Breaking News

अंबिकापुर@ पहले अपात्र,फिर पात्रता पर सवाल! सरगुजा की संविदा भर्ती में कथित दोहरा मापदंड

Share

  • सरगुजा में संविदा भर्ती पर सवालों का घेरा,अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच की मांग…
  • फर्जी अनुभव का आरोप,पात्रता पर विवाद…महिला बाल विकास विभाग की भर्ती सवालों में…
  • गंभीर सर्जरी सरकारी अस्पताल में संभव तो प्रसूता को स्थानीय स्तर पर ऑपरेशन की सुविधा कितनी सुलभ? स्वास्थ्य सेवाओं के दावों के बीच मातृ स्वास्थ्य व्यवस्था की समीक्षा जरूरी
  • संविदा भर्ती में किस पर मेहरबानी? अनुभव प्रमाण-पत्रों को लेकर कलेक्टर से शिकायत
  • अनुभव प्रमाण-पत्रों पर विवाद,चयन समिति की भूमिका पर उठे सवाल
  • सरगुजा में भर्ती प्रक्रिया पर सवाल, अंतिम सूची से पहले जांच की मांग
  • किसी का अनुभव खारिज,किसी को पात्रता का लाभ? भर्ती प्रक्रिया पर अभ्यर्थी की आपत्ति
  • महिला बाल विकास विभाग की भर्ती में पारदर्शिता पर सवाल, कलेक्टर तक पहुंचा मामला
  • पीएमएमवीवाई ऑपरेटर पद के अभ्यर्थी ने कलेक्टर को सौंपी दावा-आपत्ति,अनुभव प्रमाण-पत्रों और चयन प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच की मांग
  • सरगुजा में संविदा भर्ती पर सवालों का घेरा,अनुभव प्रमाण-पत्रों से लेकर चयन समिति की भूमिका तक उठे गंभीर प्रश्न
  • महिला एवं बाल विकास विभाग की भर्ती प्रक्रिया पर विवाद,अनुभव की अवधि, शैक्षणिक योग्यता,वेतन भुगतान के प्रमाण और चयन समिति के निर्णयों की निष्पक्ष जांच की मांग


-न्यूज डेस्क-
अंबिकापुर,18 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
सरकारी नौकरी पाने की उम्मीद लेकर आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के लिए भर्ती प्रक्रिया केवल परीक्षा या मेरिट सूची तक सीमित नहीं होती,उनकी पात्रता का निर्धारण निर्धारित शैक्षणिक योग्यता, अनुभव,प्रमाण-पत्रों और दस्तावेजों के सत्यापन के आधार पर किया जाता है,ऐसे में यदि किसी भर्ती प्रक्रिया में पात्रता निर्धारण को लेकर ही सवाल खड़े होने लगें, तो चयन समिति की कार्यप्रणाली और विभागीय पारदर्शिता की जांच की मांग उठना स्वाभाविक है,सरगुजा जिले के महिला एवं बाल विकास विभाग में संविदा पदों पर भर्ती को लेकर सामने आई शिकायत ने इसी तरह के सवाल खड़े किए हैं।
पीएमएमवीवाई यानी प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत डेटा एंट्री ऑपरेटर पद से संबंधित पात्रता और अनुभव प्रमाण-पत्रों को लेकर अभ्यर्थी आशुतोष कश्यप ने 21 सितंबर 2026 को कलेक्टर,सरगुजा के समक्ष लिखित दावा-आपत्ति प्रस्तुत की है,शिकायत में मोहम्मद शहनवाज के अनुभव प्रमाण-पत्रों,शैक्षणिक योग्यता तथा पात्रता निर्धारण की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए अंतिम सूची तैयार करने से पहले मामले की जांच करने का अनुरोध किया गया है,शिकायतकर्ता का आरोप है कि अनुभव के मूल्यांकन और पात्रता निर्धारण में सभी अभ्यर्थियों के लिए समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए थे,लेकिन चयन प्रक्रिया में कथित विसंगतियां सामने आई हैं,आवेदन में पुराने चयन निर्णयों,अनुभव की अवधि और प्रस्तुत दस्तावेजों की जांच की मांग की गई है, हालांकि,शिकायत में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी उपलब्ध नहीं है,इसलिए विभागीय अभिलेखों,चयन समिति के निर्णय और संबंधित अभ्यर्थियों के मूल दस्तावेजों का परीक्षण जरूरी है,इसके बावजूद शिकायत ने भर्ती प्रक्रिया की पारदर्शिता और पात्रता निर्धारण के आधार को लेकर महत्वपूर्ण प्रश्न अवश्य खड़े कर दिए हैं।
विज्ञापन से चयन सूची तक,कहां और कैसे तय हुई पात्रता?
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज विज्ञापन क्रमांक 937/स्था./मबावि./2023-24 है, जिसका उल्लेख शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में किया है,शिकायत में इस विज्ञापन की तारीख 6 अक्टूबर 2023 बताई गई है, आवेदक ने इसी भर्ती प्रक्रिया से संबंधित अनुभव प्रमाण-पत्रों और पात्रता निर्धारण पर आपत्ति जताई है,आवेदन के अनुसार, मोहम्मद शहनवाज के संबंध में पूर्व चयन प्रक्रिया के दौरान अनुभव को लेकर आपत्ति की गई थी और उन्हें अपात्र किए जाने का उल्लेख है, शिकायतकर्ता ने सवाल उठाया है कि यदि किसी अभ्यर्थी को अनुभव की कमी या दस्तावेजों के आधार पर अपात्र माना गया था, तो बाद में उनकी पात्रता स्वीकार किए जाने के पीछे क्या आधार रहा,यहां मूल प्रश्न किसी अभ्यर्थी के पक्ष या विपक्ष में निर्णय लेने का नहीं,बल्कि यह जानने का है कि चयन समिति ने नियमों की व्याख्या किस तरह की,क्या पहले और बाद के निर्णयों में कोई नया दस्तावेज प्रस्तुत किया गया था? क्या अनुभव प्रमाण-पत्रों का पुनः सत्यापन हुआ था? क्या चयन समिति ने अपने निर्णय में बदलाव के कारणों को लिखित रूप से दर्ज किया था? यदि किसी अभ्यर्थी ने दावा-आपत्ति के दौरान अतिरिक्त दस्तावेज प्रस्तुत किए और उन दस्तावेजों के आधार पर उसकी पात्रता स्वीकार की गई, तो यह नियमों के अनुरूप हो सकता है,लेकिन यदि समान परिस्थितियों में अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए अलग-अलग मापदंड अपनाए गए हों, तो उस अंतर का स्पष्ट और दस्तावेजी आधार होना चाहिए, यही वह बिंदु है जिस पर जिला प्रशासन को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए,चयन समिति के कार्यवृत्त,पात्र-अपात्र सूची,दावा-आपत्तियों के निराकरण और अंतिम निर्णयों का परीक्षण किए बिना विवाद का वास्तविक स्वरूप सामने नहीं आ सकता।
अनुभव प्रमाण-पत्र की वास्तविकता की जांच कैसे हुई?
शिकायत में अनुभव प्रमाण-पत्रों के आधार पर पात्रता स्वीकार किए जाने पर आपत्ति उठाई गई है,आवेदक ने अनुभव की अवधि और कार्य की प्रकृति की जांच की आवश्यकता बताई है,ऐसे मामलों में यह देखना महत्वपूर्ण होता है कि संबंधित अभ्यर्थी ने किस संस्थान में कार्य किया,उसका पदनाम क्या था,कार्य की वास्तविक प्रकृति क्या थी और अनुभव की अवधि विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप थी या नहीं,केवल प्रमाण-पत्र पर अंकित तारीखों को देखकर अनुभव की वैधता का अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता,जरूरत पड़ने पर प्रमाण- पत्र जारी करने वाले संस्थान से जानकारी मांगी जा सकती है,संस्थान के नियुक्ति आदेश,उपस्थिति रिकॉर्ड,कार्यमुक्ति प्रमाण-पत्र,भुगतान संबंधी अभिलेख और अन्य प्रासंगिक दस्तावेजों का मिलान किया जा सकता है,इस मामले में भी सवाल यही है कि क्या संबंधित अनुभव प्रमाण-पत्र जारी करने वाले संस्थान से उसकी पुष्टि कराई गई थी? यदि कराई गई थी तो सत्यापन रिपोर्ट में क्या दर्ज है? और यदि कोई आपत्ति पहले सामने आई थी तो उसका निराकरण किस आधार पर किया गया? इन प्रश्नों का जवाब विभागीय रिकॉर्ड से मिलना चाहिए, किसी शिकायत या संदेह के आधार पर प्रमाण-पत्र को फर्जी घोषित करना उचित नहीं होगा, लेकिन प्रमाण-पत्र की वैधता पर विशिष्ट आपत्ति होने पर उसका सत्यापन करना भी प्रशासन की जिम्मेदारी है।
वेतन पर्ची और बैंक स्टेटमेंट का मुद्दा भी महत्वपूर्ण
अनुभव की पुष्टि के संबंध में वेतन भुगतान के दस्तावेज भी चर्चा में हैं,शिकायतकर्ता ने वेतन पर्ची और बैंक स्टेटमेंट जैसे प्रमाणों के आधार पर अनुभव की जांच की आवश्यकता जताई है,ऐसे दस्तावेज यह स्पष्ट करने में मदद कर सकते हैं कि संबंधित अवधि में अभ्यर्थी को वेतन भुगतान हुआ था या नहीं, हालांकि,वेतन पर्ची या बैंक स्टेटमेंट का अभाव अपने आप में यह साबित नहीं करता कि किसी व्यक्ति ने कार्य ही नहीं किया, यह भी देखना होगा कि संबंधित विज्ञापन और लागू भर्ती नियमों में कौन-कौन से दस्तावेज अनिवार्य किए गए थे,यदि नियमों में वेतन भुगतान के प्रमाण की स्पष्ट मांग थी,तो सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेजों की उसी कसौटी पर जांच की जानी चाहिए,यदि किसी विशेष परिस्थिति में वैकल्पिक प्रमाण स्वीकार किए गए, तो उसके पीछे नियमसम्मत आधार होना चाहिए, यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि दस्तावेजों की कमी के कारण किसी अभ्यर्थी को अपात्र किया गया था तो क्या उसे नियमानुसार दावा-आपत्ति प्रस्तुत करने का अवसर मिला,इसी तरह, किसी दूसरे अभ्यर्थी के दस्तावेजों में कमी पाए जाने पर उसके मामले में क्या प्रक्रिया अपनाई गई,इस पूरे विवाद का समाधान आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि समान नियम,समान अवसर और निष्पक्ष दस्तावेजी जांच से ही संभव हो सकता है।
मिशन शक्ति की भर्ती और विभागीय विज्ञापन में क्या दर्ज है?
महिला एवं बाल विकास विभाग,सरगुजा के उपलब्ध दस्तावेजों में मिशन शक्ति योजना के अंतर्गत महिला सशक्तीकरण केंद्र के संचालन के लिए संविदा पदों पर भर्ती का भी उल्लेख है, विभागीय प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार,वर्ष 2026 में तीन पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, इनमें जेंडर विशेषज्ञ, आईटी ऑपरेटर और प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के अंतर्गत डेटा एंट्री ऑपरेटर का एक-एक पद शामिल था, विज्ञप्ति में आवेदन की अंतिम तिथि 20 जुलाई 2026 निर्धारित होने की जानकारी दी गई थी, दस्तावेजों के साथ अनुभव संबंधी प्रमाण प्रस्तुत करने तथा निर्धारित शर्तों के अनुसार उनकी जांच किए जाने का उल्लेख भी भर्ती प्रक्रिया के संदर्भ में महत्वपूर्ण है,लेकिन यहां एक आवश्यक तथ्य स्पष्ट करना होगा, शिकायतकर्ता के आवेदन में वर्ष 2023 के विज्ञापन का उल्लेख है,जबकि उपलब्ध प्रेस विज्ञप्ति वर्ष 2026 की भर्ती से संबंधित है,इसलिए दोनों प्रक्रियाओं को एक ही भर्ती मान लेना उचित नहीं होगा,यह पता लगाना जरूरी है कि शिकायत किस चयन सूची और किस पद के अंतिम निर्णय से संबंधित है तथा वर्ष 2026 के दस्तावेज उस शिकायत से सीधे जुड़े हैं या केवल विभाग की अलग भर्ती प्रक्रिया का संदर्भ देते हैं,यदि दोनों प्रक्रियाओं के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध है,तो विभाग को उसका दस्तावेजी स्पष्टीकरण देना चाहिए,यदि दोनों अलग-अलग भर्तियां हैं,तो उनके नियमों, विज्ञापनों और चयन सूचियों का अलग-अलग परीक्षण किया जाना चाहिए।
क्या चयन समिति के निर्णयों का रिकॉर्ड सार्वजनिक होगा?
भर्ती प्रक्रिया में चयन समिति की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है,समिति का दायित्व केवल दस्तावेज जमा करना और सूची तैयार करना नहीं, बल्कि विज्ञापन की शर्तों के अनुरूप पात्रता का निर्धारण करना भी है,जब किसी अभ्यर्थी की ओर से लिखित दावा-आपत्ति दी जाती है,तो उसके प्रत्येक बिंदु पर विचार कर निर्णय लेना आवश्यक होता है,यदि आपत्ति स्वीकार की जाती है,तो उसके कारण दर्ज होने चाहिए,यदि आपत्ति खारिज की जाती है,तो उसका आधार भी स्पष्ट होना चाहिए।
शिकायतकर्ता की मां-अंतिम सूची से पहले हो निष्पक्ष जांच
आशुतोष कश्यप ने अपने आवेदन में कलेक्टर से अनुरोध किया है कि उनकी दावा-आपत्ति पर विचार करते हुए अंतिम सूची तैयार करने से पहले निर्णय लिया जाए,आवेदन में अनुभव प्रमाण-पत्रों और पात्रता निर्धारण को लेकर उठाए गए सवालों की जांच करने की मांग की गई है, शिकायतकर्ता का पक्ष है कि यदि चयन प्रक्रिया में अलग-अलग अभ्यर्थियों के लिए अलग मापदंड अपनाए गए हैं,तो इससे पात्रता निर्धारण की निष्पक्षता प्रभावित हो सकती है,उनका आग्रह है कि सभी संबंधित दस्तावेजों की जांच कर स्पष्ट निर्णय लिया जाए,इस मामले में प्रशासन के सामने जिम्मेदारी है की शिकायत में उठाए गए सवालों का निष्पक्ष परीक्षण करना,जांच में यदि कोई अनियमितता सामने आती है तो लागू नियमों के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है, वहीं,यदि आरोप प्रमाणित नहीं होते हैं तो संबंधित अभ्यर्थी की पात्रता पर लगाए जा रहे संदेह का भी समाधान होना चाहिए।
इस मामले में प्रशासन निम्नलिखित बिंदुओं
पर स्थिति स्पष्ट कर सकता है…

संबंधित पद के लिए जारी विज्ञापन की मूल शर्तें क्या थीं?
मोहम्मद शहनवाज के अनुभव प्रमाण-पत्रों का सत्यापन किस स्तर पर हुआ?
पूर्व में अपात्रता का निर्णय हुआ था तो उसके कारण क्या थे?
बाद की प्रक्रिया में पात्रता स्वीकार की गई हो तो उसके पीछे कौन-से नए दस्तावेज या नियमगत आधार थे?
अन्य अभ्यर्थियों के अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच भी समान प्रक्रिया से हुई या नहीं?
आशुतोष कश्यप की 21 सितंबर 2026 की दावा-आपत्ति पर क्या निर्णय लिया गया?

  1. अंतिम चयन सूची जारी हो चुकी है या प्रक्रिया अभी लंबित है?
    इन प्रश्नों का जवाब मिलने से भर्ती प्रक्रिया के बारे में तथ्यात्मक स्थिति स्पष्ट हो सकती है, साथ ही,यह भी सुनिश्चित किया जा सकता है कि किसी अभ्यर्थी के अधिकारों का हनन न हो और सरकारी भर्ती में पारदर्शिता बनी रहे।
    महिला एवं बाल विकास विभाग की जवाबदेही भी जरूरी
    महिला एवं बाल विकास विभाग महिलाओं और बच्चों से जुड़ी महत्वपूर्ण योजनाओं के क्रियान्वयन की जिम्मेदारी निभाता है, ऐसे विभाग में संविदा नियुक्तियों की प्रक्रिया का निष्पक्ष और पारदर्शी होना विशेष महत्व रखता है, नियुक्तियों में अनिश्चितता या पात्रता को लेकर विवाद न केवल अभ्यर्थियों को प्रभावित करता है,बल्कि विभागीय प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े करता है,इसलिए शिकायत को केवल दो अभ्यर्थियों के बीच का विवाद मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए,यदि पात्रता निर्धारण को लेकर वास्तविक विसंगतियां हैं,तो उनका समाधान प्रशासनिक स्तर पर होना चाहिए, वहीं,यदि निर्णय नियमों के अनुरूप लिए गए हैं,तो विभाग को दस्तावेजी आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए,यह भी जरूरी है कि शिकायतकर्ता को उसकी आपत्ति पर लिए गए निर्णय की जानकारी मिले और संबंधित अभ्यर्थियों को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाए, इससे जांच की निष्पक्षता बनी रहेगी और भर्ती प्रक्रिया को लेकर अनावश्यक विवाद की गुंजाइश कम होगी।
    अब कलेक्टर के निर्णय पर टिकी निगाहें…
    21 सितंबर 2026 को प्रस्तुत दावा-आपत्ति के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि जिला प्रशासन ने इस पर क्या कार्रवाई की, क्या संबंधित विभाग से रिपोर्ट मांगी गई? क्या अनुभव प्रमाण-पत्रों की जांच के निर्देश दिए गए? क्या चयन समिति के निर्णयों की समीक्षा की गई? और क्या अंतिम सूची तैयार करने से पहले शिकायत के सभी बिंदुओं का निराकरण किया गया? उपलब्ध शिकायत-पत्र अपने आप में अनियमितता साबित नहीं करता, लेकिन पात्रता निर्धारण पर उठाए गए सवालों की जांच की मांग जरूर करता है, सरकारी भर्ती में पारदर्शिता का अर्थ केवल सूची प्रकाशित कर देना नहीं, बल्कि उस सूची के पीछे अपनाई गई प्रक्रिया को भी नियमसम्मत और जवाबदेह बनाना है, यदि सभी अभ्यर्थियों के दस्तावेज एक ही कसौटी पर परखे गए हैं, तो विभाग को इसे रिकॉर्ड के आधार पर स्पष्ट करना चाहिए,और यदि जांच में किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो उसके लिए जिम्मेदारी तय होनी चाहिए, अब देखना होगा कि सरगुजा जिला प्रशासन इस दावा-आपत्ति पर क्या रुख अपनाता है और भर्ती प्रक्रिया से जुड़े सवालों का जवाब दस्तावेजों के आधार पर सामने आता है या नहीं।

Share

Check Also

अम्बिकापुर@ चैतन्य देवियों की झांकी में उमड़ रही श्रद्धालुओं की भीड़, सांसद चिंतामणि महाराज हुए शामिल

Share आध्यात्मिक ज्ञान से जीवन को श्रेष्ठ बनाने की आवश्यकता : चिंतामणि महाराज -संवाददाता-अम्बिकापुर,18 अक्टूबर …

Leave a Reply