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बैकुंठपुर@जनता को सड़क चाहिए,निर्माण में पुलिया मिल गई! 12 लाख के काम पर सवालों की बौछार

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  • खनिज न्यास की राशि पर सवाल, नरसिंहपुर में पुलिया निर्माण विवादों में, गुणवत्ता से लेकर स्थल चयन तक उठे सवाल
  • 12 लाख की पुलिया,न सड़क न कनेक्टिविटी! सरईपारा की बदहाल सड़क छोड़ निर्माण पर सवाल
  • नदी के डुबान क्षेत्र में पुलिया निर्माण का आरोप, खनिज न्यास निधि के इस्तेमाल पर जांच की मांग
  • क्रेशर गिट्टी की जगह लाल पत्थर इस्तेमाल करने का आरोप,पुलिया निर्माण की गुणवत्ता पर सवाल
  • जनपद की जांच पर सवाल,पटवारी हड़ताल से राजस्व जांच की राह मुश्किल, नरसिंहपुर पुलिया विवाद गहराया

-रवि सिंह-
बैकुंठपुर,17 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। कोरिया जिले के बैकुंठपुर जनपद पंचायत अंतर्गत मोदीपारा ग्राम पंचायत के आश्रित ग्राम नरसिंहपुर में निर्माणाधीन पुलिया अब विवादों में घिरती नजर आ रही है,खनिज न्यास निधि (डीएमएफ) से करीब 12 लाख रुपये की लागत से कराए जा रहे इस निर्माण कार्य की उपयोगिता, निर्माण स्थल के चयन और इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर सवाल उठाए गए हैं, स्थानीय वार्ड पंच शानू खान ने आरोप लगाया है कि जिस स्थान पर पुलिया बनाई जा रही है, वहां से आगे न तो कोई सड़क जुड़ती है और न ही निकट भविष्य में सड़क निर्माण की कोई स्पष्ट योजना दिखाई दे रही है,ऐसे में सरकारी राशि से हो रहे इस निर्माण का ग्रामीणों को कितना लाभ मिलेगा,यह बड़ा सवाल बन गया है, मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है,क्योंकि ग्रामीणों के अनुसार गांव के सरईपारा में कच्ची सड़क की स्थिति खराब है, बरसात के दिनों में इस मार्ग पर आवागमन करना मुश्किल हो जाता है, वार्ड पंच का कहना है कि यदि इसी राशि से सरईपारा की सड़क का निर्माण या सुधार कराया जाता,तो ग्रामीणों को अधिक प्रत्यक्ष लाभ मिल सकता था,अब सवाल यह है कि विकास कार्यों के लिए राशि खर्च करते समय स्थानीय जरूरतों और आम लोगों की सुविधा को कितनी प्राथमिकता दी गई?
निर्माण सामग्री पर भी उठे सवाल- विवाद केवल पुलिया के स्थान तक सीमित नहीं है,वार्ड पंच ने निर्माण में इस्तेमाल की जा रही सामग्री की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए हैं,उनका दावा है कि स्वीकृत इस्टीमेट के अनुसार क्रेशर की गिट्टी का इस्तेमाल किया जाना था, लेकिन मौके पर हाथ से तोड़े गए लाल पत्थर का उपयोग किया जा रहा है, हालांकि,सामग्री के संबंध में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र तकनीकी पुष्टि अभी सामने आना बाकी है, ऐसे में जरूरी है कि निर्माण स्थल से सामग्री के नमूने लेकर निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप जांच कराई जाए,स्वीकृत प्राक्कलन,निर्माण सामग्री के बिल,गुणवत्ता परीक्षण और कार्य की तकनीकी निगरानी से जुड़े अभिलेखों का परीक्षण भी किया जाना चाहिए,यदि स्वीकृत सामग्री के स्थान पर मानकों से अलग सामग्री का उपयोग प्रमाणित होता है,तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
पटवारियों की अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच कैसे होगी जांच?- ग्रामीणों ने जांच प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठाए हैं, मिली जानकारी के अनुसार, पटवारी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं, ऐसे में यदि निर्माण स्थल की राजस्व स्थिति, डुबान क्षेत्र की सीमा या भूमि संबंधी अभिलेखों का सत्यापन आवश्यक है, तो जांच किस प्रक्रिया से पूरी की जाएगी? यह सवाल भी महत्वपूर्ण हो गया है, हालांकि,पटवारियों की हड़ताल के कारण जांच पूरी तरह रुक जाएगी,ऐसा निष्कर्ष बिना विभागीय जानकारी के नहीं निकाला जा सकता, प्रशासन को यह स्पष्ट करना होगा कि मामले की जांच के लिए कौन-सा अधिकारी या विभाग जिम्मेदार होगा और स्थल की वास्तविक स्थिति का सत्यापन किस तरह कराया जाएगा,जांच केवल कागजों तक सीमित न रहे,बल्कि मौके की स्थिति और तकनीकी पहलुओं को भी इसमें शामिल किया जाए।
कलेक्टर रोक्तिमा यादव ने कहा…अनियमितता मिली तो कराई जाएगी जांच-इस पूरे मामले में कोरिया कलेक्टर रोक्तिमा यादव से चर्चा की गई,उन्होंने कहा कि किसी भी निर्माण कार्य में गुणवत्ता अत्यंत आवश्यक है,यदि कार्य में कोई अनियमितता है या निर्माण स्वीकृत स्थल के बजाय किसी अन्य स्थान पर कराया जा रहा है,तो इसकी जांच कराई जाएगी और वास्तविक स्थिति का पता लगाया जाएगा,कलेक्टर के इस आश्वासन के बाद अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण स्थल, सामग्री की गुणवत्ता, स्वीकृत प्राक्कलन और डुबान क्षेत्र से जुड़े बिंदुओं की जांच किस स्तर पर कराई जाती है, ग्रामीणों की अपेक्षा है कि जांच निष्पक्ष हो, मौके की वास्तविक स्थिति सामने आए और यदि किसी स्तर पर अनियमितता प्रमाणित होती है,तो जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
अब निगाहें जांच पर-नरसिंहपुर की निर्माणाधीन पुलिया को लेकर उठे सवालों का जवाब आरोप-प्रत्यारोप से नहीं,बल्कि निष्पक्ष तकनीकी और राजस्व परीक्षण से ही मिल सकता है, करीब 12 लाख रुपये की लागत वाले इस कार्य में स्थान चयन से लेकर निर्माण सामग्री तक हर पहलू की जांच जरूरी है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खनिज न्यास निधि से किया जा रहा खर्च ग्रामीणों की वास्तविक जरूरतों को पूरा कर रहा है या नहीं।
जहां सड़क ही नहीं,वहां पुलिया की उपयोगिता पर सवाल-
पुलिया निर्माण के स्थान को लेकर वार्ड पंच शानू खान ने आपत्ति जताई है, उनका आरोप है कि निर्माण स्थल से आगे सड़क का संपर्क नहीं है,ऐसे में पुलिया किस मार्ग को जोड़ने और किस आबादी को सुविधा देने के उद्देश्य से बनाई जा रही है,यह स्पष्ट होना चाहिए, किसी भी निर्माण कार्य की उपयोगिता केवल उसके बन जाने से साबित नहीं होती, बल्कि यह भी जरूरी है कि वह लोगों की वास्तविक जरूरतों को पूरा करे,ग्रामीणों की मांग है कि निर्माण स्थल का भौतिक सत्यापन कराया जाए और यह जांचा जाए कि पुलिया स्वीकृत स्थल पर ही बनाई जा रही है या नहीं,साथ ही,योजना के दस्तावेजों में दर्ज उद्देश्य, स्वीकृत प्राक्कलन और मौके की वास्तविक स्थिति का मिलान भी किया जाए, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि खर्च की जा रही राशि जनहित में कितनी उपयोगी साबित होगी।
क्या खनिज न्यास निधि की
राशि का उपयोग जरूरत के अनुसार हो रहा है?

खनिज न्यास निधि का उद्देश्य खनन प्रभावित क्षेत्रों और वहां के लोगों के हित में विकास कार्यों को बढ़ावा देना है, ऐसे में इस निधि से कराए जाने वाले प्रत्येक निर्माण की उपयोगिता, गुणवत्ता और पारदर्शिता महत्वपूर्ण है,नरसिंहपुर में करीब 12 लाख रुपये की लागत से बन रही पुलिया को लेकर उठे सवालों के बीच यह स्पष्ट होना चाहिए कि स्थल का चयन किन आधारों पर किया गया,निर्माण से किन लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है और क्या काम स्वीकृत तकनीकी मानकों के अनुसार कराया जा रहा है,यदि पुलिया की उपयोगिता को लेकर उठाई गई आपत्तियां सही पाई जाती हैं,तो यह केवल एक निर्माण कार्य का मामला नहीं रहेगा,बल्कि योजना निर्माण और सरकारी राशि के उपयोग की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े करेगा,वहीं,यदि निर्माण स्थल और सामग्री स्वीकृत मानकों के अनुरूप पाए जाते हैं, तो प्रशासन को जांच के निष्कर्षों के आधार पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।
नदी के डुबान क्षेत्र में निर्माण का आरोप,जांच के अधिकार पर भी सवाल
मामले में एक अन्य महत्वपूर्ण बिंदु यह है कि निर्माण स्थल नदी के डुबान क्षेत्र में होने की बात कही जा रही है,इस दावे की पुष्टि के लिए स्थल की राजस्व स्थिति,नदी क्षेत्र की सीमा और संबंधित तकनीकी अभिलेखों की जांच आवश्यक है,शिकायतकर्ता पक्ष का कहना है कि डुबान क्षेत्र से जुड़े पहलुओं की जांच राजस्व विभाग के माध्यम से कराई जानी चाहिए,न कि केवल जनपद पंचायत की जांच पर निर्भर रहा जाए, यह भी आरोप लगाया गया है कि जनपद पंचायत की ओर से जांच की औपचारिकता पूरी कर ली गई है,हालांकि,जांच में वास्तव में क्या परीक्षण किया गया,किन अधिकारियों ने स्थल का निरीक्षण किया और क्या निष्कर्ष निकाला गया,इसकी जानकारी सामने आना बाकी है, इसलिए जांच रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक होने से ही स्थिति अधिक स्पष्ट हो सकेगी।


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