बतौली को वर्ष 2025 के लिए टीबी मुक्त विकासखंड का सम्मान, मरीजों की जांच,उपचार और पोषण सहायता पर रहेगा जोर
-संवाददाता-
अम्बिकापुर,09 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए अब जनभागीदारी और युवा शक्ति पर जोर दिया जा रहा है। इसी कड़ी में सरगुजा जिले में ‘जोश’ (ज्वाइंट स्क्वाड फॉर हेल्थ) टीम की शुरुआत की गई है। माई भारत के स्वयंसेवक और एनसीसी कैडेट घर-घर पहुंचकर लोगों को टीबी के लक्षणों,निःशुल्क जांच, उपचार और पोषण सहायता की जानकारी देंगे। वहीं,सरगुजा के बतौली विकासखंड को वर्ष 2025 के लिए टीबी मुक्त विकासखंड का सम्मान मिलने से जिले के प्रयासों को नई पहचान मिली है।
अभियान के तहत टीबी मरीजों को समय पर उपचार दिलाने,सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने और बीमारी को लेकर सामाजिक भेदभाव दूर करने पर विशेष जोर रहेगा। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्डा ने 8 अक्टूबर को नई दिल्ली के भारत मंडपम में राष्ट्रीय स्तर पर जोश टीम का शुभारंभ किया। प्रथम चरण में देश के 11 राज्यों के 55 जिलों में यह पहल शुरू की गई है। इसी क्रम में कलेक्टर अजीत बसंत के मार्गदर्शन में सरगुजा में भी टीम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन की निगरानी के लिए नियुक्त अधिकारी, पंचायती राज संस्थाओं के प्रतिनिधि, सरपंच, पंच, स्वास्थ्य अधिकारी और युवा स्वयंसेवक शामिल हुए।
स्वयंसेवक बनेंगे जागरूकता अभियान की कड़ी : जोश टीम में माई भारत के स्वयंसेवकों और एनसीसी कैडेट को शामिल किया गया है। कार्यक्रम में माई भारत के जिला नोडल अधिकारी प्रिंस सहित विभिन्न विकासखंडों में कार्यरत स्वयंसेवकों को टीबी जागरूकता के लिए विशेष किट प्रदान की गई। ये स्वयंसेवक स्वास्थ्य विभाग और पंचायत प्रतिनिधियों के साथ समन्वय कर लोगों को बीमारी के लक्षण पहचानने, समय पर जांच कराने और उपचार पूरा करने के लिए प्रेरित करेंगे। साथ ही पात्र मरीजों को पोषण सहायता और शासन की योजनाओं की जानकारी भी दी जाएगी।
इससे ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने और मरीजों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोडऩे में मदद मिलने की उम्मीद है।
बतौली को मिला टीबी मुक्त विकासखंड का सम्मान : सरगुजा जिले के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह रही कि बतौली को वर्ष 2025 के लिए टीबी मुक्त विकासखंड का सम्मान दिया गया। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग,छत्तीसगढ़ शासन की ओर से 8 अक्टूबर 2026 को प्रशस्ति-पत्र प्रदान किया गया। इस उपलब्धि में स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों, मितानिनों, पंचायत प्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सहभागिता को महत्वपूर्ण बताया गया है। खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. संतोष सिंह के प्रयासों और कलेक्टर के मार्गदर्शन को भी इसका श्रेय दिया गया।
ग्राम पंचायतों को भी किया गया सम्मानित
कार्यक्रम में टीबी मरीजों को पोषण आहार वितरित किया गया। वर्ष 2025 में टीबी मुक्त ग्राम पंचायत का लक्ष्य हासिल करने वाली पंचायतों के सरपंचों को महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार,सरगुजा जिले की ग्राम पंचायतों में टीबी उन्मूलन के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। शेष पंचायतों को भी इस लक्ष्य से जोडऩे के लिए जागरूकता,जांच और उपचार पर जोर दिया जा रहा है।
मरीजों से भेदभाव नहीं करने की अपील
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. जीएस सरवता ने बताया कि सरगुजा के सभी विकासखंडों में टीबी की आवश्यक जांच और निःशुल्क उपचार की सुविधाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने नागरिकों से अपील की कि टीबी मरीजों के साथ किसी प्रकार का भेदभाव न करें,बल्कि उन्हें सहयोग और सम्मान दें। प्रत्येक पात्र मरीज तक शासन की पोषण सहायता और अन्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाना भी जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि टीबी उन्मूलन केवल उपचार तक सीमित नहीं है। इसके लिए समय पर बीमारी की पहचान,नियमित उपचार,पोषण सहायता और सामाजिक सहयोग भी जरूरी हैं। विभाग,युवा स्वयंसेवकों,जनप्रतिनिधियों और आम नागरिकों की सामूहिक भागीदारी से पूरे सरगुजा को टीबी मुक्त बनाने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं।
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