सात महीने बाद भी खुदी सड़कों की मरम्मत अधूरी,पाइपलाइन बिछाने से लेकर वाल्व चैंबर निर्माण तक में मानकों की अनदेखी का आरोप
नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने एसयूडीए के वरिष्ठ अधिकारियों से मांगी उच्चस्तरीय जांच
-संवाददाता-
खोंगापानी/एमसीबी,15 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। नगर पंचायत खोंगापानी में अमृत मिशन 2.0 के तहत कराए जा रहे पेयजल व्यवस्था के कार्य अब सवालों के घेरे में हैं,केंद्र और राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना के क्रियान्वयन में कथित अनियमितताओं,निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और तकनीकी मानकों के पालन को लेकर नगर पंचायत उपाध्यक्ष विवेक कुमार चतुर्वेदी ने मोर्चा खोल दिया है, उन्होंने राज्य शहरी विकास अभिकरण रायपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी सहित संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को लिखित शिकायत भेजकर पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है,शिकायत में पाइपलाइन विस्तार के दौरान सड़कों को नुकसान पहुंचाने,निर्धारित मानकों के अनुरूप खुदाई नहीं करने,पुरानी पेयजल पाइपलाइनों को क्षतिग्रस्त करने और जांच प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही बरते जाने जैसे मुद्दे उठाए गए हैं, चतुर्वेदी का कहना है कि योजना का उद्देश्य नागरिकों को बेहतर पेयजल सुविधा उपलब्ध कराना है,लेकिन यदि निर्माण कार्यों में तकनीकी मानकों और गुणवत्ता की अनदेखी होती है,तो इसका खामियाजा अंततः नगर की जनता को भुगतना पड़ेगा।
जांच के नाम पर औपचारिकता का आरोप विवेक चतुर्वेदी ने उठाई जवाबदेही की मांग…
नगर पंचायत उपाध्यक्ष विवेक कुमार चतुर्वेदी ने अपनी शिकायत में जांच प्रक्रिया की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए हैं, उनके अनुसार, सुडा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के निर्देश पर सरगुजा संभाग के नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के संयुक्त संचालक की अध्यक्षता में अमृत मिशन 2.0 के कार्यों के भौतिक सत्यापन के लिए जांच दल गठित किया गया है,शिकायत में जांच दल के सदस्यों के रूप में संभागीय कार्यपालन अभियंता वसुंधरा भगत,सहायक अभियंता विवेक गुप्ता और सब इंजीनियर विनीत जायसवाल का उल्लेख किया गया है,चतुर्वेदी का आरोप है कि जांच दल के खोंगापानी पहुंचने के बावजूद निर्माण कार्यों का तकनीकी परीक्षण उस स्तर पर नहीं किया जा रहा है, जिसकी आवश्यकता है,उनका दावा है कि अधिकारी चारपहिया वाहन से क्षेत्र का दौरा कर औपचारिक निरीक्षण करते हैं और विस्तृत जांच के बिना लौट जाते हैं, उन्होंने सवाल उठाया है कि यदि निर्माण कार्यों का सत्यापन प्राक्कलन,तकनीकी दस्तावेजों,वास्तविक पैमाइश और निर्धारित मानकों के आधार पर नहीं किया जाएगा, तो कथित अनियमितताओं की पहचान कैसे होगी? हालांकि,जांच दल की वास्तविक कार्यप्रणाली और शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि संबंधित विभागीय अभिलेखों एवं अधिकारियों के पक्ष से होना शेष है।
सात महीने से सड़कें बदहाल,पाइपलाइन के नाम पर खोदी गईं सीसी सड़कें
विवेक कुमार चतुर्वेदी ने शिकायत में सबसे प्रमुख मुद्दा सड़कों की बदहाली का उठाया है,उनके अनुसार,पाइपलाइन विस्तार के लिए लगभग सात महीने पहले नगर के मुख्य मार्गों और विभिन्न वार्डों की पक्की सीसी सड़कों को खोदा गया था,आरोप है कि खुदाई के बाद सड़कों को निर्धारित मानकों के अनुसार पूर्व स्थिति में बहाल नहीं किया गया,इसके चलते कई स्थानों पर गड्ढे और क्षतिग्रस्त हिस्से आवागमन में परेशानी पैदा कर रहे हैं,चतुर्वेदी ने इस स्थिति पर सवाल उठाते हुए कहा है कि विकास कार्यों के नाम पर नागरिकों को असुविधा का सामना करना पड़े और लंबे समय तक सड़कों की मरम्मत नहीं हो, तो संबंधित एजेंसी तथा निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए,उनका कहना है कि पाइपलाइन बिछाने के साथ-साथ सड़क बहाली भी कार्य का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए यह जांचना जरूरी है कि संबंधित ठेकेदार ने सड़क मरम्मत के प्रावधानों का पालन किया है या नहीं और विभागीय अधिकारियों ने कार्य की गुणवत्ता का सत्यापन किस आधार पर किया है।
एसईसीएल की पुरानी पेयजल पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचाने का आरोप
शिकायत में खोंगापानी क्षेत्र में पहले से संचालित एसईसीएल की पेयजल पाइपलाइनों को नुकसान पहुंचने का मुद्दा भी उठाया गया है,विवेक चतुर्वेदी के अनुसार,अमृत मिशन 2.0 के तहत पाइपलाइन बिछाने के दौरान पुरानी पाइपलाइनों के क्षतिग्रस्त होने की शिकायतें सामने आई हैं,उन्होंने आरोप लगाया है कि क्षतिग्रस्त जीआई पाइपों की मरम्मत में मूल व्यवस्था और तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप सामग्री का इस्तेमाल करने के बजाय कुछ स्थानों पर पीवीसी पाइप लगाए जा रहे हैं, चतुर्वेदी ने इस मामले में संबंधित तकनीकी अधिकारियों से स्पष्टीकरण और जांच की मांग की है,उनका कहना है कि पुरानी पेयजल व्यवस्था को नुकसान पहुंचने से नागरिकों की जलापूर्ति प्रभावित होने की आशंका रहती है,ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि क्षतिग्रस्त पाइपलाइनों की मरम्मत किस तकनीकी मानक के आधार पर की गई,इस्तेमाल की गई सामग्री स्वीकृत प्रावधानों के अनुरूप है या नहीं और इससे पेयजल आपूर्ति की दीर्घकालिक विश्वसनीयता पर कोई प्रतिकूल प्रभाव तो नहीं पड़ेगा।
250 एमएम पाइपलाइन की खुदाई और रेत भराव पर सवाल
अमृत मिशन 2.0 के तकनीकी कार्यों को लेकर भी नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं,शिकायत के अनुसार,लेदरी मार्ग से खोंगापानी तक 250 एमएम व्यास की पाइपलाइन बिछाने के लिए निर्धारित तकनीकी प्रावधानों के अनुसार लगभग 1.30 मीटर गहराई तक खुदाई की जानी थी,चतुर्वेदी का आरोप है कि कुछ स्थानों पर निर्धारित गहराई और पाइपलाइन के नीचे रेत भराव जैसे आवश्यक कार्यों का पालन किए बिना पाइप बिछाने की शिकायतें हैं, उन्होंने 150 एमएम और 100 एमएम की पाइपलाइनों के विस्तार में भी तकनीकी मानकों की जांच कराने की मांग की है, उनका कहना है कि पाइपलाइन बिछाने में खुदाई की गहराई, बेडिंग मटेरियल, पाइपों की सुरक्षा,जोड़ की गुणवत्ता और खुदाई के बाद भराव जैसे पहलू अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। इनमें किसी भी प्रकार की कमी भविष्य में पाइपलाइन क्षतिग्रस्त होने,पानी की आपूर्ति बाधित होने अथवा बार-बार मरम्मत की आवश्यकता पैदा कर सकती है,इसलिए केवल पाइपलाइन बिछा दिए जाने को कार्य की पूर्णता नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि स्वीकृत प्राक्कलन और तकनीकी विशिष्टताओं के अनुरूप कार्य होने की पुष्टि भी जरूरी है।
जनता की परेशानी को लेकर आंदोलन की चेतावनी
विवेक कुमार चतुर्वेदी ने चेतावनी दी है कि यदि शिकायत में उठाए गए मुद्दों पर शीघ्र प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच नहीं कराई गई, तो नगर की जनता के समर्थन से व्यापक जनआंदोलन किया जाएगा,उनका कहना है कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से जुड़ी योजना में गुणवत्ता, पारदर्शिता और जनहित सर्वोपरि होने चाहिए,विकास कार्यों के दौरान सड़कों की बदहाली,पेयजल पाइपलाइनों को नुकसान और तकनीकी मानकों की अनदेखी जैसी शिकायतों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से मांग की है कि खोंगापानी में अमृत मिशन 2.0 के सभी विवादित कार्यों का निष्पक्ष भौतिक सत्यापन कराया जाए, शिकायतों की बिंदुवार जांच की जाए और यदि अनियमितताएं प्रमाणित होती हैं,तो जिम्मेदार एजेंसी अथवा अधिकारियों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाए,चतुर्वेदी ने स्पष्ट किया है कि उनका उद्देश्य नगर की जनता को बेहतर सुविधाएं दिलाना और सरकारी धन से कराए जा रहे कार्यों में गुणवत्ता सुनिश्चित कराना है।
अब विभागीय कार्रवाई पर टिकी नगरवासियों की नजर
खोंगापानी में अमृत मिशन 2.0 के कार्यों को लेकर उठे सवालों के बीच अब संबंधित विभाग की कार्रवाई महत्वपूर्ण हो गई है,नगर पंचायत उपाध्यक्ष विवेक कुमार चतुर्वेदी द्वारा भेजी गई शिकायत में सड़क मरम्मत से लेकर पाइपलाइन बिछाने और जांच प्रक्रिया तक कई बिंदुओं पर सवाल उठाए गए हैं,इन आरोपों की वास्तविकता सामने लाने के लिए निष्पक्ष तकनीकी परीक्षण,संबंधित अभिलेखों का सत्यापन और जिम्मेदार अधिकारियों का पक्ष सामने आना आवश्यक है,अब देखना होगा कि सुडा और संबंधित विभाग शिकायत पर क्या कदम उठाते हैं तथा खोंगापानी में अमृत मिशन 2.0 के कार्यों की गुणवत्ता और कथित अनियमितताओं को लेकर उठे सवालों का समाधान किस प्रकार किया जाता है।
सड़क से ऊंचे वाल्व चैंबर बने दुर्घटना का खतरा
नगर के विभिन्न वार्डों और गलियों में बनाए गए पेयजल वाल्व चैंबर भी शिकायत के दायरे में हैं, विवेक चतुर्वेदी के अनुसार, कुछ स्थानों पर वाल्व चैंबर सड़क के स्तर से काफी ऊंचे बनाए गए हैं। इससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होने के साथ दुर्घटनाओं की आशंका भी बनी रहती है, उन्होंने संबंधित अधिकारियों से ऐसे सभी चैंबरों का स्थल निरीक्षण कर सड़क के स्तर के अनुरूप आवश्यक सुधार कराने की मांग की है, इसके अतिरिक्त, शिकायत में हाउस सर्विस कनेक्शन के दौरान पाइप जोड़ने की तकनीक पर भी सवाल उठाया गया है, चतुर्वेदी का आरोप है कि कुछ स्थानों पर एल्बो का उपयोग किए बिना सीधे पाइप जोड़े जा रहे हैं, उन्होंने इन कनेक्शनों की तकनीकी जांच कर यह सुनिश्चित करने की मांग की है कि पाइपलाइन के जोड़ निर्धारित मानकों के अनुरूप हों और भविष्य में लीकेज या अन्य तकनीकी समस्याओं की आशंका कम की जा सके।
दस्तावेजों से लेकर मौके की पैमाइश तक हो जांच
नगर पंचायत उपाध्यक्ष विवेक कुमार चतुर्वेदी ने पूरे मामले में केवल औपचारिक निरीक्षण के बजाय विस्तृत तकनीकी जांच पर जोर दिया है, शिकायत के प्रमुख बिंदुओं को देखते हुए निर्माण कार्यों के स्वीकृत प्राक्कलन,कार्यादेश,तकनीकी विशिष्टताओं, पाइपलाइन की वास्तविक गहराई,इस्तेमाल की गई सामग्री,सड़क बहाली और वाल्व चैंबर निर्माण की स्थिति का परीक्षण महत्वपूर्ण होगा,इसके साथ ही मौके पर वास्तविक पैमाइश कराकर निर्माण की गुणवत्ता का आकलन करने तथा संबंधित एजेंसी और निगरानी अधिकारियों की जिम्मेदारी निर्धारित करने की मांग की गई है,चतुर्वेदी का कहना है कि यदि शिकायत में उठाए गए बिंदुओं की निष्पक्ष जांच होती है,तो निर्माण कार्यों की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है,इससे न केवल कथित अनियमितताओं की पहचान होगी, बल्कि भविष्य में पेयजल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही भी सुनिश्चित की जा सकेगी।
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