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रायपुर@शराब घोटाले में आबकारी अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव सस्पेंड

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आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच के बाद पूरक आरोप पत्र पेश किया गया


रायपुर,17 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ शराब घोटाले से जुड़े मामले में आबकारी विभाग के अपर आयुक्त आशीष श्रीवास्तव को राज्य सरकार ने सस्पेंड कर दिया है। आर्थिक अपराध अन्वेषण एवं एंटी करप्शन ब्यूरो की जांच के बाद उनके खिलाफ रायपुर की विशेष अदालत में पूरक आरोप पत्र पेश किया गया है। इसके बाद आबकारी विभाग ने शनिवार को निलंबन का आदेश जारी किया। यह आदेश 14 अक्टूबर 2026 से लागू माना जाएगा। निलंबन के दौरान आशीष श्रीवास्तव का मुख्यालय नवा रायपुर स्थित आबकारी आयुक्त कार्यालय रहेगा। इस अवधि में उन्हें नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
जांच के बाद कोर्ट में
पेश किया पूरक चालान

विभागीय आदेश के मुताबिक,ईओडब्ल्यू-एसीबी में शराब घोटाले से जुड़े मामले में अपराध क्रमांक 04/2024 दर्ज है। इस मामले में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और भारतीय दंड संहिता (की अलग-अलग धाराओं के तहत जांच की गई है। जांच के दौरान तत्कालीन उपायुक्त आबकारी आशीष श्रीवास्तव के खिलाफ पहली नजर में आरोप सही पाए जाने की बात आदेश में कही गई है। आदेश के अनुसार, उनके खिलाफ पूरक आरोप पत्र 13 अक्टूबर 2026 को तैयार किया गया और 14 अक्टूबर को रायपुर की विशेष अदालत में पेश किया गया। इसके बाद छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत उन्हें निलंबित कर दिया गया।
अवैध कमीशन और बिक्री के गंभीर आरोप
जांच एजेंसी के दस्तावेज के अनुसार इस पूरे तंत्र के माध्यम से आबकारी व्यवसाय में अवैध कमीशन की वसूली की जा रही थी। सरकारी मदिरा दुकानों के जरिये बिना किसी कागजी हिसाब-किताब के देसी मदिरा बेची गई। इसके साथ ही शराब निर्माण करने वाली डिस्टिलरी के बीच सांठगांठ करके बाजार में उनकी हिस्सेदारी तय करने जैसे गंभीर आरोप भी लगाए गए हैं। प्राथमिकी में यह भी उल्लेख है कि छत्तीसगढ़ स्टेट मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रबंध संचालक पद पर रहते हुए अरुणपति त्रिपाठी ने इस पूरे अवैध नेटवर्क का संचालन करने और प्रशासनिक अनियमितताओं को अंजाम देने में मुख्य भूमिका निभाई थी।
ईडी के प्रतिवेदन के बाद एसीबी-ईओडब्ल्यू ने दर्ज किया था केस
छत्तीसगढ़ शराब घोटाले के मामले में एसीबी-ईओडब्ल्यूने 17 जनवरी 2024 को एफआईआर दर्ज की थी। इसके बाद ईडी से मिले रिपोर्ट और जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई गई। इस मामले में करीब 50 लोगों को आरोपी बनाया गया था। इनमें आबकारी विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं। ईडी ने 11 जुलाई 2024 को एसीबी-ईओडब्ल्यू को एक गोपनीय रिपोर्ट भेजा था। इसमें तत्कालीन ढ्ढ्रस् अधिकारी अनिल टुटेजा, आबकारी अधिकारी अरुणपति त्रिपाठी और अन्य लोगों की कथित भूमिका का जिक्र किया गया था।


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