जाम नालियां और जलभराव,नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने महाप्रबंधक
को सौंपा ज्ञापन,आदेशों की अनदेखी के आरोप से बढ़ी हलचल
राजन पाण्डेय
एमसीबी,03 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के झगराखंड उपक्षेत्र और खोंगापानी वेस्ट जेकेडी क्षेत्र की कॉलोनियों में सफाई व्यवस्था, नाली-नालों की सफाई और सिविल कार्यों के क्रियान्वयन को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। नगर पंचायत खोंगापानी के उपाध्यक्ष विवेक कुमार चतुर्वेदी ने महाप्रबंधक,हसदेव एरिया को ज्ञापन सौंपकर क्षेत्र की विभिन्न एसईसीएल कॉलोनियों में जमा कचरे के ढेर हटाने,जाम नालियों की सफाई, जलभराव की समस्या दूर करने तथा मच्छर एवं संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए नियमित रूप से फॉगिंग,डेल्टा फॉग,लार्वाहिट और ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराने की मांग की है। मामला केवल सफाई व्यवस्था तक सीमित नहीं है,ज्ञापन में उठाए गए बिंदुओं ने एसईसीएल के स्थानीय प्रबंधन में आदेशों के क्रियान्वयन,विभागीय जवाबदेही और सिविल कार्यों की निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े किए हैं, उपाध्यक्ष का आरोप है कि कुछ मामलों में उपक्षेत्रीय प्रबंधन स्तर से निर्देश जारी होने के बावजूद अपेक्षित कार्रवाई धरातल पर दिखाई नहीं दे रही है,ऐसे में सवाल उठता है कि आदेश जारी होने के बाद उसके अनुपालन की निगरानी कौन करता है और यदि आदेश का पालन नहीं होता तो जवाबदेही किसकी तय होती है।
कचरे और जाम नालियों से बीमारी का खतरा-ज्ञापन में बारिश के दौरान कई स्थानों पर कचरे के ढेर,जाम नालियों और जलभराव की स्थिति का उल्लेख किया गया है, ऐसी स्थिति में मच्छर और अन्य कीट-पतंगों के पनपने की आशंका बढ़ने से क्षेत्र में संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है,नगर पंचायत उपाध्यक्ष ने मलेरिया, डेंगू और पीलिया जैसी बीमारियों की रोकथाम के लिए समय रहते प्रभावी सफाई और कीटनाशक गतिविधियां संचालित करने की मांग की है, उनका कहना है कि केवल शिकायत सामने आने के बाद सफाई कराने के बजाय नियमित व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।
नियमित सफाई व्यवस्था पर उठे सवाल– सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि एसईसीएल की आवासीय कॉलोनियों में सफाई और नाली की व्यवस्था नियमित रूप से संचालित होती है,तो फिर कई स्थानों पर कचरा जमा होने और नालियां जाम होने की शिकायतें क्यों सामने आ रही हैं? क्या संबंधित विभाग द्वारा नियमित निरीक्षण किया जा रहा है? यदि निरीक्षण किया जा रहा है तो समस्याओं के निराकरण के बाद भी ऐसी स्थिति क्यों बनी हुई है? यदि निरीक्षण नहीं हो रहा है तो इसकी जिम्मेदारी किसकी है? इन सवालों पर अब एसईसीएल प्रबंधन की स्थिति स्पष्ट होना जरूरी माना जा रहा है।
आदेश जारी करने और लागू कराने के बीच कौन जिम्मेदार?– एसईसीएल जैसी बड़ी औद्योगिक संस्था में विभिन्न विभागों और अधिकारियों की जिम्मेदारियां निर्धारित होती हैं, ऐसे में यदि किसी वरिष्ठ अधिकारी के स्तर से निर्देश जारी होने के बाद भी काम नहीं होता, तो आदेश और कार्रवाई के बीच की पूरी प्रक्रिया की जांच जरूरी हो जाती है,सवाल यह भी हैं की क्या संबंधित अधिकारी को आदेश प्राप्त हुआ था? क्या कार्य के लिए तकनीकी स्वीकृति आवश्यक थी? क्या बजट उपलब्ध था? बजट उपलब्ध होने के बावजूद कार्य लंबित क्यों रहा? क्या टेंडर या अन्य विभागीय प्रक्रिया लंबित थी? यदि प्रक्रिया लंबित थी तो उसकी जानकारी वरिष्ठ अधिकारियों को दी गई थी? और यदि कार्य किसी कारण से संभव नहीं था तो इसकी सूचना किस स्तर पर दी गई? इन सवालों के जवाब दस्तावेजों और मौके की स्थिति के मिलान से ही सामने आ सकते हैं।
टेंडर, कार्यादेश और भुगतान रिकॉर्ड की जांच की मांग- ज्ञापन में उठे मुद्दों के बाद क्षेत्र में सफाई एवं सिविल कार्यों से संबंधित पूरी प्रक्रिया की जांच की आवश्यकता भी सामने आती है,यदि किसी कार्य के लिए राशि स्वीकृत हुई है,तो यह देखा जाना चाहिए कि कार्य का टेंडर कब जारी हुआ,किस एजेंसी को कार्य मिला,कार्यादेश कब जारी किया गया और निर्धारित अवधि क्या थी,इसके साथ ही कार्य की वास्तविक प्रगति,माप पुस्तिका, बिल और भुगतान की स्थिति का भी मिलान किया जाना चाहिए,यदि किसी कार्य को रिकॉर्ड में पूरा बताया गया हो लेकिन मौके पर उसका अस्तित्व न मिले या कार्य अधूरा पाया जाए,तो स्थिति गंभीर हो सकती है,वहीं यदि कार्य लंबित है तो उसके कारण और जिम्मेदार स्तर को भी स्पष्ट किया जाना आवश्यक है।
कागजों में काम या जमीन पर भी?
मामले में सबसे महत्वपूर्ण बिंदु रिकॉर्ड और जमीनी स्थिति का मिलान हो सकता है, एसईसीएल प्रबंधन यदि शिकायतों की वास्तविकता जानना चाहता है तो संबंधित कॉलोनियों का संयुक्त निरीक्षण कराया जा सकता है,सफाई,नाली,जलनिकासी और सिविल कार्यों की मौके पर स्थिति का रिकॉर्ड तैयार किया जाए। पूर्व में जारी शिकायतों और लिखित निर्देशों की फाइलों को देखा जाए और यह जांचा जाए कि प्रत्येक शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई,यदि किसी रिकॉर्ड में कार्रवाई पूर्ण दर्शाई गई हो और स्थल निरीक्षण में काम नहीं मिला तो जवाबदेही का सवाल और गंभीर हो जाएगा।
लिखित आदेशों के अनुपालन पर भी सवाल
ज्ञापन में जेकेडी उपक्षेत्र प्रबंधन के लिखित आदेशों के कथित रूप से अनुपालन नहीं होने का मुद्दा भी उठाया गया है,उपाध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी के अनुसार,समस्याओं के समाधान के लिए उपक्षेत्रीय प्रबंधन स्तर से संबंधित सिविल विभाग को निर्देश दिए जाने के बावजूद कई मामलों में मौके पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई,यदि संबंधित दस्तावेजों और स्थल निरीक्षण में यह आरोप सही पाया जाता है तो मामला केवल सफाई की लापरवाही तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि यह विभागीय आदेशों के अनुपालन और प्रशासनिक जवाबदेही से भी जुड़ जाएगा,ऐसे में यह सामने आना चाहिए कि आदेश कब जारी किया गया,किस अधिकारी को भेजा गया, कार्रवाई के लिए क्या निर्देश दिए गए,क्या समय-सीमा निर्धारित थी और उसके बाद मौके पर कितना काम कराया गया।
एल-25 आवास की नाली बना उदाहरण
ज्ञापन में कोलरी कर्मचारी अरूण कुमार,पिता स्वर्गीय धर्मू नायक,के आवास क्रमांक एल-25,एल.सी.एच. कॉलोनी से जुड़ी नाली जाम और जलभराव की समस्या का भी उल्लेख किया गया है,बताया गया है कि कर्मचारी द्वारा समस्या के संबंध में आवेदन दिए जाने के बाद उपक्षेत्रीय प्रबंधन स्तर से संबंधित एई सिविल को आवश्यक कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया था। इसके बावजूद यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ,तो यह जांच का विषय है कि निर्देश जारी होने के बाद कार्रवाई किस स्तर पर रुकी,एक कर्मचारी की बुनियादी सुविधा से जुड़ी शिकायत पर जारी निर्देश का समय पर पालन नहीं होना विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है,शिकायत दर्ज करने से आगे बढ़कर उसके अंतिम निराकरण तक जिम्मेदारी तय करने की आवश्यकता है।
ज्ञापन की प्रतिलिपि उच्च अधिकारियों को भी
नगर पंचायत उपाध्यक्ष विवेक चतुर्वेदी ने महाप्रबंधक, हसदेव एरिया को ज्ञापन सौंपने के साथ इसकी प्रतिलिपि जिलाधिकारी मनेंद्रगढ़,अनुविभागीय अधिकारी राजस्व मनेंद्रगढ़,उपक्षेत्रीय प्रबंधक झगराखंड तथा स्टाफ ऑफिसर सिविल,हसदेव क्षेत्र को भी भेजी है,इससे मामला केवल स्थानीय स्तर की शिकायत न रहकर उच्च प्रशासनिक स्तर तक पहुंच गया है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि शिकायत के बाद संबंधित अधिकारी मौके का निरीक्षण कराते हैं या नहीं और शिकायतों की वास्तविक स्थिति की रिपोर्ट तैयार होती है या नहीं।
क्षेत्रवासियों के सामने बुनियादी सुविधाओं का सवाल
झगराखंड और खोंगापानी की एसईसीएल कॉलोनियों में रहने वाले कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए साफ-सफाई,नाली और जलनिकासी जैसी सुविधाएं रोजमर्रा की बुनियादी जरूरतों से जुड़ी हैं,क्षेत्र में यदि कचरा नियमित रूप से नहीं उठता,नालियां जाम रहती हैं और बारिश के दौरान जलभराव होता है तो इसका सीधा असर कॉलोनी में रहने वाले परिवारों पर पड़ता है, इसलिए क्षेत्रवासियों की अपेक्षा है कि समस्या का समाधान केवल शिकायत के बाद होने वाली अस्थायी सफाई तक सीमित न रहे,बल्कि नियमित व्यवस्था बनाई जाए।
जांच हुई तो कई सवालों के जवाब आ सकते हैं…
पूरे मामले में अब सबसे अहम सवाल यह है कि ज्ञापन में लगाए गए आरोपों की विभागीय जांच होती है या नहीं,यदि जांच होती है तो संबंधित पत्राचार, लिखित निर्देश,कार्यादेश,टेंडर दस्तावेज,माप पुस्तिका,भुगतान रिकॉर्ड और मौके की स्थिति का मिलान किया जाना जरूरी होगा,यदि जांच में यह प्रमाणित होता है कि किसी अधिकारी या कर्मचारी ने वरिष्ठ स्तर से जारी निर्देशों की अनदेखी की,निर्धारित कार्य नहीं कराया या रिकॉर्ड और वास्तविक स्थिति में अंतर पाया गया,तो नियमानुसार जिम्मेदारी तय की जा सकती है,दूसरी ओर, यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप दस्तावेजी जांच में सही नहीं पाए जाते हैं, तो एसईसीएल प्रबंधन को भी तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए, ताकि आरोप और वास्तविकता के बीच की स्थिति सामने आ सके।
अब निगाह कार्रवाई पर…
झगराखंड-खोंगापानी क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को लेकर उठी शिकायत ने एसईसीएल हसदेव क्षेत्र के स्थानीय प्रशासन,सिविल विभाग और निगरानी व्यवस्था को सवालों के घेरे में ला दिया है,मामला केवल कचरा उठाने और नाली साफ कराने तक सीमित नहीं है,बल्कि आदेशों के अनुपालन,कार्यों की निगरानी और जवाबदेही से भी जुड़ गया है,अब निगाह इस बात पर है कि महाप्रबंधक स्तर से ज्ञापन पर क्या कार्रवाई होती है,क्या संबंधित क्षेत्रों का स्थल निरीक्षण कराया जाएगा? क्या पुराने लिखित निर्देशों की फाइलें खंगाली जाएंगी? क्या सिविल कार्यों के टेंडर और भुगतान रिकॉर्ड का मिलान होगा? और सबसे महत्वपूर्ण है की यदि आदेश जारी होने के बावजूद काम नहीं हुआ तो जिम्मेदारी किसकी तय होगी? इन सवालों का जवाब कार्रवाई के बाद ही स्पष्ट होगा,फिलहाल क्षेत्रवासियों की अपेक्षा यही है कि मामला केवल ज्ञापन और आश्वासन तक सीमित न रहे,बल्कि जमीनी जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और जहां लापरवाही प्रमाणित हो,वहां नियमानुसार जवाबदेही तय की जाए।
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