कृषक उन्नति योजना से फसल विविधीकरण को बढ़ावा,लेकिन किसान की असली कमाई का हिसाब कटाई के बाद ही सामने आएगा…
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,18 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। धान की खेती के लिए पहचाने जाने वाले छत्तीसगढ़ में अब किसानों को दूसरी फसलों की ओर आकर्षित करने की कोशिश की जा रही है। सरगुजा जिले के उदयपुर विकासखंड के परसा गांव के किसान दिनेश कुमार यादव ने इसी पहल के तहत एक एकड़ में धान की जगह रागी (मडि़या) की खेती की है। कृषि विभाग ने उन्हें बीज उपलब्ध कराया और तकनीकी मार्गदर्शन भी दिया।
फसल की स्थिति अच्छी बताई जा रही है। अब कृषक उन्नति योजना के तहत प्रति एकड़ 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की उम्मीद है।
हालांकि, रागी की फसल लहलहाने और प्रोत्साहन राशि मिलने की उम्मीद के बीच एक सवाल भी अहम है—क्या वैकल्पिक फसल अपनाने से किसान की आमदनी वास्तव में बढ़ेगी? इसका जवाब फिलहाल फसल की कटाई, वास्तविक उत्पादन, बाजार में मिलने वाले दाम और खेती की कुल लागत का हिसाब सामने आने के बाद ही मिलेगा।
बीज मिला, तकनीकी सलाह मिली, अब उत्पादन पर नजर : किसान दिनेश कुमार यादव के मुताबिक,कृषि विभाग ने राष्ट्रीय प्राकृतिक खेती मिशन एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत उन्हें रागी का बीज उपलब्ध कराया था। विभागीय अधिकारियों के मार्गदर्शन में उन्होंने एक एकड़ में इसकी खेती की। उनके अनुसार, नियमित सलाह और देखरेख से फसल की बढ़वार अच्छी हुई है। अधिकांश फसल तैयार हो चुकी है, जबकि शेष फसल भी अच्छी स्थिति में है। फिलहाल फसल की स्थिति को सफलता का संकेत माना जा रहा है,लेकिन किसान को इससे कितना आर्थिक लाभ होगा,यह अभी तय नहीं है। वास्तविक उत्पादन, कटाई के बाद मिलने वाले दाने,बिक्री की व्यवस्था और बाजार भाव का आकलन होने पर ही रागी की खेती की आर्थिक तस्वीर स्पष्ट होगी।
किसान को उम्मीद, अब नतीजों की बारी
दिनेश यादव ने रागी की फसल की अच्छी स्थिति पर संतोष जताते हुए प्रधानमंत्री,मुख्यमंत्री और कृषि विभाग के प्रति आभार व्यक्त किया है। अब कटाई के बाद उत्पादन और आमदनी का वास्तविक आकलन होगा। उनकी पहल दूसरे किसानों को भी धान के अलावा अन्य फसलें अपनाने के लिए प्रेरित कर सकती है। हालांकि, इस पहल की असली सफलता तभी मानी जाएगी,जब किसान को लागत निकालने के बाद उचित लाभ मिले और वैकल्पिक खेती उसके लिए आर्थिक रूप से टिकाऊ साबित हो।
10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि से कितनी बदलेगी तस्वीर?
दिनेश यादव ने बताया कि कृषि विभाग के अधिकारियों से उन्हें कृषक उन्नति योजना के तहत धान के स्थान पर निर्धारित वैकल्पिक फसलों की खेती करने पर प्रोत्साहन राशि मिलने की जानकारी मिली थी। इसके बाद उन्होंने रागी की खेती का निर्णय लिया और योजना के लिए पंजीयन भी कराया है। योजना के प्रावधानों के अनुसार पात्रता पूरी होने पर उन्हें एक एकड़ के लिए 10 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि मिलने की उम्मीद है। यह राशि किसान के लिए खेती की लागत का बोझ कम करने में मददगार हो सकती है। लेकिन केवल प्रोत्साहन राशि के आधार पर किसी वैकल्पिक फसल को अधिक लाभकारी नहीं माना जा सकता। इसके लिए बीज, खाद,मजदूरी,कटाई,परिवहन और बिक्री पर होने वाले खर्च की तुलना धान की खेती से करना भी जरूरी है।
मिलेट को बढ़ावा देना आसान,बाजार तक पहुंच बनाना असली चुनौती
रागी जैसे मोटे अनाज पोषण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं और फसल विविधीकरण में इनकी भूमिका भी अहम है। इसके बावजूद किसानों के सामने उत्पादन के साथ उपज की बिक्री, उचित मूल्य और नियमित खरीदार उपलब्ध होने जैसी चुनौतियां रहती हैं। यदि किसान को बाजार में उचित दाम नहीं मिलता, तो अच्छी फसल के बावजूद अपेक्षित आर्थिक लाभ हासिल करना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कृषि विभाग और शासन की जिम्मेदारी केवल बीज वितरण और तकनीकी मार्गदर्शन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। किसानों को उपज की खरीद, प्रसंस्करण,भंडारण और बाजार से जोड़ने की व्यवस्था भी मजबूत करनी होगी,ताकि वैकल्पिक फसलों की खेती महज प्रोत्साहन राशि तक सीमित न रह जाए।
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