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सोनहत/एमसीबी@ स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की मौजूदगी में सोनहत को मिला ‘टीबी मुक्त ब्लॉक’ सम्मान

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  • खड़गवां के राज्य स्तरीय समारोह में सोनहत सहित चार विकासखंडों की उपलब्धि का उल्लेख, बीएमओ डॉ. प्रियंका पाण्डेय ने पूरी स्वास्थ्य टीम को दी बधाई….
  • टीबी उन्मूलन की दिशा में सोनहत की बड़ी उपलब्धि,मिला ‘टीबी मुक्त ब्लॉक’ का सम्मान
  • सोनहत ने हासिल किया टीबी मुक्त ब्लॉक का सम्मान,स्वास्थ्यकर्मियों के सामूहिक प्रयासों को मिली पहचान
  • स्वास्थ्य टीम की मेहनत रंग लाई, सोनहत को मिला टीबी मुक्त ब्लॉक’ का सम्मानटीबी के खिलाफ जंग में सोनहत की कामयाबी, राज्य स्तरीय समारोह में मिला सम्मान


-संवाददाता-
सोनहत/एमसीबी,09 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)।
टीबी उन्मूलन की दिशा में सोनहत विकासखंड ने महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है, 8 अक्टूबर 2026 को खड़गवां के जनपद पंचायत मैदान में आयोजित राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सोनहत को ‘टीबी मुक्त विकासखंड’ का सम्मान मिला, छत्तीसगढ़ शासन के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की मौजूदगी में आयोजित इस कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के मैदानी अमले, पंचायत प्रतिनिधियों और सामुदायिक सहभागिता के योगदान को रेखांकित किया गया, राज्य स्तरीय कार्यक्रम में सोनहत के साथ एमसीबी जिले के खड़गवां, सरगुजा जिले के बतौली और रायगढ़ जिले के घरघोड़ा विकासखंड को भी टीबी मुक्त घोषित किए जाने की जानकारी सामने आई,सोनहत ब्लॉक को मिला यह सम्मान केवल स्वास्थ्य विभाग की उपलब्धि के रूप में नहीं, बल्कि बीमारी के प्रति जागरूकता बढ़ाने,संभावित मरीजों को जांच के लिए प्रेरित करने और उपचार से जोड़ने के सामूहिक प्रयासों की पहचान के तौर पर देखा जा रहा है,इस उपलब्धि से क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कर्मचारियों का उत्साह बढ़ा है,अब चुनौती इस स्थिति को बनाए रखने और टीबी की समय पर पहचान तथा नियमित उपचार के प्रयासों को लगातार मजबूत करने की है।
खड़गवां में राज्य स्तरीय कार्यक्रम, दिल्ली से हुआ ‘जोश’ टीम का शुभारंभ- ‘सशक्त एमसीबी सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत जनपद पंचायत मैदान, खड़गवां में 8 अक्टूबर को राज्य स्तरीय टीबी मुक्त भारत अभियान,जोश टीम लॉन्च एवं टीबी मुक्त विकासखंड कार्यक्रम आयोजित किया गया, कार्यक्रम के दौरान नई दिल्ली के भारत मंडपम से आयोजित छ्वह्रस्॥ (छ्वशद्बठ्ठह्ल स्ह्नह्वड्डस्र द्घशह्म् ॥द्गड्डद्यह्लद्ध) टीमों के राष्ट्रीय शुभारंभ का सीधा प्रसारण किया गया,कार्यक्रम के मुख्य अतिथि स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल रहे,राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रम में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा सहित अन्य केंद्रीय मंत्री उपस्थित रहे,खड़गवां में आयोजित कार्यक्रम में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी-कर्मचारी,जनप्रतिनिधि,पंचायत प्रतिनिधि, स्वास्थ्यकर्मी, युवा और ग्रामीणजन शामिल हुए, कार्यक्रम का उद्देश्य टीबी उन्मूलन अभियान को जनभागीदारी से जोड़ना और युवाओं को जागरूकता गतिविधियों में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करना रहा। जोश टीम के माध्यम से लोगों तक टीबी से संबंधित सही जानकारी पहुंचाने,संभावित मरीजों को जांच के लिए प्रेरित करने और बीमारी को लेकर फैले भ्रम को दूर करने पर जोर दिया गया।
एमसीबी की 199 में से 177 ग्राम पंचायतें टीबी मुक्त-राज्य स्तरीय कार्यक्रम में मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले की स्वास्थ्य संबंधी उपलब्धियों को भी प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया,उपलब्ध जानकारी के अनुसार, जिले की कुल 199 ग्राम पंचायतों में से 177 ग्राम पंचायतों ने टीबी मुक्त होने की उपलब्धि हासिल की है,इस उपलब्धि के लिए संबंधित ग्राम पंचायतों के सरपंचों को गोल्ड,सिल्वर और ब्रॉन्ज श्रेणियों में सम्मानित किया गया,उन्हें गांधी प्रतिमा तथा शाल-श्रीफल भेंट किए गए, कार्यक्रम में ग्राम पंचायतों,स्वास्थ्यकर्मियों, मितानिनों,आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और ग्रामीण समुदाय की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया गया,ग्राम स्तर पर टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाना,संभावित मरीजों की पहचान करना और उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों में जांच तथा उपचार के लिए प्रोत्साहित करना इस अभियान के अहम पहलू हैं,पंचायतों की भागीदारी से स्वास्थ्य विभाग को समुदाय तक पहुंचने और लोगों को बीमारी के प्रति जागरूक करने में सहयोग मिलता है।
समय पर जांच,नियमित उपचार और पोषण पर जोर-कार्यक्रम को संबोधित करते हुए स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने टीबी उन्मूलन के लिए सामूहिक प्रयासों और जनभागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने अभियान में योगदान देने वाले पंचायत प्रतिनिधियों,स्वास्थ्यकर्मियों और नागरिकों के प्रयासों की सराहना की,कार्यक्रम में यह संदेश दिया गया कि टीबी के संभावित लक्षण दिखाई देने पर जांच में देरी नहीं करनी चाहिए, समय पर बीमारी की पहचान,चिकित्सकीय सलाह के अनुसार नियमित उपचार, दवा का पूरा कोर्स और पर्याप्त पोषण टीबी से लड़ने के महत्वपूर्ण आधार हैं,टीबी को लेकर समाज में फैले भ्रम और भेदभाव को दूर करना भी जरूरी है, बीमारी से पीडि़त व्यक्ति को परिवार और समुदाय का सहयोग मिले,ताकि वह बिना झिझक उपचार करा सके और उपचार बीच में छोड़ने जैसी स्थिति से बचा जा सके, स्वास्थ्य विभाग की ओर से लोगों को जागरूक करने के लिए इस तरह के कार्यक्रमों को महत्वपूर्ण माना गया, क्योंकि टीबी उन्मूलन केवल चिकित्सा संस्थानों तक सीमित नहीं है। इसके लिए ग्रामीण समुदाय,पंचायत प्रतिनिधियों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच समन्वय भी जरूरी है।
‘जोश’ टीम से गांव-गांव तक पहुंचेगा जागरूकता का संदेश-जोश टीम लॉन्च का मुख्य उद्देश्य युवाओं की ऊर्जा को टीबी उन्मूलन अभियान से जोड़ना है,इसके माध्यम से युवाओं को सामुदायिक संपर्क, जनजागरूकता और संभावित मरीजों को जांच के लिए प्रेरित करने जैसे कार्यों में भागीदारी के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है,युवा स्वयंसेवकों के माध्यम से टीबी के लक्षणों, जांच की जरूरत,उपचार की निरंतरता और बीमारी से जुड़े सामाजिक भेदभाव के विषय में लोगों तक सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा, ग्रामीण क्षेत्रों में जागरूकता बढ़ाने के लिए युवाओं की सहभागिता महत्वपूर्ण हो सकती है,क्योंकि वे स्थानीय समुदाय के बीच संवाद स्थापित करने में मदद कर सकते हैं, कार्यक्रम में टीबी उन्मूलन अभियान से संबंधित सूचना, शिक्षा एवं संचार सामग्री जारी की गई। इसके साथ ही एआई आधारित चैटबॉट ‘खुशी अवतार’ की शुरुआत की जानकारी भी दी गई, इस पहल का उद्देश्य टीबी से जुड़े सवालों और उपचार संबंधी जानकारी को डिजिटल माध्यम से लोगों तक पहुंचाना है।
स्वास्थ्य स्टॉलों के जरिए दी गई जानकारी, हितग्राहियों को मिला लाभ– कार्यक्रम स्थल पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न स्टॉल लगाए गए,जिनके माध्यम से स्वास्थ्य सेवाओं और टीबी उन्मूलन अभियान से संबंधित जानकारी दी गई,हितग्राहियों को आयुष्मान कार्ड, छड़ी और चश्मे भी वितरित किए गए,नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं ने टीबी जागरूकता पर आधारित नाटक प्रस्तुत किया, प्रस्तुति के माध्यम से समय पर जांच कराने, नियमित उपचार जारी रखने,पोषण पर ध्यान देने और टीबी से पीडि़त लोगों के प्रति संवेदनशील व्यवहार अपनाने का संदेश दिया गया, कार्यक्रम में इन गतिविधियों के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं और जनजागरूकता को एक साथ जोड़ने का प्रयास किया गया,इससे लोगों को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी प्राप्त करने और उपलब्ध सुविधाओं के बारे में जानने का अवसर मिला।
सोनहत की उपलब्धि के साथ अब निरंतरता की चुनौती- सोनहत ब्लॉक को मिला ‘टीबी मुक्त ब्लॉक’ का सम्मान स्वास्थ्य विभाग की टीम के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बीएमओ डॉ. प्रियंका पाण्डेय ने पूरी टीम को बधाई देकर स्पष्ट किया कि इस सफलता के पीछे सामूहिक मेहनत और समर्पण की भूमिका रही है, हालांकि, किसी ब्लॉक को टीबी मुक्त होने का सम्मान मिलने के बाद भी बीमारी के प्रति सतत सतर्कता बनाए रखना जरूरी है, समय पर जांच,उपचार की निरंतरता, मरीजों को पोषण और सामाजिक सहयोग तथा समुदाय में जागरूकता जैसी गतिविधियों को लगातार आगे बढ़ाना होगा,सोनहत की उपलब्धि से स्वास्थ्य अमले को प्रोत्साहन मिला है। अब इस प्रयास को बनाए रखना और टीबी के संभावित मामलों की पहचान तथा उपचार की व्यवस्था को मजबूत रखना आगे की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी होगी,कार्यक्रम में संदेश स्पष्ट रहा—टीबी उन्मूलन के लिए स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के साथ पंचायतों,युवाओं,परिवारों और पूरे समुदाय की भागीदारी आवश्यक है, सामूहिक जिम्मेदारी और निरंतर जागरूकता के जरिए ही टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को मजबूती दी जा सकती है।
बीएमओ डॉ. प्रियंका पाण्डेय ने बताया पूरी टीम की मेहनत का परिणाम-
सोनहत ब्लॉक को ‘टीबी मुक्त ब्लॉक’ का सम्मान मिलने पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सोनहत की खंड चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रियंका पाण्डेय ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे पूरे स्वास्थ्य अमले के लिए गर्व और हर्ष का विषय बताया, उन्होंने इस उपलब्धि के लिए सोनहत ब्लॉक की समस्त स्वास्थ्य टीम को बधाई एवं शुभकामनाएं दीं, डॉ. पाण्डेय के अनुसार, यह सफलता किसी एक व्यक्ति के प्रयास से नहीं, बल्कि पूरी टीम की निरंतर मेहनत, समर्पण और सामूहिक जिम्मेदारी से संभव हुई है, टीबी उन्मूलन जैसे अभियान में चिकित्सकों के साथ स्वास्थ्य कर्मचारियों और मैदानी स्तर पर काम करने वाले कर्मियों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है, संभावित मरीजों की पहचान, जांच के लिए प्रेरित करना, उपचार के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मरीजों को नियमित दवा सेवन के लिए प्रोत्साहित करना इस कार्य के प्रमुख हिस्से हैं, उन्होंने स्वास्थ्य टीम से इसी तरह टीम भावना और समर्पण बनाए रखने की अपील करते हुए कहा कि टीबी मुक्त भारत के संकल्प को आगे बढ़ाने के लिए निरंतर प्रयास जरूरी हैं, सम्मान मिलने के बाद भी जागरूकता, जांच और उपचार से संबंधित गतिविधियों को जारी रखना महत्वपूर्ण होगा।


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