राजीव गांधी पीजी कॉलेज में राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज पर जागरूकता कार्यक्रम,200 से अधिक विद्यार्थियों ने लिया हिस्सा
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,13 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। शिक्षा का उद्देश्य केवल नौकरी प्राप्त करना नहीं, बल्कि अपने ज्ञान और कौशल से समाज की समस्याओं का समाधान करना तथा रोजगार के नए अवसर पैदा करना भी है। विद्यार्थियों को इसी सोच के साथ नवाचार और उद्यमिता की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। यह संदेश मंगलवार को राजीव गांधी शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय,अंबिकापुर में सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय इनोवेशन चैलेंज जागरूकता कार्यक्रम में दिया गया। कार्यक्रम में 200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। जिला उद्योग एवं व्यापार केंद्र के सहायक प्रबंधक सर्वोदय कुमार साहू और प्रबंधक अश्विनी शुक्ला ने मुख्य वक्ता के रूप में विद्यार्थियों को नवाचार,उद्यमिता,स्वरोजगार और उद्योग विकास की संभावनाओं की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि बदलती तकनीक और बाजार व्यवस्था के दौर में नए विचारों के साथ समस्याओं का व्यावहारिक समाधान तलाशना जरूरी है। नवाचार का अर्थ केवल नई मशीन या तकनीक विकसित करना नहीं है,बल्कि किसी मौजूदा सेवा,प्रक्रिया या व्यवसाय को अधिक सरल, किफायती और प्रभावी बनाना भी है। वक्ताओं ने विद्यार्थियों से अपने आसपास की समस्याओं को पहचानकर उनके समाधान के लिए नए विचार विकसित करने का आह्वान किया। कृषि,शिक्षा, स्वास्थ्य,पर्यावरण, परिवहन और स्थानीय बाजार जैसे क्षेत्रों में छोटे-छोटे विचार भी भविष्य में उपयोगी व्यवसाय और रोजगार के अवसर बन सकते हैं। उन्होंने कहा कि किसी विचार को सफल बनाने के लिए उसकी उपयोगिता,लागत,बाजार की मांग और संभावित लाभार्थियों की जरूरतों को समझना जरूरी है। इसके साथ ही उचित योजना, टीम भावना,निरंतर प्रयास और व्यावहारिक क्रियान्वयन भी महत्वपूर्ण हैं।
स्थानीय संसाधनों में उद्यमिता की संभावनाएं : सरगुजा क्षेत्र के संदर्भ में वक्ताओं ने कृषि आधारित गतिविधियों,वन उत्पादों,हस्तशिल्प, खाद्य प्रसंस्करण और डिजिटल सेवाओं से जुड़े व्यवसायों की संभावनाओं पर ध्यान देने की बात कही। उन्होंने विद्यार्थियों को स्थानीय संसाधनों और जरूरतों के आधार पर ऐसे व्यावसायिक विचार विकसित करने के लिए प्रेरित किया,जिनसे क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिले और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर तैयार हों। वक्ताओं ने कहा कि उद्यमिता के लिए बाजार की मांग,उत्पाद की गुणवत्ता, ग्राहक संतुष्टि,विपणन और वित्तीय प्रबंधन की समझ भी जरूरी है। विद्यार्थियों को अपने विषयगत ज्ञान को वास्तविक परिस्थितियों से जोड़ते हुए ऐसे समाधान तलाशने चाहिए,जिनका सामाजिक और आर्थिक महत्व हो। वाणिज्य एवं प्रबंधन के विद्यार्थी अपने ज्ञान का उपयोग व्यावसायिक योजनाएं बनाने और उद्यमों के संचालन में कर सकते हैं। कार्यक्रम में रचनात्मक सोच,आत्मनिर्भरता, संवाद कौशल, नेतृत्व क्षमता और समस्या समाधान की दक्षता विकसित करने पर भी जोर दिया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि नवाचार केवल वैज्ञानिकों या बड़े उद्योगपतियों तक सीमित नहीं है।
कोई भी विद्यार्थी अपनी रुचि, प्रतिभा और अनुभव के आधार पर नए विचार प्रस्तुत कर सकता है। इसके लिए जिज्ञासु बने रहना, प्रयोग करना और असफलताओं से सीखते हुए आगे बढ़ना जरूरी है। सेवा संकल्प अभियान की भावना के अनुरूप आयोजित कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को शिक्षा के व्यावहारिक उपयोग, उद्यमिता और रोजगार सृजन की संभावनाओं से परिचित कराना था। कार्यक्रम में प्रभारी प्राचार्य डॉ. एस.एन. पांडेय उपस्थित रहे। आयोजन में डॉ. उमेश कुमार पांडेय, डॉ. तरुण कुमार राय, डॉ. शम्भू तिर्की, डॉ. बृजेश कुमार, आशुतोष कौशिक, देव प्रकाश दुबे एवं डॉ. रश्मित कोर की सहभागिता रही।
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