साईं जलकुमार मसन्द का आह्वान, बोले—सनातन संस्कृति के प्रसार में समाज की ऐतिहासिक भूमिका
रायपुर,02 अक्टूबर 2026। भारत में सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित धर्म के शासन की पुनर्स्थापना के लिए चल रहे अभियान में सिंधी समाज को सक्रिय और ठोस भूमिका निभानी चाहिए। सिंधी समाज की पहचान सदैव सनातनी हिंदू समाज के रूप में रही है और धर्म, देश तथा लोककल्याण के क्षेत्र में उसका योगदान हजारों वर्षों पुराना है। यह आह्वान मसन्द सेवाश्रम के पीठाधीश साईं जलकुमार मसन्द साहिब ने लखनऊ स्थित शिव शांति संत आसूदाराम आश्रम में आयोजित सत्संग एवं सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों की संयुक्त बैठक में किया।
साईं मसन्द ने कहा कि भारत की शासन व्यवस्था की मूल अवधारणा सनातन वैदिक सिद्धांतों पर आधारित रही है। ‘यथा राजा तथा प्रजा’ की भावना के साथ भारत ने विश्वकल्याण की दिशा में मार्गदर्शन किया और विश्वगुरु की भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि देश में बढ़ती अव्यवस्था और अधर्म से मुक्ति के लिए पूज्यपाद शंकराचार्यों एवं संतों के मार्गदर्शन में धर्म आधारित शासन व्यवस्था की पुनर्स्थापना का अभियान चलाया जा रहा है।
उन्होंने सिंधी समाज से इस अभियान में सक्रिय भागीदारी की अपील करते हुए कहा कि देश के साथ-साथ विदेशों में रहने वाले हिंदू कार्यकर्ता भी इससे जुड़ रहे हैं। ऐसे में सिंधी समाज को अपनी ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत के अनुरूप इस अभियान में प्रभावी भूमिका निभानी चाहिए।
108 देशों तक संगठन का नेटवर्क
साईं जलकुमार मसन्द साहिब ने बताया कि वे चारों शंकराचार्यों की अध्यक्षता में गठित अंतरराष्ट्रीय हिंदू संगठन परम धर्म संसद 1008 के संगठन मंत्री हैं। संगठन से विश्व के 108 देशों में कार्यकर्ताओं के जुड़े होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारत में धर्म के शासन की स्थापना के उद्देश्य से यह अभियान सितंबर 2012 से उनकी पहल पर चल रहा है।
व्यापार के साथ संस्कृति भी पहुंचाई
साईं मसन्द ने कहा कि सिंधी समाज का इतिहास व्यापारिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहा। प्राचीन काल में सिंधी व्यापारी जलमार्गों से विश्व के विभिन्न देशों में जाते थे और उनके साथ भारतीय जीवन पद्धति तथा सनातन वैदिक संस्कृति भी दूसरे क्षेत्रों तक पहुंचती थी। उन्होंने सिंधु घाटी सभ्यता से जुड़े हालिया शोध का उल्लेख करते हुए कहा कि प्राचीन सिंधी समाज की सांस्कृतिक भूमिका को नए सिरे से समझने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि सिंधी समाज की यह गौरवशाली परंपरा आज भी उसे धर्म, राष्ट्र और लोककल्याण के कार्यों में आगे बढ़कर योगदान देने की प्रेरणा देती है। बैठक में भारत सहित अन्य देशों में गठित सिंधी समाज के विभिन्न संगठनों के प्रमुख पदाधिकारी मौजूद रहे।
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