
विशेष न्यायालय बैकुण्ठपुर का फैसला,रामप्रसाद उर्फ चांटी को अलग-अलग धाराओं में कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा
-संवाददाता-
बैकुण्ठपुर,02 अक्टूबर 2026 (घटती-घटना)। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम से संबंधित विशेष आपराधिक प्रकरण क्रमांक 36/2025 में विशेष न्यायालय बैकुण्ठपुर, कोरिया ने 30 सितंबर 2026 को फैसला सुनाते हुए आरोपी रामप्रसाद उर्फ चांटी को दोषी ठहराया है,विशेष न्यायाधीश आशीष पाठक की अदालत ने आरोपी को भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के तहत कठोर कारावास और अर्थदंड से दंडित किया। न्यायालय के फैसले के अनुसार मामला 4 नवंबर 2025 की सुबह करीब 9ः30 बजे बैकुण्ठपुर के प्रेमाबाग क्षेत्र का है,प्रकरण में आरोप था कि आरोपी पीडि़त के घर पहुंचा और उसके भतीजे के संबंध में पूछताछ की,पीडि़त द्वारा भतीजे के घर पर नहीं होने की जानकारी दिए जाने के बाद आरोपी ने कथित तौर पर पीडि़त के अकेले होने का फायदा उठाते हुए उसके साथ मारपीट की,घटना के दौरान पीडि़त के विरोध करने पर उसके हाथ में दांत से काटने का भी उल्लेख प्रकरण में किया गया है।
भतीजे के बारे में पूछताछ करने पहुंचा था आरोपी- न्यायालयीन फैसले में दर्ज प्रकरण के अनुसार 4 नवंबर 2025 को सुबह करीब 9ः30 बजे आरोपी रामप्रसाद उर्फ चांटी बैकुण्ठपुर के प्रेमाबाग स्थित पीडि़त के घर पहुंचा था, वहां उसने पीडि़त से उसके भतीजे के बारे में पूछा, पीडि़त ने आरोपी को बताया कि उसका भतीजा घर पर नहीं है, इसके बाद प्रकरण के अनुसार आरोपी ने पीडि़त के घर में अकेले होने की स्थिति का फायदा उठाया और उसके साथ मारपीट की,फैसले में अभियोजन के मामले के संबंध में उल्लेख है कि आरोपी ने पीडि़त को पकड़कर बिस्तर में लिटा दिया तथा उसके शरीर को इधर-उधर छुआ,पीडि़त द्वारा विरोध किए जाने के बाद उसके साथ मारपीट की गई और आरोपी ने अपने दांत से पीडि़त के बाएं हाथ पर काट लिया,घटना के बाद पीडि़त ने मामले की लिखित शिकायत पुलिस में दर्ज कराई।
अजाक थाना बैकुण्ठपुर में दर्ज हुआ था अपराध- पीडि़त की शिकायत पर थाना अजाक बैकुण्ठपुर में अपराध क्रमांक 10/2025 दर्ज किया गया था। मामले में भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 333, 74, 118 एवं 115(2) के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम,1989 की धारा 3(1)(घ)(द्ब) के तहत प्रकरण दर्ज किए जाने का उल्लेख न्यायालयीन दस्तावेज में है,इसके बाद प्रकरण की विवेचना और न्यायालयीन कार्रवाई आगे बढ़ी, विशेष न्यायालय में मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से प्रकरण से संबंधित तथ्य एवं साक्ष्य न्यायालय के समक्ष रखे गए।
शासन की ओर से महेश शर्मा ने की पैरवी- मामले में शासन की ओर से विशेष लोक अभियोजक महेश शर्मा ने पैरवी की, अभियोजन की ओर से मामले के तथ्यों एवं उपलब्ध सामग्री को न्यायालय के समक्ष रखा गया,विशेष न्यायालय द्वारा फैसला सुनाए जाने के बाद आरोपी को दोषसिद्ध करते हुए अलग-अलग धाराओं में कठोर कारावास और अर्थदंड की सजा दी गई है।
शिकायत से फैसला आने तक पहुंचा मामला-इस प्रकरण की शुरुआत पीडि़त द्वारा घटना के बाद की गई लिखित शिकायत से हुई थी,शिकायत के आधार पर अजाक थाना बैकुण्ठपुर में अपराध दर्ज किया गया और मामला न्यायालय तक पहुंचा,इसके बाद विशेष न्यायालय में प्रकरण की सुनवाई हुई, करीब एक वर्ष के भीतर मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुनाया, 30 सितंबर 2026 को सुनाए गए फैसले में न्यायालय ने आरोपी को दोषी मानते हुए सजा निर्धारित की।
एससी-एसटी एक्ट की धारा में भी हुआ था प्रकरण दर्ज-प्रकरण की शुरुआत में भारतीय न्याय संहिता की विभिन्न धाराओं के साथ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम, 1989 की धारा 3(1)(घ)(द्ब) के तहत भी अपराध दर्ज किया गया था, न्यायालयीन दस्तावेज में इसका उल्लेख प्रकरण के पंजीयन के संदर्भ में किया गया है,हालांकि उपलब्ध फैसले की तस्वीर में सजा का स्पष्ट विवरण भारतीय न्याय संहिता की धाराओं के तहत दिया गया है,इसलिए एससी-एसटी एक्ट के तहत अलग से कोई सजा सुनाए जाने का दावा इस खबर में नहीं किया जा रहा है।
न्यायालयीन के फैसले से निकला संदेश-इस मामले में न्यायालय द्वारा आरोपी को दोषी ठहराकर सजा सुनाए जाने के बाद यह मामला एक बार फिर चर्चा में आया है, घटना के बाद दर्ज शिकायत से शुरू हुई न्यायिक प्रक्रिया में अब विशेष न्यायालय का फैसला सामने आया है।
अदालत ने उपलब्ध अभियोजन सामग्री और मामले की सुनवाई के बाद आरोपी को संबंधित अपराधों में दोषी मानते हुए कारावास एवं अर्थदंड की सजा सुनाई है।
न्यायालय ने आरोपी को दोषी माना
मामले की सुनवाई पूरी होने के बाद विशेष न्यायाधीश आशीष पाठक ने 30 सितंबर 2026 को फैसला सुनाया, न्यायालय ने आरोपी रामप्रसाद उर्फ चांटी को दोषी ठहराते हुए भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं में अलग-अलग सजा सुनाई, न्यायालय के फैसले के अनुसार धारा 333 के अपराध में एक वर्ष का कठोर कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड, धारा 74 के अपराध में एक वर्ष तीन माह का कठोर कारावास एवं 2,000 रुपये अर्थदंड, धारा 118 के अपराध में छह माह का कठोर कारावास एवं 500 रुपये अर्थदंड, उपलब्ध न्यायालयीन दस्तावेज में धारा 118 के संबंध में सजा का उल्लेख एक अन्य स्थान पर भी किया गया है, इसलिए इस खबर में सजा का विवरण दस्तावेज में दर्ज शब्दों के अनुरूप ही रखा गया है।
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