जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण ने राष्ट्रपति को भेजा ज्ञापन,कहा…चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली की हो समीक्षा

-संवाददाता-
अम्बिकापुर,28 सितम्बर 2026 (घटती-घटना)। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर और नए मतदाताओं के पंजीयन से जुड़े स्नशह्म्द्व-6 को लेकर चल रहा विवाद अब सरगुजा तक पहुंच गया है। जिला कांग्रेस कमेटी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को ज्ञापन भेजा है। कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ कार्रवाई,उनके कार्यकाल में लिए गए निर्णयों की समीक्षा के लिए संसदीय समिति गठित करने और विवादित निर्णयों की समीक्षा की मांग की है। जिला कांग्रेस अध्यक्ष बालकृष्ण ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की निर्णय प्रक्रिया में पारदर्शिता और सामूहिक निर्णय की व्यवस्था प्रभावित हुई है। कांग्रेस का दावा है कि कुछ महत्वपूर्ण फैसले अन्य चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों के बावजूद आगे बढ़ाए गए। पार्टी ने एसआईआर और स्नशह्म्द्व-6 से जुड़े निर्णयों को इसका उदाहरण बताते हुए चुनाव आयोग की स्वतंत्रता पर सवाल उठाया है।
स्नशह्म्द्व-6 में बदलाव या एसआईआर का अलग प्रावधान, यहीं से उठा विवाद : कांग्रेस के आरोपों के केंद्र में Form-6 है। पार्टी का कहना है कि नए मतदाताओं के नाम मतदाता सूची में जोड़ने की प्रक्रिया में अतिरिक्त जानकारी और घोषणा की व्यवस्था से युवाओं के लिए पंजीयन प्रक्रिया कठिन हुई है। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष है कि Form-6 में मूल रूप से बदलाव नहीं किया गया, बल्कि एसआईआर के तहत अलग घोषणा संबंधी प्रावधान लागू किया गया है। यही अंतर अब राजनीतिक विवाद का प्रमुख आधार बना हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार चुनाव आयोग के दो आयुक्तों की ओर से कुछ निर्णयों और प्रक्रियाओं पर आपत्तियां दर्ज किए जाने की बात सामने आई है। कांग्रेस ने इन्हीं आपत्तियों का हवाला देते हुए कहा है कि जब संवैधानिक संस्था के भीतर ही निर्णय प्रक्रिया को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं,तब पूरे मामले की स्वतंत्र समीक्षा जरूरी है।
कांग्रेस ने एसआईआर के आंकड़ों पर भी उठाए सवाल : ज्ञापन में कांग्रेस ने एसआईआर के माध्यम से बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची से हटाए जाने का आरोप लगाया है। पार्टी का कहना है कि मतदाता सूची में किसी भी पात्र नागरिक का नाम हटना केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं, बल्कि सीधे उसके मतदान के संवैधानिक अधिकार से जुड़ा विषय है।
इसलिए नाम हटाने की प्रक्रिया,उसके आधार और प्रभावित मतदाताओं को उपलब्ध कराए गए दावे-आपत्ति के अवसर की पारदर्शिता सार्वजनिक होनी चाहिए। कांग्रेस ने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग को राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त रखना लोकतंत्र की बुनियादी आवश्यकता है। ज्ञापन में केंद्र सरकार और चुनाव आयोग के बीच संबंधों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। हालांकि इन आरोपों पर चुनाव आयोग का पक्ष अलग है और आयोग एसआईआर की प्रक्रिया को निर्धारित कानूनी एवं संवैधानिक व्यवस्था के तहत संचालित किए जाने की बात कह चुका है।
राष्ट्रपति से तीन प्रमुख मांगें : जिला कांग्रेस ने राष्ट्रपति से मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ कार्रवाई की मांग के साथ उनके कार्यकाल में लिए गए विवादित निर्णयों की समीक्षा के लिए संसदीय समिति गठित करने की मांग की है। इसके अलावा एसआईआर और स्नशह्म्द्व-6 से संबंधित निर्णयों तथा उनके आधार पर की गई कार्रवाई की भी समीक्षा करने का अनुरोध किया गया है। कांग्रेस का कहना है कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर उठने वाले सवालों का समाधान राजनीतिक बयानबाजी से नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और संवैधानिक प्रक्रिया के माध्यम से होना चाहिए। अब देखना यह है कि राष्ट्रपति को भेजे गए इस ज्ञापन पर केंद्र और निर्वाचन तंत्र की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
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