- प्रधान आरक्षक की पत्नी-पुत्री की नृशंस हत्या में कुलदीप साहू,फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह
- चंद्रकांत चौधरी और आर्यन उर्फ गोल्डी दोषी…न्यायालय ने सजा के प्रश्न पर फैसला रखा सुरक्षित
- प्रधान आरक्षक की पत्नी और पुत्री की नृशंस हत्या के मामले में कुलदीप साहू,फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह, चंद्रकांत चौधरी और आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डीदोषी
- अपराध क्रमांक 575/2024 में करीब दो साल बाद आया बड़ा न्यायिक मोड़…अपराध क्रमांक 574/2024 में कुलदीप साहू को 10 वर्ष का कठोर कारावास, फायरिंग के अपराध क्रमांक
- 218/2024 में आरोपी दोषमुक्त

-संवाददाता-
सूरजपुर,28 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। करीब दो वर्ष पहले पूरे छत्तीसगढ़ को झकझोर देने वाले सूरजपुर के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में सोमवार को न्यायालय से बड़ा फैसला सामने आया, प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और पुत्री की नृशंस हत्या के मामले में न्यायालय ने कुलदीप साहू,फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह,चंद्रकांत चौधरी और आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को दोषी करार दिया है, हालांकि न्यायालय ने दोषसिद्धि के बाद तत्काल सजा नहीं सुनाई है, सजा के बिंदु पर फैसला 8 अक्टूबर 2026 तक के लिए सुरक्षित रखा गया है, यानी 28 सितंबर की सुनवाई में चारों आरोपियों के संबंध में दोष सिद्ध होने का महत्वपूर्ण निर्णय सामने आया,लेकिन उन्हें क्या सजा मिलेगी,इसकी तस्वीर अभी सामने आना बाकी है, इसी मामले से जुड़े अन्य प्रकरणों में भी सोमवार को न्यायालयीन परिणाम सामने आए,अपराध क्रमांक 574/2024,जिसमें पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलकर जान से मारने के प्रयास का आरोप था,उसमें न्यायालय ने कुलदीप साहू को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है,वहीं अपराध क्रमांक 218/2024, जिसमें पुलिस टीम पर अवैध हथियार से फायरिंग कर जान से मारने के प्रयास का आरोप था, उसमें पर्याप्त साक्ष्य के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया, इस तरह एक ही दिन इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े तीन मामलों में तीन अलग-अलग न्यायिक परिणाम सामने आए—एक में दस वर्ष की सजा,दूसरे में दोषमुक्ति और सबसे चर्चित दोहरे हत्याकांड में चार आरोपियों की दोषसिद्धि,लेकिन सजा पर फैसला अभी बाकी।
फैसले की खबर मिलते ही न्यायालय परिसर में उमड़ी भीड़, मीडिया से लेकर आम लोगों तक टिकी रही निगाहें-28 सितंबर को जैसे ही यह जानकारी सामने आई कि बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में न्यायालय का महत्वपूर्ण फैसला आने वाला है,सूरजपुर न्यायालय परिसर में लोगों की भीड़ बढ़ने लगी,मीडिया कर्मियों से लेकर मामले में रुचि रखने वाले आम लोगों तक बड़ी संख्या में लोग न्यायालय परिसर में मौजूद रहे, हर किसी की नजर इस बात पर थी कि करीब दो साल से चल रहे इस मामले में अदालत का निर्णय क्या आता है,न्यायालय परिसर में पूरे दिन सामान्य दिनों की अपेक्षा काफी अधिक चहल-पहल और भीड़भाड़ का माहौल देखने को मिला, मामले की गंभीरता को देखते हुए लोगों में फैसले को लेकर उत्सुकता साफ दिखाई दे रही थी, कौन दोषी ठहराया जाएगा, आरोपियों के संबंध में अदालत क्या निष्कर्ष देती है और क्या इसी दिन सजा भी सुनाई जाएगी—इन्हीं सवालों को लेकर लोग आपस में चर्चा करते नजर आए,मीडिया के लिए भी यह दिन बेहद महत्वपूर्ण था,अलग-अलग मीडिया संस्थानों के प्रतिनिधि न्यायालय परिसर में फैसले की जानकारी के इंतजार में मौजूद रहे,फैसले से जुड़ी हर जानकारी को तत्काल लोगों तक पहुंचाने के लिए पत्रकार न्यायालय परिसर में डटे रहे, वहीं मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए न्यायालय परिसर में लोगों की आवाजाही और गतिविधियां भी चर्चा का विषय बनी रहीं,दो साल से लंबित इस बहुचर्चित मामले में 28 सितंबर को होने वाली सुनवाई को लेकर पहले से ही लोगों की नजर थी। जैसे-जैसे सुनवाई आगे बढ़ी,वैसे-वैसे यह उत्सुकता भी बढ़ती गई कि अदालत का रुख क्या रहता है,अंततः जब यह स्पष्ट हुआ कि अपराध क्रमांक 575/2024 में कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह,चंद्रकांत चौधरी और आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को दोषी करार दिया गया है,तो न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों के बीच इसी फैसले की चर्चा होने लगी,हालांकि अदालत ने इसी दिन सजा सुनाने के बजाय सजा के बिंदु पर फैसला 8 अक्टूबर 2026 तक सुरक्षित रख दिया,इससे लोगों की उत्सुकता पूरी तरह खत्म नहीं हुई,बल्कि अब अगली तारीख को लेकर चर्चा शुरू हो गई, न्यायालय परिसर में मौजूद लोगों के बीच यही सवाल रहा कि दोषसिद्ध चारों आरोपियों को 8 अक्टूबर को क्या सजा सुनाई जाएगी।
दो साल से जिस फैसले का इंतजार था, उसमें आया बड़ा मोड़-13 अक्टूबर 2024 की रात सूरजपुर में हुई घटना ने पूरे प्रदेश को हिला दिया था, एक पुलिसकर्मी के परिवार को निशाना बनाए जाने की इस घटना के बाद कानून-व्यवस्था से लेकर अपराधियों के मनोबल तक कई सवाल खड़े हुए थे,घटना में सूरजपुर कोतवाली में पदस्थ प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पत्नी और उनकी पुत्री की हत्या कर दी गई थी,प्रारंभिक जांच के दौरान सामने आए घटनाक्रम के अनुसार हत्या से पहले पुलिसकर्मियों से जुड़ी कुछ घटनाएं हुई थीं और इसके बाद आरोपी की तलाश शुरू हुई थी,प्रधान आरक्षक तालिब शेख भी आरोपी की तलाश में लगी पुलिस टीम का हिस्सा बताए गए थे,इसके बाद उनका परिवार उस भयावह वारदात का शिकार हुआ,हत्या के बाद दोनों शव घर से लगभग पांच किलोमीटर दूर खेत में बरामद किए गए थे,घटना की भयावहता ने पूरे सूरजपुर में आक्रोश पैदा कर दिया था,अब करीब दो साल बाद इसी मामले में न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी करार दिया है।
अपराध क्रमांक 575/2024—दोहरे हत्याकांड का सबसे बड़ा मामला- प्रधान आरक्षक के घर में पत्नी और पुत्री के नहीं मिलने तथा घर में खून के निशान पाए जाने के बाद प्रारंभिक तौर पर थाना सूरजपुर में अपराध क्रमांक 575/2024 दर्ज किया गया था, पुलिस की विवेचना आगे बढ़ने पर मामले में हत्या सहित अन्य गंभीर धाराएं जोड़ी गईं,जांच में आरोपियों की भूमिका सामने आने के बाद पुलिस ने गिरफ्तारियां कीं और न्यायालय में प्रकरण पहुंचा,मामला न्यायालय में पहुंचने के बाद साक्ष्यों,गवाहों और अभियोजन पक्ष की दलीलों पर सुनवाई चली,करीब दो साल की न्यायिक प्रक्रिया के बाद सोमवार को न्यायालय ने इस मामले में चार आरोपियों को दोषी माना, दोषी ठहराए गए आरोपियों में कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह,चंद्रकांत चौधरी, आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी शामिल हैं, लेकिन यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि दोषी करार दिए जाने के बावजूद सजा अभी घोषित नहीं हुई है, न्यायालय ने सजा के प्रश्न पर आदेश 8 अक्टूबर 2026 तक सुरक्षित रखा है।
दोषसिद्धि और सजा में अंतर, इसलिए 8 अक्टूबर महत्वपूर्ण- सोमवार की कार्रवाई के बाद इस मामले को लेकर एक बात स्पष्ट रूप से समझना जरूरी है,न्यायालय ने चार आरोपियों को दोषी माना है, लेकिन इसका अगला चरण सजा का निर्धारण है, अर्थात 28 सितंबर 2026—दोषसिद्धि,8 अक्टूबर 2026—सजा पर फैसला आने की संभावना,इसलिए अभी यह कहना कि चारों आरोपियों को कितनी सजा हुई,सही नहीं होगा, सजा का अंतिम निर्धारण न्यायालय के 8 अक्टूबर के आदेश से स्पष्ट होगा,यही वजह है कि दो साल से इस मामले को देख रहे लोगों की नजर अब 8 अक्टूबर की अगली सुनवाई पर टिक गई है।
अपराध क्रमांक 574/2024 में कुलदीप साहू को 10 साल का कठोर कारावास-सोमवार को दूसरा महत्वपूर्ण फैसला अपराध क्रमांक 574/2024 में आया, यह मामला पुलिसकर्मियों को वाहन से कुचलकर जान से मारने के प्रयास से संबंधित था,घटना के दौरान पुलिस आरोपी को पकड़ने की कोशिश में थी और आरोप लगाया गया था कि वाहन से पुलिसकर्मियों को कुचलने का प्रयास किया गया, इस मामले में न्यायालय ने कुलदीप साहू को 10 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है, यह फैसला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि जिस घटनाक्रम के बाद प्रधान आरक्षक के परिवार तक मामला पहुंचा, उसी पूरे घटनाक्रम में पुलिसकर्मियों के साथ हुए कथित हमले का यह अलग आपराधिक प्रकरण था, अब इस मामले में न्यायालय ने अपना फैसला सुना दिया है।
अपराध क्रमांक 218/2024 में आरोप साबित नहीं हो सके-वहीं तीसरे मामले में परिणाम पूरी तरह अलग रहा,अपराध क्रमांक 218/2024,थाना जयनगर से संबंधित इस मामले में आरोप था कि कुलदीप साहू ने पुलिस टीम पर अवैध हथियार से फायरिंग कर जान से मारने का प्रयास किया,इस मामले में अभियोजन पक्ष आरोपों को पर्याप्त साक्ष्यों से सिद्ध नहीं कर पाया,न्यायालय ने साक्ष्यों के अभाव में आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया, यह फैसला इस पूरे घटनाक्रम के न्यायिक पक्ष की एक महत्वपूर्ण तस्वीर भी सामने रखता है, पुलिस विवेचना में दर्ज आरोप और न्यायालय में आरोप का प्रमाणित होना अलग-अलग कानूनी अवस्थाएं हैं,जिस आरोप को अभियोजन पर्याप्त साक्ष्यों से सिद्ध नहीं कर पाया,उसमें न्यायालय ने दोषमुक्ति का आदेश दिया।
13 अक्टूबर 2024 की वह रात—जब सूरजपुर दहल उठा-13 अक्टूबर 2024 को सूरजपुर में घटनाक्रम तेजी से बदला था,पुलिस की तत्कालीन जानकारी के अनुसार एक पुलिसकर्मी पर गर्म तेल फेंके जाने की घटना के बाद आरोपी की तलाश शुरू हुई थी,पुलिस आरोपी को पकड़ने के लिए सक्रिय हुई,इसी दौरान प्रधान आरक्षक तालिब शेख भी पुलिस टीम की कार्रवाई से जुड़े थे, इसके बाद प्रधान आरक्षक के घर को निशाना बनाए जाने का आरोप सामने आया,जब तालिब शेख घर पहुंचे तो पत्नी और पुत्री घर में नहीं थीं,घर में खून के निशान मिले,इससे पुलिस और परिवार के लोगों में हड़कंप मच गया,तलाश शुरू हुई और बाद में दोनों के शव शहर से लगभग पांच किलोमीटर दूर खेत में मिले,इस घटना ने सूरजपुर की कानून-व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
घर के भीतर संघर्ष के निशान और एक पिता की टूटती दुनिया– इस मामले का सबसे भावनात्मक पक्ष प्रधान आरक्षक तालिब शेख की पीड़ा रही, घटना के बाद सामने आई जानकारी के अनुसार घर में संघर्ष के निशान थे, पत्नी और पुत्री ने खुद को बचाने का प्रयास किया था, परिवार के अनुसार बेटी को बचाने की कोशिश की गई,लेकिन हमलावरों ने दोनों को नहीं छोड़ा,एक पिता के लिए इससे बड़ा आघात क्या हो सकता है कि जिस परिवार को सुरक्षित रखने के लिए वह पुलिस की वर्दी पहनकर लोगों की सुरक्षा करता था,उसी के घर में उसके लौटने से पहले उसकी पत्नी और बेटी की हत्या कर दी गई,यह घटना इसलिए भी अलग थी क्योंकि मृतक परिवार का मुखिया खुद पुलिस विभाग में था।
कुलदीप साहू की गिरफ्तारी के बाद सामने आया था पूरा घटनाक्रम- घटना के बाद कुलदीप साहू फरार हो गया था, पुलिस ने उसकी तलाश में अलग-अलग टीमें लगाईं, बाद में बलरामपुर क्षेत्र में उसे पकड़े जाने की जानकारी सामने आई,तत्कालीन पुलिस अधिकारियों के अनुसार आरोपी झारखंड की ओर से बस से अंबिकापुर की ओर आ रहा था, तभी पुलिस ने उसे पकड़ा,इसके बाद उसे सूरजपुर पुलिस को सौंप दिया गया,पुलिस ने मामले की विवेचना आगे बढ़ाई और अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार किया,उस समय पुलिस की ओर से जारी जानकारी और समाचार रिपोर्टों में हत्या के अलावा पुलिसकर्मियों पर हमला,वाहन से कुचलने का प्रयास और पुलिस टीम पर फायरिंग सहित अलग-अलग अपराधों का उल्लेख सामने आया था।
पांच आरोपियों की गिरफ्तारी, फिर जांच आगे बढ़ी-पुलिस की प्रारंभिक कार्रवाई में कुलदीप साहू सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था,गिरफ्तार किए गए आरोपियों के नामों में कुलदीप साहू, फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह,चंद्रकांत चौधरी,आर्यन विश्वकर्मा तथा सूरज साहू के नाम सामने आए थे,हालांकि वर्तमान न्यायालयीन कार्यवाही में हत्या के मामले में दोषी ठहराए गए चार नाम हैं कुलदीप साहू,फूल सिंह उर्फ रिंकू सिंह, चंद्रकांत चौधरी और आर्यन विश्वकर्मा, यही नाम अब 8 अक्टूबर को होने वाली सजा संबंधी कार्यवाही के केंद्र में रहेंगे।
आरोपों से अदालत की दोषसिद्धि तक पहुंचा मामला,इस पूरे प्रकरण को यदि घटनाक्रम के रूप में देखा जाए तो तस्वीर कुछ इस प्रकार बनती है…
– 13 अक्टूबर 2024ः सूरजपुर में घटनाक्रम और दोहरे हत्याकांड की शुरुआत।
– 16 अक्टूबर 2024 के आसपासः आरोपी कुलदीप साहू की गिरफ्तारी और अन्य आरोपियों की तलाश/गिरफ्तारी।
– इसके बादः हत्या सहित अलग-अलग मामलों में पुलिस विवेचना और न्यायालयीन कार्रवाई।
– अभियोजन चरणः आरोपों, साक्ष्यों और गवाहों पर सुनवाई।
– 28 सितंबर 2026ः अपराध क्रमांक 575/2024 में चार आरोपी दोषी करार।
– 28 सितंबर 2026ः अपराध क्रमांक 574/2024 में कुलदीप साहू को 10 वर्ष का कठोर कारावास।
– 28 सितंबर 2026ः अपराध क्रमांक 218/2024 में आरोप सिद्ध न होने पर दोषमुक्ति।
– 8 अक्टूबर 2026ः दोहरे हत्याकांड में सजा पर न्यायालय के आदेश की प्रतीक्षा।
सबसे बड़ा सवाल—8 अक्टूबर को क्या सजा मिलेगी?- अब इस पूरे मामले का सबसे बड़ा प्रश्न सजा को लेकर है,चार आरोपियों को दोषी करार दिए जाने के बाद अदालत के समक्ष अब दंड निर्धारण का चरण है,मामले की गंभीरता,लागू धाराएं,अपराध की परिस्थितियां और न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत सामग्री के आधार पर न्यायालय सजा निर्धारित करेगा,इसलिए अभी किसी निश्चित सजा की घोषणा करना उचित नहीं होगा, 8 अक्टूबर को न्यायालय का आदेश ही अंतिम तस्वीर सामने रखेगा।
एक ही दिन न्यायालय के तीन फैसले, लेकिन सबसे बड़ा अध्याय अभी बाकी- 28 सितंबर 2026 की न्यायालयीन कार्यवाही ने इस पूरे मामले को एक नए मोड़ पर पहुंचा दिया है, एक तरफ कुलदीप साहू को अपराध क्रमांक 574/2024 में 10 वर्ष का कठोर कारावास मिला, दूसरी तरफ अपराध क्रमांक 218/2024 में आरोप साबित नहीं होने के कारण दोषमुक्ति हुई, और तीसरी तरफ सबसे गंभीर अपराध क्रमांक 575/2024 में चार आरोपी दोषी ठहराए गए,लेकिन सजा का फैसला अभी सुरक्षित है,इसलिए सोमवार का दिन महत्वपूर्ण जरूर रहा,लेकिन इस बहुचर्चित मामले का अंतिम न्यायिक अध्याय अभी लिखा जाना बाकी है।
दो साल बाद दोषसिद्धि,अब सजा का इंतजार-13 अक्टूबर 2024 की वह घटना आज भी सूरजपुर के लोगों की स्मृति में ताजा है, एक प्रधान आरक्षक की पत्नी और पुत्री की हत्या ने पूरे जिले को झकझोर दिया था, आरोपी गिरफ्तार हुए,जांच हुई,आरोप-पत्र पेश हुआ और मामला न्यायालय तक पहुंचा,करीब दो वर्ष बाद अब न्यायालय ने हत्या के मामले में चार आरोपियों को दोषी माना है,लेकिन पीडि़त परिवार और आम लोगों का इंतजार अभी खत्म नहीं हुआ है,क्योंकि न्यायालय ने सजा का फैसला 8 अक्टूबर 2026 तक सुरक्षित रखा है,अब सवाल यह नहीं है कि हत्या के मामले में दोषी कौन ठहराए गए—यह न्यायालय ने स्पष्ट कर दिया है, अब सवाल है—दोषी ठहराए गए चारों आरोपियों को 8 अक्टूबर को न्यायालय क्या सजा सुनाता है? यही वह फैसला होगा, जिस पर इस बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड की न्यायिक प्रक्रिया का अगला और सबसे महत्वपूर्ण अध्याय निर्भर करेगा।
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