होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज में अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान,गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार शाही ने विद्यार्थियों को बताए आईपीआर के महत्व
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,10 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। वैज्ञानिक खोज, शोध और नए विचार तभी व्यापक उपयोग में आ सकते हैं, जब उनके अधिकारों और मौलिकता की सुरक्षा हो। इसी उद्देश्य को लेकर होली क्रॉस वुमेन्स कॉलेज, अंबिकापुर में बौद्धिक संपदा अधिकार (आईपीआर) विषय पर अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान आयोजित किया गया। इसमें विद्यार्थियों और शोधार्थियों को बताया गया कि अपने वैज्ञानिक शोध, रचनात्मक कार्यों और नवाचारों को कानूनी संरक्षण देने के लिए बौद्धिक संपदा अधिकारों की जानकारी क्यों जरूरी है। महाविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग की अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला Frontiers of LifeÑ Biology, Bio technology, Environmental Sciences & Climate Change के तहत शुक्रवार को आयोजित इस कार्यक्रम में गुरु घासीदास विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज के वनस्पति विज्ञान विभाग के प्रोफेसर डॉ. सुशील कुमार शाही ने Empowering InnovatorsÑ Intellectual Property Rights as Tools for Protecting Knowledge and CreativityÓ विषय पर व्याख्यान दिया। डॉ. शाही ने बौद्धिक संपदा अधिकारों की उपयोगिता समझाते हुए बताया कि किसी व्यक्ति के मौलिक विचार,वैज्ञानिक अनुसंधान,रचनात्मक कार्य और नवाचार ज्ञान की महत्वपूर्ण पूंजी हैं। इनका उचित संरक्षण न केवल रचनाकार और शोधकर्ता के अधिकारों को सुरक्षित रखने में मदद करता है,बल्कि नवाचार को प्रोत्साहित करने और उसके जिम्मेदार उपयोग का रास्ता भी खोलता है। उन्होंने विद्यार्थियों एवं युवा नवाचारकर्ताओं के लिए आईपीआर के प्रति जागरूकता को महत्वपूर्ण बताया।
शोध के साथ अधिकारों की जानकारी भी जरूरी : व्याख्यान का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को अकादमिक एवं वैज्ञानिक कार्यों के संरक्षण के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में आईपीआर को केवल कानूनी विषय के रूप में नहीं,बल्कि शोध,रचनात्मकता और नवाचार से जुड़े व्यावहारिक पहलू के रूप में समझने पर जोर दिया गया। इससे विद्यार्थियों को अपने मौलिक कार्यों के महत्व और उनके उचित संरक्षण के प्रति जागरूक होने का अवसर मिला। कार्यक्रम 9 अक्टूबर को दोपहर 12ः30 से 1ः30 बजे तक हाइब्रिड माध्यम से आयोजित हुआ। इसमें महाविद्यालय के विद्यार्थियों और प्राध्यापकों ने भाग लिया। डॉ. अंशु दीप खलखो ने अतिथि वक्ता का स्वागत किया और आभार प्रदर्शन किया। कार्यक्रम का आयोजन महाविद्यालय की संरक्षक डॉ. (सिस्टर) शांता जोसेफ के मार्गदर्शन में किया गया। डॉ. साकेत झा संयोजक एवं आयोजन सचिव रहे, जबकि सह-आयोजन सचिव शिखर सिन्हा ने आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वनस्पति विज्ञान विभाग की विभागाध्यक्ष सुश्री प्रीति सिंह और श्रीमती एकता गुप्ता सहित सलाहकार समिति का भी सहयोग रहा।
जलवायु परिवर्तन पर व्याख्यान से हुई थी श्रृंखला की शुरुआत : वनस्पति विज्ञान विभाग की इस अंतरराष्ट्रीय व्याख्यान श्रृंखला की शुरुआत 3 अक्टूबर को ‘Aspects of Climate Change and Sustainable Futures’ विषय पर आयोजित पहले व्याख्यान से हुई थी। इसमेंAuriga Innovation Lab Pvt. Ltd.. के सह-संस्थापक शुभम ए. अग्रवाल वक्ता के रूप में शामिल हुए थे।
श्रृंखला के माध्यम से महाविद्यालय विद्यार्थियों को जीव विज्ञान,जैव प्रौद्योगिकी,पर्यावरण विज्ञान, जलवायु परिवर्तन और बौद्धिक संपदा जैसे विषयों पर विशेषज्ञों से संवाद का अवसर उपलब्ध करा रहा है। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण,शोध के प्रति रुचि, नवाचार और अंतर्विषयी अध्ययन को बढ़ावा देना है,ताकि वे अकादमिक ज्ञान के साथ उसके व्यावहारिक उपयोग को भी समझ सकें।
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