एचआईवी नियंत्रण में सरगुजा को मिली ‘सुरक्षित’ श्रेणी,अब ‘सुरक्षित प्लस’ की तैयारी
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,18 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। एचआईवी संक्रमण की पहचान के बाद मरीजों को उपचार से जोडऩा और संक्रमण को आगे फैलने से रोकना सरगुजा स्वास्थ्य विभाग की प्राथमिकता बन गया है। जिले में अब तक 824 एचआईवी संक्रमितों की पहचान की गई है, जिनमें से 801 का एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (एआरटी) के तहत उपचार शुरू किया जा चुका है। उपचाररत मरीजों में 99 प्रतिशत से अधिक वायरल लोड सप्रेशन दर्ज होने के साथ जिले ने मिशन एड्स सुरक्षा अभियान में ‘सुरक्षित’ श्रेणी हासिल की है। अब स्वास्थ्य विभाग का जोर गर्भवती महिलाओं की जांच, संक्रमित माताओं का समय पर उपचार और नवजातों को संक्रमण से बचाने पर है। राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (नाको) के अंतर्गत संचालित राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत सरगुजा ने यह उपलब्धि हासिल की है। कलेक्टर अजीत बसंत के नेतृत्व में स्वास्थ्य विभाग और जिला एड्स नियंत्रण कार्यक्रम से जुड़े अमले ने जांच, उपचार और मरीजों की नियमित निगरानी पर ध्यान केंद्रित किया। इस उपलब्धि के साथ सरगुजा प्रदेश में प्रथम स्थान पर पहुंचा है।
जांच से लेकर उपचार तक निगरानी : जिले में एचआईवी संक्रमितों की पहचान के साथ उन्हें नियमित उपचार उपलब्ध कराने और वायरल लोड की निगरानी की जा रही है। दिशा टीम, एकीकृत परामर्श एवं जांच केंद्र, एआरटी केंद्र और प्रयोगशाला सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों की इसमें अहम भूमिका है। स्वास्थ्य विभाग का प्रयास है कि कोई भी संक्रमित व्यक्ति जांच और उपचार से वंचित न रहे।
‘सुरक्षित प्लस’ के लिए तीन मोर्चों पर तैयारी : जिले के सामने अब ‘सुरक्षित प्लस’ श्रेणी हासिल करने की चुनौती है। इसके लिए जोखिमग्रस्त व्यक्तियों की स्वैच्छिक जांच बढ़ाने,गर्भवती महिलाओं की एचआईवी जांच सुनिश्चित करने और संक्रमित गर्भवती महिलाओं को समय पर उपचार उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाएगा। साथ ही,उपचार बीच में छोड़ चुके मरीजों को दोबारा स्वास्थ्य सेवाओं से जोडऩे और माता से शिशु में संक्रमण रोकने के प्रयास किए जाएंगे। कलेक्टर अजीत बसंत ने संक्रमित व्यक्तियों के प्रति सामाजिक भेदभाव समाप्त करने तथा उनकी गोपनीयता और सम्मान सुनिश्चित करने पर जोर दिया है। जिला एड्स नियंत्रण सोसायटी के प्रभारी डॉ. शैलेन्द्र गुप्ता के अनुसार, जिले का अगला लक्ष्य ‘सुरक्षित प्लस’ श्रेणी हासिल करना है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि समय पर जांच, नियमित उपचार और चिकित्सकीय परामर्श से एचआईवी संक्रमित व्यक्ति स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
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