप की स्थिति और बच्ची के भविष्य को देखते हुए डॉ. मीरा शुक्ला ने पहल की। संस्था की ओर से आवश्यक कानूनी और प्रशासनिक औपचारिकताएं पूरी कराने की प्रक्रिया में सहयोग किया गया। इसके बाद दोनों का विवाह संपन्न हुआ। समारोह में वर पक्ष के करीब 35 से 40 महिला-पुरुष बाराती शामिल हुए। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच कन्यादान, मंगलसूत्र धारण, सिंदूरदान और बिछिया पहनाने की रस्में निभाई गईं। संस्था की ओर से बारातियों और अतिथियों का स्वागत कर भोजन कराया गया।
बेटी की विदाई पर छलक पड़े आंसू : विवाह के बाद विदाई का दृश्य भावुक कर देने वाला रहा। प्रियांशी की नन्हीं बेटी ने बालिका गृह और शक्ति सदन में लंबे समय तक महिला कर्मचारियों के स्नेह और देखभाल के बीच समय बिताया था। विदाई के समय जब वह अपनी मां और पिता के साथ रवाना हुई, तो उसे अपनी संतान की तरह पालने वाली महिला कर्मचारियों की आंखें नम हो गईं। डॉ. मीरा शुक्ला ने भी प्रियांशी को गले लगाकर विदाई दी। उन्होंने कहा कि बच्ची से अलग होने का दुख जरूर है, लेकिन इस बात की खुशी और सुकून भी है कि अब उसे अपने माता-पिता के साथ परिवार का सहारा मिलेगा। संस्था का उद्देश्य केवल आश्रय देना नहीं, बल्कि जरूरतमंद बेटियों को सम्मानजनक जीवन और बेहतर भविष्य की राह उपलब्ध कराना है। शक्ति सदन परिवार ने नवदंपति और उनकी बेटी को सुखी दांपत्य जीवन के लिए शुभकामनाएं देते हुए विदा किया।
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