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बैकुंठपुर@ साइबर ठगी के पीडि़तों को कानूनी मदद दिलाने बनेगा विशेष प्रकोष्ठ,पैरालीगल वॉलेंटियर्स को मिला प्रशिक्षण

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डिजिटल अरेस्ट,साइबर सुरक्षा और ठगी की रकम की वसूली की प्रक्रिया समझाई गई जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बैकुंठपुर में बनेगा साइबर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ
-संवाददाता-
बैकुंठपुर 10 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
साइबर अपराधों और ऑनलाइन ठगी के बढ़ते मामलों के बीच पीडि़तों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरिया, बैकुंठपुर ने पहल की है। साइबर अपराध पीडि़तों को विधिक सहायता देने और ठगी गई राशि की वसूली में मदद करने के लिए वर्ष 2026 की योजना के अंतर्गत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण में साइबर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ बनाया जाएगा, इस प्रकोष्ठ के माध्यम से पीडि़तों को शिकायत दर्ज कराने से लेकर बैंक, साइबर पुलिस और न्यायालय स्तर पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई में सहायता मिलेगी। इसी उद्देश्य से 9 अक्टूबर 2026 को जिला विधिक सेवा प्राधिकरण बैकुंठपुर में पैरालीगल वॉलेंटियर्स (पीएलवी) के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाने की जानकारी प्रेस विज्ञप्ति में दी गई है, यह पहल माननीय उच्चतम न्यायालय के 4 अगस्त 2026 के आदेश के अनुपालन में छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा तैयार की गई योजना से संबंधित है।
साइबर ठगी से बचाव और कानूनी प्रक्रिया की दी जानकारी- प्रशिक्षण कार्यक्रम में साइबर सेल बैकुंठपुर के विशेषज्ञ शिवम सिंह ने सक्रिय पैरालीगल वॉलेंटियर्स को साइबर अपराध,डिजिटल अरेस्ट,ऑनलाइन ठगी और साइबर सुरक्षा से जुड़े विषयों पर विस्तार से जानकारी दी, प्रशिक्षण का उद्देश्य पीएलवी को इस योग्य बनाना है कि वे आम नागरिकों को साइबर अपराधों से बचाव के उपाय बता सकें और ठगी का शिकार हुए लोगों को कानूनी सहायता तक पहुंचने में सहयोग कर सकें, प्रशिक्षण के बाद पैरालीगल वॉलेंटियर्स गांवों, बस्तियों और आमजन के बीच जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करेंगे। इसके साथ ही साइबर धोखाधड़ी से प्रभावित लोगों की पहचान कर उन्हें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से जोड़ने तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग करेंगे।
बैंक से लेकर न्यायालय तक मिलेगी सहायता- प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण कोरिया में प्रस्तावित साइबर कानूनी सहायता प्रकोष्ठ में प्राधिकरण की सचिव के साथ पैनल अधिवक्ता, पैरालीगल वॉलेंटियर्स,साइबर पुलिस अधिकारी के नोडल अधिकारी तथा अभिलेख संबंधी कर्मचारी शामिल होंगे,इनकी जिम्मेदारी पीडि़तों को कानूनी सहायता देना, पुलिस और बैंक से समन्वय करना तथा मामलों की निगरानी करना होगी, यदि साइबर ठगी की रकम किसी अन्य व्यक्ति के खाते में पहुंच चुकी है,तो पीडि़त को संबंधित खातों की पहचान और उपलब्ध कानूनी प्रक्रिया के तहत सहायता प्रदान की जाएगी, इसका उद्देश्य पीडि़तों को शिकायत दर्ज कराने के बाद भी उचित मार्गदर्शन उपलब्ध कराना और उन्हें कानूनी प्रक्रिया में अकेला न छोड़ना है।
आम लोगों तक पहुंचेगी जागरूकता- साइबर अपराध के मामलों में कई बार लोग भय, जानकारी के अभाव या कानूनी प्रक्रिया की जटिलता के कारण समय पर उचित कदम नहीं उठा पाते,ऐसे में पैरालीगल वॉलेंटियर्स की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।
वे लोगों को साइबर ठगी की शिकायत करने, उपलब्ध कानूनी सहायता प्राप्त करने और संबंधित विभागों तक पहुंचने की प्रक्रिया समझाएंगे,प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल पीएलवी को जानकारी देना नहीं, बल्कि इस जानकारी को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना भी है, इससे साइबर अपराध पीडि़तों को समय पर सहायता दिलाने और डिजिटल धोखाधड़ी के प्रति आम नागरिकों को सतर्क करने में मदद मिलने की उम्मीद है,जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की यह पहल साइबर अपराध पीडि़तों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने, बैंक और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित करने तथा ठगी की रकम की वसूली के लिए उपलब्ध कानूनी प्रक्रियाओं में सहयोग देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।


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